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Pitru Paksha 2022: पूर्वजों का श्राद्ध और पिंडदान करना है, तो भारत की इन प्रसिद्ध जगहों पर जाएं

Sat, 17 Sep 2022 10:06 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पितृपक्ष 2022 - फोटो : अमर उजाला।
Pitru Pakshra 2022: हिंदू धर्म के मुताबिक, इस साल पिंड दान 10 सितंबर से शुरू होकर 25 सितंबर तक चल रहा है। इस अवधि में पूर्वजों का पिंडदान और श्राद्ध कर्म किया जाता है। पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनको मोक्ष प्रदान करने के लिए हिन्दू धर्म में पिंडदान को एक मुख्य कार्य माना गया है। हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद कई तरह के कर्मकाण्ड किए जाते हैं, जिसमें श्राद्ध, अस्थि विसर्जन और पिंडदान से जुड़े रिवाज शामिल हैं। यह सब पूर्वजों या मृतक परिजन का आत्मा की शांति और मोक्ष की प्राप्ति के उद्देश्य से मनाते हैं। पिंडदान भी ऐसी ही एक रस्म है। माना जाता है कि भगवान ब्रह्मा ने इस प्रथा की शुरुआत की थी। भारत में कई ऐसी जगहें हैं, जो आत्मा को मोक्ष दिलाने के लिए मृतक के श्राद्ध कर्म और पिंड दान के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं। हरिद्वार से लेकर संगम और गया से लेकर बद्रीनाथ तक में आप पिंडदान कर सकते हैं। चलिए जानते हैं पिंडदान के लिए भारत की पांच सबसे महत्वपूर्ण जगहों के बारे में।
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वाराणसी घाट - फोटो : अमर उजाला
वाराणसी

उत्तर प्रदेश का वाराणसी जिला भगवान भोलेनाथ का प्रिय नगर हैं। जहां शिवजी काशी विश्वनाथ के रूप में विराजमान हैं। काशी में सबसे पवित्र नदियों के तट हैं। यहां गंगा घाट पिंड दान के लिए सबसे उपयुक्त जगह है। काशी के गंगा घाटों पर ब्राह्मण अनुष्ठान करते हैं और पूर्वजों का पिंडदान करवाते हैं।
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बोधगया - फोटो : istock
गया

बिहार का गया पूर्वजों के पिंडदान और श्राद्ध कर्म के लिए सबसे बड़े और महत्वपूर्ण स्थानों में शामिल है। माना जाता है कि फल्गु नदी के तट पर भगवान विष्णु के अवतार हैं। इस पवित्र नदी में डुबकी लगाने से पाप दूर होते हैं और इस पवित्र स्थान पर पिंडदान से पूर्वजों को दुखों से मुक्ति मिल जाती है।

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पुष्कर - फोटो : सोशल मीडिया
पुष्कर

राजस्थान का पुष्कर धार्मिक महत्व से सबसे पवित्र स्थान है। यहां भगवान ब्रह्म का एकमात्र मंदिर है। पुष्कर में पवित्र झील स्थित है। मान्यता है कि यह झील भगवान विष्णु की नाभि से निकली है। इस झील में स्नान करने से सारे पाप दूर हो जाते हैं। यहां अश्विन के पवित्र माह में पिंड दान समारोह का आयोजन होता है।
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बदरीनाथ धाम - फोटो : अमर उजाला
बद्रीनाथ

चार धामों में से एक और उत्तराखंड का पवित्र तीर्थ स्थल बद्रीनाथ है। यह धाम अलकनंदा के तट पर स्थित है, जहां बना ब्रह्म कपाल घाट पिंडदान समारोह के लिए शुभ माना जाता है। दिवंगत की आत्मा और पूर्वजों को मोक्ष प्राप्ति के लिए बद्रीनाथ धाम जा सकते हैं।
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अयोध्या - फोटो : अमर उजाला
अयोध्या

उत्तर प्रदेश में स्थित भगवान श्री राम की जन्मभूमि अयोध्या भी पिंडदान के लिए सबसे अच्छे और पवित्र स्थलों में से एक है। यहां सरयू नदी के तट पर भात कुंड है, जहां ब्राह्मण पुजारी की अध्यक्षता में अनुष्ठान कराया जाता है।
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