हिंगुला शक्तिपीठ, पाकिस्तान
- फोटो : facebook
41. सुगंधा शक्तिपीठ- बांग्लादेश के शिकारपुर से 20 किमी दूर माता की नासिका गिरी थी। इस शक्तिपीठ में माता को सुगंधा कहा जाता है। इस शक्तिपीठ का एक अन्य नाम उग्रतारा शक्तिपीठ है।
42. जयंती शक्तिपीठ -बांग्लादेश के सिलहट जिले में जयंतिया परगना में माता की बाईं जांघ गिरी थी। यहां माता देवी जयंती नाम से स्थापित हैं।
43.
श्रीशैल महालक्ष्मी -बांग्लादेश के सिलहट जिले में माता सती का गला गिला था। इस शक्तिपीठ में महालक्ष्मी स्वरूप की पूजा होती है।
44. यशोरेश्वरी माता शक्तिपीठ -बांग्लादेश के खुलना जिले में यशोर नाम की जगह है, जहां मां सती की बाईं हथेली गिरी थी।
45.
इन्द्राक्षी शक्तिपीठ- श्रीलंका के जाफना नल्लूर में देवी की पायल गिरी ती। इस शक्तिपीठ को इन्द्राक्षी कहा जाता है।
46.
गुहेश्वरी शक्तिपीठ- नेपाल मे पशुपतिनाथ मंदिर से कुछ दूरी पर बागमती नदी के किनारे यह शक्तिपीठ है। यहां मां सती के दोनों घुटने गिरे थे। यहां शक्ति के महामाया या महाशिरा रूप की पूजा होती है।
47. आद्या शक्तिपीठ- नेपाल में गंडक नदी के पास आद्या शक्तिपीठ है। मान्यता है कि इस स्थान पर माता सती का बायां गाल गिरा था। यहां माता के गंडकी चंड़ी स्वरूप की पूजा होती है।
48.
दंतकाली शक्तिपीठ- नेपाल के बिजयापुर गांव में माता सती के दांत गिरे थे। इस कारण इस शक्तिपीठ को दन्तकाली शक्तिपीठ के नाम से जाना जाता है।
50. मनसा शक्तिपीठ- तिब्बत में मानसरोवर नदी के पास माता सती की दाईं हथेली गिरी थी। यहां उन्हें माता दाक्षायनी कहा जाता है। माता यहां एक शिला के रूप में स्थापित हैं।
51.
मिथिला शक्तिपीठ- भारत नेपाल सीमा पर माता सती का बायां कंधा गिरा था। यहां माता को देवी उम कहा जाता है।
52.
हिंगुला शक्तिपीठ-पाकिस्तान के बलूचिस्तान में देवी का हिंगुला शक्तिपीठ है। इस शक्तिपीठ में माता को हिंगलाज देवी के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि यहां माता सती का सिर गिरा था।