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भारत-पाकिस्तान का वो बॉर्डर जहां आज भी मौजूद है लैला-मजनू के निशान, जरूर जाएं पार्टनर के साथ

Wed, 26 Jun 2019 10:32 AM IST
पंखुड़ी सिंह लाइफस्टाइल डेस्क अमर उजाला
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आप अगर घूमने फिरने के शौकीन है तो जरुर आपने देश विदेश की सैर की होगी। भारत में तो सैर करने के लिए बहुत सारी जगह हैं जहां आप गए होंगे। चाहे वो पहाड़ों की सैर हो या समुद्र की। ऐतिहासिक किले हो या मकबरा यानि ताजमहल। आपने लगभग इन सारी जगहों का आनंद लिया होगा। लेकिन आज हम आपको एक ऐसी जगह के बारे में बताने जा रहें हैं जहां लैला मजनूं का मकबरा बना है। हो गए न हैरान तो आइए जानते है उस जगह के बारे में।
 
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लैला मजनूं का मकबरा
राजस्थान के श्रीगंगा नगर जिले के अनूपगढ़ से 11 किमी दूर एक छोटे से गांव बिंजौर में एक कब्र को लोग लैला मजनूं की कब्र कहते हैं। भारत पाकिस्तान के बार्डर पर बसे इस गांव में लोगों द्वारा बताई गई कहानी के अनुसार लैला और कैस (मजनूं का असली नाम) घर से भागते हुए राजस्थान पहुंचे और यहां के रेगिस्तान में भूख प्यास से बेहाल होकर दम तोड़ दिया। लैला के घर वालों ने बिंजौर में ही इनका मकबरा बनवा दिया।
 
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जून में लगता है मेला
इस कब्र पर प्यार और शादी में सफलता चाहने वाले लोग मत्था टेकने आते हैं। हर साल इस मकबरे पर मेला लगता है जिसमें लोग अपनी मनोकामना पूरी करने की चाह लिए आते हैं। इस मेले में लंगर का आयोजन किया जाता है जिसमें भक्तों को मुफ्त में खाना खिलाया जाता हैं।

 
 

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महत्व है ऐतिहासिक
अगर आप यहां घूमने आए हैं तो आपको निराशा बिल्कुल भी नहीं होगी क्योंकि यहां और भी बहुत सी जगहें हैं जहां आप जा सकते हैं।तो जानिए वो कौन सी जगह हैं जो यहां घूमने लायक है।
बरोर
बिंजौर का इतिहास में भी अहम महत्व है। बिजौंर के पास बरोर में पुरातत्व विभाग को हड़प्पा कालीन सभ्यता के कुछ अवशेष मिलें हैं। इन अवशेषों से पता चलता है कि इस जगह पर पहले कारखाना था।
 
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प्रतीकात्मक
हिन्दुमालकोट बार्डर
भारत और पाकिस्तान को अलग करने वाली सीमा है हिन्दुमालकोट बार्डर। श्रीगंगा नगर से 25 किमी दूर इस बार्डर को देखने पर्यटक दिन में आते हैं।
 
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बुद्धा जोहड़ गुरुद्वारा
ऐतिहासिक चित्रकला और इमारत के लिए प्रसिद्ध ये गुरुद्वारा बहुत पुराना है। गंगानगर के दाबला गांव में बसे इस गुरुद्वारे को देखने के लिए आप यहां जा सकते हैं।    
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