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तीन राज्यों की सीमाओं से लगा एक छोटा सा शहर, जहां पर बना है भारत का सबसे दुर्लभ मंदिर

Fri, 25 Oct 2019 01:37 PM IST
अपराजिता शुक्ला लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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- फोटो : pixa
भारत का हर शहर अपने अंदर बहुत सी कहानियां समेटे हुए है। अगर आपको घूमना-फिरना पसंद है और नई जगह एक्सप्लोर करना चाहते हैं तो इस बार भारत के छोटे से शहर पठानकोट में जरूर जाएं। जब भी ट्रेन से आप यात्रा करते होंगे तो पठानकोट का नाम जरूर आता है। रेलवे के प्रमुख स्टेशनों में गिना जाने वाला ये शहर बहुत सी ऐतिहासिक विरासतों से भी समृद्ध है। तो चलिए जानें कि इस छोटे से शहर में क्या है एक्सप्लोर करने के लिए.....

 
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- फोटो : pixa
अगर आप पंजाब जा रहें है तो पठानकोट होकर आपकी ट्रेन जरूर जाती होगी। एक बार अगर आप इस शहर में उतरकर यहां की खूबसूरती देखेंगे तो दंग रह जाएंगे। क्योंकि इतने सारे किलों और प्राचीन मंदिरों के होने के बावजूद भी कोई इस शहर का नाम टूरिस्ट प्लेस के रूप में नहीं लेता है। पंजाब के इस छोटे से शहर की सीमाएं पंजाब, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश से लगी हुई हैं। 

 
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शाहपुर कुंडी किला
एक समय पठानी राजपूतों की राजधानी के रूप में जाना जाने वाला शहर पठानकोट में बहुत से किले हैं। जिनमें से एक किला है शाहपुर कुंडी किला। इस समय गेस्ट हाउस के रूप में बदल चुका ये किला कभी रावी नदी के किनारे कई सारे युद्धों की तैयारी का गवाह रह चुका है।

 

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काठगढ़ मंदिर
काठगढ़ मंदिर का अत्यधिक धार्मिक महत्व है। भगवान शिव और देवी पार्वती को समर्पित इस मंदिर की विशेषता यहां पर स्थापित लिंग है। जिसके बारे में बहुत सारे रहस्य प्रचलित हैं। कहानियों के अनुसार, भगवान राम की खोज करने आए उनके भाई भरत ने इस मंदिर के दर्शन किए थे। ब्यास और कोंच नदियों के संगम पर स्थित, काठगढ़ मंदिर विरासत और असाधारण स्थापत्य शिल्प कौशल के लिए प्रसिद्ध है।

 
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नूरपुर किला
पठानकोट के प्रसिद्ध वास्तुशिल्प एवं ऐतिहासिक स्थानों में सबसे सुंदर है नूरपुर का किला। पहले इसे धमेरी किले के रूप में जाना जाता था। इस किले को 10वीं शताब्दी में बनवाया गया था। लेकिन आज ये किला खंडहर में बदल चुका है। कहते हैं कि इस किले को अंग्रेजों ने वर्ष 1905 में भूकंप के बाद ध्वस्त कर दिया था। किले में एक मंदिर भी है, जिसे बृज राज स्वामी मंदिर के नाम से जाना जाता है। ये मंदिर बहुत अनमोल है क्योंकि यह देश का एकमात्र ऐसा स्थान है जहां भगवान कृष्ण और मीराबाई की मूर्तियों की एक साथ पूजा होती है। 16वीं सदी में निर्मित इस मंदिर के दर्शन पठानकोट आने पर जरूर करने चाहिए।

 
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मुक्तेश्वर मंदिर
पठानकोट में हिंदू देवी-देवताओं को समर्पित कई शानदार मंदिर हैं जिनमें से एक मुक्तेश्वर मंदिर है। रावी नदी के तट पर स्थित यह पवित्र गर्भगृह एक पहाड़ी के ऊपर बसा है और इसमें तांबे के साथ संगमरमर का शिवलिंग स्थापित है। यह मंदिर हिंदू पौराणिक देवता भगवान शिव को समर्पित है एवं इसमें पवित्र गुफा मंदिरों का एक समूह है। कहते हैं कि अज्ञातवास में रहने के दौरान ये गुफाएं पांडवों की शरणस्थली हुआ करती थीं। मंदिर में ब्रह्मा, विष्णु, हनुमान, पार्वती और गणेश जैसे अन्य हिंदू देवताओं की मूर्तियां भी स्थापित हैं।

 
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