Mukhtar and Shaheen
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मुख्तार कहते हैं, "बच्चों की वजह से इन्होंने बहुत चिंता की। जब आखिरी बच्चा खराब हुआ तो वह पूरे नौ महीने चार दिन का होने के बाद खराब हुआ। उस बात इन्हें बहुत बड़ा झटका लगा।"
"हमारा कहना यह मानती थीं, हम इनका कहना मानते थे और फिर हमारे बीच प्यार हो गया, यहां शादी करने के बाद हम कराची चले गए थे। वर्कशॉप के जरिए हम सही कमाते थे लेकिन जब यह बीमार हुईं तो काम छोड़ना पड़ा। सारा दिन इन्हीं का खयाल रखना पड़ता, कभी रोटी देनी है कभी दवाई देनी है। कभी तेल लगाना है, कंघा करना है, सुरमा लगाना है। कपड़े धोने हैं, खाना पकाना है। हम तो मर्द की जगह औरत बन गए खिदमत करने वाली।"