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कैंची धाम नहीं, इन 2 जगहों पर भी साधना करते थे नीम करोली बाबा, ऐसे बनाएं पूरा ट्रिप प्लान

Wed, 07 Oct 2026 04:46 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Neem Karoli Baba Travel Guide : Nनीम करोली बाबा से जुड़ी यात्रा को केवल कैंची धाम तक सीमित रखने के बजाय भूमियाधार और समाधि स्थल को भी शामिल किया जाए तो यह यात्रा ज्यादा आध्यात्मिक और अनुभवपूर्ण बन सकती है। कैंची धाम की बढ़ती लोकप्रियता के बीच इन स्थानों की यात्रा आपको अपेक्षाकृत शांत वातावरण में बाबा की आध्यात्मिक परंपरा को समझने का अवसर दे सकती है।
 
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नीम करोली बाबा के मंदिर - फोटो : Ai
Neem Karoli Baba Temples: नीम करोली बाबा का नाम आते ही सबसे पहले उत्तराखंड का प्रसिद्ध कैंची धाम याद आता है। लेकिन बाबा नीम करोली से जुड़ी आध्यात्मिक विरासत सिर्फ कैंची धाम तक सीमित नहीं मानी जाती। कुमाऊं की पहाड़ियों में कुछ ऐसे स्थान भी हैं, जिनका संबंध बाबा की साधना, तप और आध्यात्मिक परंपरा से जोड़ा जाता है। इनमें भूमियाधार और बाबा से जुड़े समाधि मंदिर का विशेष महत्व बताया जाता है।

कैंची धाम की लोकप्रियता पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है और यहां श्रद्धालुओं की भीड़ भी काफी बढ़ी है। लेकिन अगर आप कैंची धाम की भीड़ से दूर लेकिन नीम करोली बाबा से जुड़ी पवित्र जगहों पर जाना चाहते हैं भूमियाधार और समाधि मंदिर को अपना सूची में शामिल कर सकते हैं। 

इन धार्मिक स्थलों की यात्रा भी दिल्ली से आसानी से तय की जा सकती है। दिल्ली से निकलने वाले यात्रियों के लिए इसे 2 से 3 दिन की आध्यात्मिक यात्रा के रूप में प्लान किया जा सकता है।
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भूमियाधार में नीम करोली बाबा का आश्रम - फोटो : instagram
भूमियाधार- बाबा से जुड़ा शांत आध्यात्मिक पड़ाव

कैंची धाम से अलग भूमियाधार का माहौल अपेक्षाकृत शांत आध्यात्मिक अनुभव दे सकता है। यहां स्थित श्री हनुमान मंदिर भूमियाधार स्थानीय धार्मिक स्थल के रूप में जाना जाता है। नीम करोली बाबा की आध्यात्मिक परंपरा से जुड़े यात्रा मार्गों में भूमियाधार को भी शामिल किया जाता है। यहां आने वाले श्रद्धालु मंदिर में दर्शन और कुछ समय शांत वातावरण में ध्यान-प्रार्थना के लिए रुक सकते हैं।

भूमियाधार आश्रम उत्तराखंड के नैनीताल जिले में भवाली और हल्द्वानी मार्ग पर कैंची धाम के पास है। यह संत नीम करौली बाबा की प्रथम तपोस्थली और एक प्रमुख हनुमान मंदिर है। यहां स्थित हनुमान जी की मूर्ति की स्थापना नीम करौली बाबा ने की थी। अगर आपका उद्देश्य सिर्फ घूमना नहीं, बल्कि बाबा से जुड़े स्थलों को समझना है, तो भूमियाधार को यात्रा में जगह देना एक अच्छा विकल्प हो सकता है।
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नीम करोली बाबा समाधि स्थल, वृंदावन - फोटो : Instagram
समाधि मंदिर: बाबा की स्मृति से जुड़ा स्थल

नीम करोली बाबा की आध्यात्मिक विरासत को समझने के लिए उनके समाधि स्थल से जुड़े स्थान की यात्रा भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। यहां श्रद्धालु प्रार्थना और ध्यान के लिए पहुंचते हैं। ऐसी जगहों पर यात्रा का उद्देश्य केवल पर्यटन नहीं बल्कि शांत वातावरण में कुछ समय बिताना और बाबा की शिक्षाओं एवं सेवा की परंपरा को समझना भी हो सकता है।

मान्यता है कि नीम करोली बाबा कम आयु में ही घर छोड़कर आध्यात्म की खोज में निकल पड़े। अपना अधिकांश समय उन्होंने उत्तराखंड के कैंची धाम में बिताया लेकिन वह वृंदावन में भी रहे और वर्ष 1973 में उन्होंने वृंदावन में ही देह त्याग दी। यहां बाबा नीम करोली का महासमाधि मंदिर भी मौजूद हैं।

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कैंची धाम की यात्रा - फोटो : अमर उजाला
कैंची धाम को भी यात्रा में रखें

यात्रा की शुरुआत या समापन श्री कैंची धाम, परम पूज्य बाबा श्री नीम करोली महाराज के दर्शन से किया जा सकता है। कैंची धाम दिल्ली से सड़क मार्ग से लगभग 320-340 किलोमीटर के आसपास पड़ता है और सामान्य परिस्थितियों में कार से करीब 7-9 घंटे लग सकते हैं। हालांकि अभी यहां भीड़ काफी बढ़ी है। इसलिए वीकेंड और छुट्टियों के बजाय यात्रा की तारीख सोच-समझकर चुनना बेहतर रहेगा।
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नीम करोली के पास जगहें - फोटो : AI
दिल्ली से कैसे बनाएं ट्रिप प्लान?

पहला दिन- दिल्ली से कुमाऊं

सुबह जल्दी दिल्ली से कार लेकर निकलें। सामान्य रूट दिल्ली से गाजियाबाद, हापुड़, मुरादाबाद, रामपुर होते हुए हल्द्वानी से काठगोदाम और अंत में भवाली की तरफ जा सकते हैं। इसके बाद अपने ठहरने के स्थान तक पहुंच सकते हैं।पहले दिन ज्यादा जगह कवर करने के बजाय आराम करें, क्योंकि पहाड़ी रास्तों पर यात्रा में समय लग सकता है।


दूसरा दिन- भूमियाधार और कैंची धाम

सुबह भूमियाधार जाकर मंदिर में दर्शन करें और कुछ समय शांत वातावरण में बिताएं। इसके बाद कैंची धाम की तरफ जाएं। कैंची धाम में भीड़ की स्थिति पहले से जांच लेना समझदारी होगी। हालिया रिपोर्टों में भारी भीड़ और ट्रैफिक की समस्या सामने आई है।

तीसरा दिन- समाधि स्थल और वापसी

तीसरे दिन बाबा से जुड़े समाधि मंदिर/स्थल के दर्शन करें और फिर दिल्ली वापसी शुरू करें। 
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काठगोदाम के लिए ट्रेन - फोटो : अमर उजाला।
ट्रेन से जाने वालों के लिए

दिल्ली से काठगोदाम तक ट्रेन लेना एक सुविधाजनक विकल्प हो सकता है। काठगोदाम से आगे टैक्सी या स्थानीय वाहन लेकर भवाली-कैंची धाम क्षेत्र तक पहुंचा जा सकता है। कैंची धाम काठगोदाम से लगभग 40 किलोमीटर के आसपास बताया जाता है।


इस यात्रा में किन बातों का रखें ध्यान?
  • पहाड़ी यात्रा के लिए सुबह जल्दी निकलना बेहतर है।
  • वीकेंड और लंबे अवकाश में भीड़ अधिक हो सकती है।
  • मंदिरों के स्थानीय नियमों और समय का पालन करें।
  • पहाड़ी रास्तों पर रात में ड्राइविंग से बचना बेहतर है।
  • बारिश के मौसम में सड़क और मौसम की स्थिति जरूर जांचें।
  • आध्यात्मिक स्थलों पर शांति और स्वच्छता बनाए रखें।
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