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स्वर्ण मंदिर और वाघा बॉर्डर ही नहीं, अमृतसर की और कई खूबियां, भगवान राम से भी जुड़ा है संबंध

Mon, 13 Jan 2020 11:52 AM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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Golden Temple, Amritsar - फोटो : Pixabay
स्वर्ण मंदिर, जलियांवाला बाग, वाल्मीकि आश्रम, वाघा बॉर्डर, पंजाब का अमृतसर आपको हर कदम पर लाजवाब करता है। इतिहास की खूबसूरती के सभी रंग यहां दिखते हैं। सिखों के लिए तो यह पवित्र शहर है ही, हिंदुओं के लिए भी यह पावन नगरी है। इस शहर से भगवान राम और सीता का भी नाता है और रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि का भी जुड़ाव है। पर्यटकों के लिए यह शहर परफेक्ट डेस्टिनेशन होता है। आइए, जानते हैं इस शहर के बारे में और ज्यादा विस्तार से:
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Golden Temple, Amritsar - फोटो : Social Media
बॉलीवुड के संगीतकार और अभिनेता हिमेश रेशमिया की पत्नी सोनिया कपूर अमृतसर से ही है। हिमेश का यहां आना-जाना लगा रहता है। उनकी नजर में क्या है अमृतसर की खूबियां, जानते हैं उन्हीं के शब्दों में:
मुझे पंजाबी लोग, उनकी संस्कृति और खानपान बहुत अच्छे लगते हैं। मैं पंजाब कई बार गया हूं। मुझे अमृतसर शहर बहुत भाया। अमृतसर का अपना एक समृद्ध इतिहास है। वहीं घूमने फिरने के लिए भी ये शहर पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है।
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Golden Temple, Amritsar
हिमेश बताते हैं: मैं जितनी बार अमृतसर गया हूं, उतनी बार इसकी खूबसूरती के अलग-अलग पहलुओं का दीदार किया है। हर बार मैंने इस शहर के अलग रंग देखे हैं। हाल के दिनों में इस ऐतिहासिक शहर को नई पहचान मिली। अमृतसर की शान है यहां स्थित स्वर्ण मंदिर, जो देश-विदेश में गोल्डन टेंपल के नाम से मशहूर है। विशाल सरोवर में बने ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिब के चलते ही अमृतसर विश्व भर में प्रसिद्ध है।

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golden temple
हिमेश के शब्दों में, दुनिया के कोने-कोने से पर्यटक स्वर्ण मंदिर आते हैं और यहां आकर श्री गुरु साहब के चरणो में नतमस्तक होते हैं। मान्यता है कि यहां उनकी हर मुराद पूरी होती है। यहां आकर मन को असीम शांति मिलती है। वे कहते हैं— मेरा मानना है कि अगर अमृतसर जाएं और दरबार साहिब का दर्शन न करें तो यात्रा अधूरी रह जाती है।
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Golden Temple
हाल के दिनों में आज गुरुद्वारा साहिब के बाहर आसपास काफी सुंदरीकरण हुआ है, जहां घूमते हुए ऐसा लगता है, मानों भारत में नहीं बल्कि कहीं विदेश में घूम रहे हैं। स्वर्ण मंदिर के अलावा यहां दुर्गियाना मंदिर, जालियांवाला बाग स्मारक, वाघा बॉर्डर समेत अनेक प्रसिद्ध स्थान है। गुरु नगरी अपने पुरातन इतिहास समेटे हुए है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
रामायण से ऐसे जुड़ा है संबंध
दुर्गियाना मंदिर भी स्वर्ण मंदिर की तरह एक सरोवर के बीचों बीच स्थित है। इस मंदिर के पीछे हनुमान जी का मंदिर भी है। मान्यता है कि हनुमान जी भगवान राम के पुत्र लव और कुश के कब्जे से अश्वमेध यज्ञ के घोड़े को वापस लाने यहां आए थे। पावन वाल्मीकि तीर्थस्थल भी यहीं है। कहा जाता है कि महर्षि वाल्मीकि ने रामायण की रचना यहीं की थी। इन्हीं के आश्रम में माता सीता ने लव को जन्म दिया था और कुश भी यहीं प्रकट हुए थे।
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जलियांवाला बाग
बातचीत के दौरान हिमेशा बताते हैं कि जालियांवाला बाग का नाम तो सबने सुना है, जहां ब्रिटिश अधिकारी जनरल डायर ने निहत्थे भारतवासियों पर गालियां बरसाई थी। वाघा बॉर्डर पर हर शाम भारतीय और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की टुकड़ियां एकत्र होकर रिट्रीट सेरेमनी करती है तो यहां होने वाली परेड का नजारा अनोखा होता है। खानपान की बात करें तो यहां के तंदूरी व्यंजन बेहद लजीज हैं। मक्के की रोटी, सरसों का साग और लस्सी का स्वाद तो गजब का है। अमृतसरी कुल्चे और नान भी काफी जायकेदार होते हैं।
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एयर इंडिया
अमृतसर की दूरी, हवाई मार्ग से:
  • दिल्ली से: 400 किमी
  • मुंबई से: 1409 किमी
  • बंगलूरू से: 2090 किमी
हवाई मार्ग से औसतन किराया 2600 रुपये है। अमृतसर पहुंचने के लिए देश के कई प्रमुख रेलवे स्टेशनों से सीधी रेल सेवा है। वहीं सड़क मार्ग से भी अमृतसर नेशनल हाइवे से जुड़ा हुआ है।

(जगदीश जोशी से बातचीत पर आधारित)
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