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पश्चिम बंगाल को जानने के लिए जरूर जाएं ये जगह, 1500 साल पुरानी दुर्लभ वस्तुएं हैं मौजूद

Fri, 08 Jan 2021 04:10 PM IST
तेजस्वी मेहता लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पश्चिम बंगाल - फोटो : social media

मालदा पश्चिम बंगाल का एक पुराना शहर है जो अपने स्वर्णिम अतीत और बेशकीमती संस्कृति के लिए जाना जाता है। यहां उत्कृष्ट स्तर की वास्तुकला के नमूने हैं जो कि कलाप्रेमियों को बहुत आकर्षित करते हैं। इतिहास और कला के इतर मालदा आम की विशिष्ट प्रजाति के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां का मालदा आम पूरे विश्वभर में खाया जाता है। यहां के बाजारों में रेशम और जूट का एक से एक सामान मिलता है। इसलिए यदि आप कला के कद्रदान हैं,साथ ही इतिहास को करीब से जानने में रूचि रखते हैं तब तो आपको एक बार मालदा जाना ही चाहिए।आइए हम आपको बताते हैं मालदा के दर्शनीय स्थालों के बारे में। अगली स्लाइड्स से फिलवक्त के लिए घर बैठे करें मालदा की सैर।

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दाखिल दरवाजे की बनावट अद्भुत है - फोटो : अमर उजाला

सलामी दरवाजा
सलामी दरवाजे के नाम से मशहूर इस दरवाजे का वास्तविक नाम दाखिल दरवाजा है। इस दरवाजे को तोप के इस्तेमाल के लिए उपयोग में लिया जाता था,यही वजह रही होगी कि इसे सलामी दरवाजा नाम मिला। दाखिल दरवाजे की बनावट अद्भुत है, इसे टेराकोटा एवं लाल ईंटों से सन् 1425 में बनवाया गया है। यह विशाल दरवाजा 21 मीटर ऊंचा और 34.5 मीटर चौड़ा है। दरवाजे को मालदा की शान भी कहा जाता है। 

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यह मकबरा सन् 1431 में बनवाया गया था - फोटो : अमर उजाला

एकलाखी मकबरा
जलाल-अद-दीन नामक एक हिंदु राजा था, जिसने इस्लाम धर्म अपनाया था। यह मकबरा उन्हीं का है, जो कि सन् 1431 में बनवाया गया था। यह मकबरा नायाब पत्थरों से बना हुआ है और इसकी आकर्षक नक्काशी अधिकांश कलाप्रेमियों को आकर्षित करती है। मकबरे के चारों ओर शानदार स्तंभ खड़े हैं।

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मस्जिद का संबंध पैगंबर मुहम्मद से है - फोटो : pixabay

कदम रसूल मस्जिद 
कदम रसूल मस्जिद को देखने धर्म प्रेमी जनता बहुत आती हैं। इसके पीछे मुख्य कारण यह है कि मस्जिद का संबंध पैगंबर मुहम्मद से है। इसे पाक स्थानों में गिना जाता है। इसका मस्जिद का नाम कदम रसूल मस्जिद इसलिए है क्योंकि कहा जाता है कि जब भी मुहम्मद यहां की चट्टानों पर चलते थे तो उनके पदचिह्नों के निशान बन जाते थे। यहां हर घर्म के लोग आते हैं। 

 

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यहां लगभग 1500 वर्ष पुराने दुर्लभ शिलालेख हैं - फोटो : अमर उजाला

मालदा संग्रहालय
किसी भी स्थान पर जाओ और वहां के संग्रहालय को यदि नहीं देखो तो यात्रा को अपूर्ण ही माना जाता है और फिर यदि पश्चिम बंगाल के इतिहास को जानने चाहते हैं तब तो बेहद आवश्यक है कि मालदा के संग्रहालय जाया जाए। यहां लगभग 1500 वर्ष पुराने दुर्लभ शिलालेख, प्राचीन मूर्तियां, टेराकोटा वस्तुओं और चीनी मिट्टी के बरतनों का अच्छा संग्रह है। यहां की प्राचीन वस्तु एवं खंडहर प्राचीन बंगाल के सबसे महत्वपूर्ण शहरों के बारे में अच्छी और विश्वसनीय जानकारी देते हैं।

 

 

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