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न्यूयॉर्क में दोस्तों की जरूरत नहीं पड़ेगी, घूमने का मौका मिले तो सोचना मत

Sun, 09 Jun 2019 03:39 PM IST
प्रशांत राय मधुर भंडारकर
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- फोटो : pixabay
न्यूयॉर्क का स्वभाव मुंबई की तरह है। वहां का वातावरण आपको ऊबने नहीं देता। वहां की हवा में रचनात्मक ऊर्जा है। आप प्रफुल्लित महसूस करते हैं। घूमने से ज्यादा ‘शिक्षाप्रद’ कुछ नहीं है। आप नई संस्कृतियों, नई भाषाओं और नए-नए खान-पान के बारे में कुछ न कुछ नया सीखते हैं। फिल्मकार होने से मुझे देश-विदेश में घूमने का बहुत मौका मिलता है और मैं कोई मौका नहीं गंवाता। आधी रात को भी मुझे चलने के लिए कहें, तो बैग तुरंत पैक होता है।
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- फोटो : pixabay
बचपन में मैं भगवान से मांगता था कि मुझे घूमने के खूब मौके मिलें। देश में तो मुझे कई शहर पसंद हैं परंतु विदेश में न्यूयॉर्क (अमेरिका) बेहतरीन है। वहां के लोगों से आप तुरंत कनेक्ट हो जाते हैं। माहौल बढ़िया होता है। एनर्जी लेवल कमाल का है। वहां मेरे ऐसे कई हिंदुस्तानी और अमेरिकी दोस्त बन चुके हैं, जिनके घर में दाल-चावल खाने को मिलता है। विश्वास करें कि मैंने न्यूयॉर्क में वड़ा पाव तक खाया है। वहां आपको कई भारतीय होटल मिलेंगे। 
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- फोटो : pixabay
मैं न्यूयॉर्क बार-बार जाना पसंद करता हूं। वहां सेंट्रल पार्क बहुत अच्छा लगता है। जब भी जाता हूं तो काफी वॉक करता हूं। न्यूयॉर्क का स्वभाव मुंबई की तरह है कि वहां कोई आप पर ध्यान नहीं देता कि क्या कर रहे हैं। लोगों को आपसे कोई समस्या नहीं होती। अमेरिका में कहते हैं कि अगर आप लॉस एंजिल्स जाएंगे तो दोस्त ढूंढने पड़ेंगे मगर न्यूयॉर्क में दोस्तों की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि वहां का वातावरण आपको ऊबने नहीं देता। उस हवा में रचनात्मक ऊर्जा है। आप प्रफुल्लित महसूस करते हैं। 

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- फोटो : pixabay
न्यूयॉर्क का टाइम्स स्क्वायर अनूठी जगह है। छोटी-छोटी सड़कें तमाम इलाकों को जोड़ती हैं। आप पैदल कहीं भी निकल सकते हैं। बसें हैं, टैक्सी हैं। लोग आपको आराम से पता बता देते हैं। न्यूयॉर्क की नाइट लाइफ शानदार है। मैनहट्टन की तरफ निकल जाइए। थियेटर और ऑपरा हैं। पिछली बार मैं गया तो वहां टॉम हैंक्स जैसे बेहतरीन एक्टर/स्टार का प्ले हो रहा था। मैंने देखा। ऐसी कई चीजे हैं, जो न्यूयॉर्क को जीवंत शहर बनाती हैं। इसलिए अमेरिका के भी किसी कोने में पैदा हुआ इंसान, एक बार जरूर वहां जाना चाहता है। 
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- फोटो : pixabay
न्यूयॉर्क में स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी है, एंपायर स्टेट बिल्डिंग है, ब्रुकलिन ब्रिज है। इतनी दर्शनीय जगहें हैं कि पेट भर घूमने के लिए कि दस दिन कम पड़ जाएंगे। मुझे याद है कि बचपन में ज्योतिषियों से पूछा करता था, क्या विदेश जाने के योग हैं? अमेरिका जाना तब किसी उपलब्धि-सा था। मैं पहली बार 2002 में न्यूयॉर्क गया। दोस्तों के साथ। तब तक ‘चांदनी बार’ की सफलता मिल चुकी थी। 
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ईमानदारी से कहूं तो मैं अमेरिका जाने के लिए इतना एक्साइटेड था कि जिंदगी में वैसी उत्तेजना मुझे कम ही हुई है। अमेरिका से पहले मैं दुबई, मस्कट और बैंकॉक गया था। अमेरिका जाने की बात ऐसी थी कि हां, अब आपको कामयाबी मिल गई है। मैंने गरीबी देखी थी। मध्यमवर्गीय परिवार से आया था। जब न्यूयॉर्क पहुंचा तो यकीन नहीं हो रहा था कि मेरा सपना सच हुआ। वहां की 60-70 मंजिला गगनचुंबी इमारतें देख कर हैरान था। 
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जब मैं गया था तब न्यूयॉर्क में 2001 का वर्ल्ड ट्रेड सेंटर हादसा हुए साल भर नहीं हुआ था। माहौल बहुत सख्त था। तब हम पांच दोस्त टाइम्स स्क्वायर के मैरियट होटल में रुके थे। मैं आज भी जाता हूं तो उस होटल को देखता हूं। आखिरी बार मैं 2017 में यूनाइटेड नेशंस की तरफ से मिले एनआरआई अवार्ड (भारत गौरव) को लेने गया था। अभी तक मैं आठ-नौ बार न्यूयॉर्क हो आया हूं और आगे भी जाने की इच्छा रखता हूं। 
रवि बुले से बातचीत पर आधारित  
 
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