Surya mandir Aurangabad
- फोटो : Facebook
औरंगाबाद के सूर्य मंदिर की खासियत
यह देश का एकमात्र ऐसा सूर्य मंदिर है, जिसका द्वार पश्चिम दिशा की ओर खुलता है। इसके अलावा देश के सभी सूर्य मंदिर पूर्वाभिमुख हैं, लेकिन औरंगाबाद का सूर्य मंदिर पश्चिमाभिमुख है। मंदिर में सूर्य देवता की मूर्ति सात रथों पर सवार है। इसमें से उनके तीन रूपों का वर्णन किया गया है। पहला, उदयाचल- प्रात: सूर्य, दूसरा मध्याचल- मध्य सूर्य, और तीसरा अस्ताचल- अस्त सूर्य।
मंदिर करीब सौ फीट ऊंचा है, जहां स्थापत्य और वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण देखने को मिलता है। बिना सीमेंट अथवा चूना-गारा के मंदिर का निर्माण आयताकार, वर्गाकार, गोलाकार, त्रिभुजाकार आदि रूपों में काटे गए पत्थरों को जोड़कर हुआ है। मंदिर काले और भूरे रंग के पत्थरों से बना है। औरंगाबाद का सूर्य मंदिर ओडिशा में स्थित कोणार्क सूर्य मंदिर से मेल खाता है। मंदिर के बाहर लगे शिलालेख में ब्राह्मी लिपि में एक श्लोक लिखा है, जिसके मुताबिक, मंदिर का निर्माण 12 लाख 16 वर्ष पहले त्रेता युग में हुआ था।