क्या आपको पता है कि मर्यादापुरुषोत्तम भगवान राम ने रावण वध के बाद लंका से लौटते वक्त अपनी आखिरी तपस्या कहां की थी? अगर नहीं पता तो हम आपको यह जानकारी दे रहे हैं और साथ ही उस जगह की सैर पर भी ले जा रहे हैं। भगवान राम ने अपनी आखिरी तपस्या देवप्रयाग में की थी। यह खूबसूरत जगह उत्तराखंड में है जो कि प्रसिद्ध तीर्थस्थल के तौर पर जाना जाता है। देवप्रयाग अलकनंदा-भागीरथी नदी के संगम पर बसा है। कहा जाता है कि देवभूमि उत्तराखंड के पंच प्रयागों में से एक देवप्रयाग है। मान्यता है कि जब राजा भागीरथ ने गंगा को पृथ्वी पर उतरने के लिए मनाया तो उनके साथ ही 33 करोड़ देवी- देवता भी गंगा के साथ स्वर्ग से देवप्रयाग में उतरे थे। ये ही वो जगह है जहां भागीरथी और अलकनंदा नदी का संगम होता है ।