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Shardiya Navratri 2024: नवरात्रि में करें यूपी के इन प्राचीन देवी माता मंदिरों के दर्शन, कुछ तो हैं सिद्धपीठ

Thu, 03 Oct 2024 07:50 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं और देवी भक्त हैं तो शारदीय नवरात्रि के मौके पर प्राचीन दुर्गा माता मंदिरों और शक्तिपीठों के दर्शन के लिए जा सकते हैं।
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यूपी के प्रसिद्ध दुर्गा माता मंदिर - फोटो : Amar Ujala
Shardiya Navratri 2024 Visit Popular Durga Mata Temples in UP: 3 अक्तूबर 2024 से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो रही है, जिसका समापन 11 अक्तूबर को नवमी तिथि पर होगा। नौ दिवसीय नवरात्रि का पर्व माता दुर्गा की अराधना का पर्व है। मान्यता है कि नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा धरती पर आती हैं। इस मौके पर नौ दिवसीय विशेष पूजा का आयोजन होता है। देवी माता मंदिरों में भव्य अनुष्ठान होते हैं। 

इस दौरान अगर आप माता दुर्गा के स्वरूपों के दर्शन करना चाहते हैं तो प्रसिद्ध देवी माता मंदिरों की ओर जा सकते हैं। उत्तर प्रदेश में कई प्रसिद्ध और प्राचीन देवी माता मंदिर हैं। इसके अलावा पूरे देश में 52 शक्तिपीठ हैं, जिसमें से कुछ उत्तर प्रदेश में स्थित हैं। शक्तिपीठ उस पवित्र स्थान को कहते हैं, जहां माता सती के अंग गिरे थे। उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं और देवी भक्त हैं तो शारदीय नवरात्रि के मौके पर प्राचीन दुर्गा माता मंदिरों और शक्तिपीठों के दर्शन के लिए जा सकते हैं।
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ललिता माता शक्तिपीठ प्रयागराज - फोटो : instagram
उत्तर  प्रदेश के शक्तिपीठ

वाराणसी में स्थित विशालाक्षी शक्तिपीठ

भगवान शिव की प्रिय नगरी बनारस के मणिकर्णिका घाट पर अलौकिक शक्तिपीठ है, जहां माता सती की मणिकर्णिका गिरी थी। यहां माता के विशालाक्षी और मणिकर्णी स्वरूप की पूजा होती है।

प्रयागराज में ललिता माता शक्तिपीठ

संगम नगरी प्रयागराज में भी देवी का प्रसिद्ध शक्तिपीठ है, जिसका नाम ललिता माता मंदिर है। यहां देवी मां के हाथ की अंगुली गिरी थी। यहां माता ललिता रूप की पूजा की जाती है।
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रामगिरी शक्तिपीठ, चित्रकूट - फोटो : Instagram
चित्रकूट में रामगिरि शक्तिपीठ

चित्रकूट जिले में रामगिरी शक्तिपीठ भी काफी प्रसिद्ध है। मान्यता है कि यहां माता सती का दायां स्तन गिरा है। इस स्थान पर माता शिवानी के स्वरूप की पूजा होती है।

वृंदावन में श्री उमा शक्तिपीठ

भगवान कृष्ण से जुड़ी नगरी वृंदावन में श्री उमा शक्तिपीठ बना हुआ है। इस मंदिर को कात्यायनी शक्तिपीठ भी कहते हैं। मान्यता है कि इस स्थान पर माता के बाल के गुच्छे और चूड़ामणि गिरे थे।  

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देवी पाटन शक्तिपीठ, बलरामपुर - फोटो : Instagram
बलरामपुर में देवीपाटन शक्तिपीठ

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में देवीपाटन शक्तिपीठ है। माना जाता है कि यहां माता सती का बायां स्कन्ध गिरा था। कुछ लोगों का कहना है कि यहां माता सती का पाटन वस्त्र गिरा था। इस शक्तिपीठ में एक अखंड ज्योति जल रही है। मान्यता है कि त्रेता युग से लगातार यहां अखंड ज्योति जल रही है।
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विंध्याचल माता मंदिर, मिर्जापुर - फोटो : Instagram
उत्तर प्रदेश के प्राचीन दुर्गा माता मंदिर

मिर्जापुर में विंध्याचल माता मंदिर

वाराणसी के निकटतम जिले मिर्जापुर में देवी का प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर है। विंध्याचल माता मंदिर के नाम से मशहूर इस स्थान को 51 शक्तिपीठों में प्रमुख माना जाता है। हालांकि यहां माता सती के शरीर को कोई अंग नहीं गिरा है। लेकिन मान्यता है कि देवी मां इस स्थान पर सशरीर निवास करती हैं।

गोरखपुर का तरकुलहा माता मंदिर

गोरखपुर जिले में माता का एक चमत्कारी मंदिर है, जिसे तरकुलहा मंदिर के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जब कोई अंग्रेज मां के मंदिर के पास से गुजरता था तो क्रांतिकारी बंधू सिंह उसका सिर काटकर देवी मां को समर्पित करता था। अंग्रेजों ने बंधू सिंह को पकड़कर सार्वजनिक फांसी दी लेकिन हर बार फांसी का फंदा टूट जाता था। यह 6 बार हुआ जिसपर जल्लाद ने बंधू सिंह से गिड़गिड़ाते हुए कहां कि अगर उन्हें फांसी नहीं दी तो अंग्रेज जल्लाद को मार देंगे। इस पर बंधू सिंह ने माता से प्रार्थना की और 7वीं बार में उन्हें फांसी हो गई। 
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