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'चंबा' भारत की वो जगह जहां जिंदगी में एक बार जरूर घूमना चाहिए, कभी नहीं देखे होंगे ऐसे नजारे

Fri, 27 Nov 2020 11:20 AM IST
पंखुड़ी सिंह लाइफस्टाइल डेस्क
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हिमाचल प्रदेश का चंबा एक खूबसूरत टूरिस्ट प्लेस है। यं तो इस पहाड़ी प्रदेश में कई जगहें घूमने लायक है लेकिन चंबा की अपनी अलग खासियत है। दरअसल, अनेक संस्कृतियों और सभ्यताओं वाले देश भारत में रहकर भी अगर आप हिमाचल प्रदेश की इस खास जगह घूमने नहीं गए तो आप सफल घुमक्कड़ी नहीं कहलाएंगे। इतनी यात्राएं करके भी आपकी यात्रा अधूरी है अगर आपने चंबा नहीं घूमा। आज हम आपको इस हिमालयी प्रदेश के चंबा की खूबियों और मनमोहक जगहों के विषय में बताएंगे जो सिर्फ उत्तर भारत के इसी प्रदेश में है। कहीं घूमने की तैयारी कर रहे हैं तो इस बार चंबा घूम ही आइए। 
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- फोटो : pixa
दिल चुराने वाले चंबा का मौसम आपकी हर तकलीफ को दूर कर देगा। कहा जाता है कि चंबा शहर का नाम वहां की राजकुमारी चंपावती के नाम पर पड़ा। कहा जाता है कि राजकुमारी चंपावती हर दिन शिक्षा के लिए एक साधु के पास जाती थी। इससे राजा को शक हो गया और वो एक दिन राजकुमारी के पीछे-पीछे आश्रम पहुंच गया। वहां उसे कोई नहीं मिला, लेकिन उसे शक करने की सजा मिली और उससे उसकी बेटी छीन ली गई। आसमान में आकाशवाणी हुई कि प्रायश्चित करने के लिए राजा को यहां मंदिर बनवाना होगा। राजा ने चौगान मैदान के पास एक सुंदर मंदिर बनवाया। चंपावती मंदिर को लोग चमेसनी देवी के नाम से पुकारते हैं।
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- फोटो : pixa
चंबा का दिल है चौगान 
चंपावती मंदिर के सामने एक विशाल मैदान है, जिसे चौगान कहते हैं। एक तरह से चौगान चंबा शहर का दिल है। किसी समय चौगान का यह मैदान बहुत बड़ा था लेकिन बाद में इसे पांच हिस्सों में बांट दिया गया। मुख्य मैदान के अलावा अब यहां चार छोटे-छोटे मैदान हैं। चौगान मैदान में ही हर साल जुलाई में चंबा का मशहूर पिंजर मेला लगता है। चंबा के आसपास कुल 75 प्राचीन मंदिर हैं। इन मंदिरों में प्रमुख लक्ष्मीनारायण मंदिर, हरिराय मंदिर, चामुंडा मंदिर हैं।

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भूरी सिंह संग्रहालय 
किसी भी शहर के इतिहास को जानने के लिए यहां के म्यूजियम को जरूर देखना चाहिए। बेशक चंबा का भूरी सिंह म्यूजियम छोटा है, पर इसका प्रबंधन बेजोड़ है। इस म्यूजियम के प्रथम तल पर मिनिएचर पेंटिंग की सुंदर गैलरी है। इसमें गुलेर शैली की बनी पेंटिंग लगाई गई हैं। यहां चंबा शहर की पुरानी ब्लैक एंड वाइट तस्वीरें भी देखी जा सकती हैं।
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कालाटाॅप वन्य अभ्यारण्य
डलहौजी और खजियार के रास्ते में एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित है ये वन्यजीव अभ्यारण्य। इसके चारों तरफ पहाड़, शांत और वातावरण है। हरियाली के बीच स्थित कालाटाॅप सेंचुरी बेहद खूबसूरत है। ये कुछ इस तरह से बना हुआ है कि आप ट्रेकिंग करते-करते इसे पूरा घूम सकते हैं।

यहां आप स्वदेशी पक्षियों की प्रजातियों जैसे तीतर, यूरेशियन और ग्रे-हेडेड कैनरी को देख सकते हैं। चलते-चलते जब थक जाओ तो पास में बह रही रावी नदी के ठंडे पानी में पैर डालते ही सारी थकान छूमंतर हो जाती है।
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चंबा में शॉपिंग
हिमाचल में कुल्लू का शाॅल तो मशहूर है ही पर चंबा के शाॅल भी कुल्लू के शाॅल की तरह की सुंदर होते हैं। चंबा शहर में घूमते हुए आप चंबा की बनी हुई खूबसूरत जूतियां खरीद सकते हैं। ये जूतियां महिलाओं के लिए खास तौर पर बनाई जाती हैं। चंबा शहर के मुख्य बाजार में दुकानों में खरीदारी करते समय थोड़ा बहुत मोल-भाव किया जा सकता है।
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ऐसे पहुंचें 
चंबा से सबसे नजदीकी एयरपोर्ट पठानकोट है, जो चंबा से 120 कि.मी. दूर है। वहां से आप बस या टैक्सी से चंबा पहुंच सकते हैं। पठानकोट रेलवे स्टेशन पहुंचकर  भी वहां से आगे की यात्रा बस और कैब से कर सकते हैं। 
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