Naimisharanya Dham: उत्तर प्रदेश के सीतापुर में स्थित नैमिषारण्य धाम प्राचीन धार्मिक स्थल है। यहां चक्रतीर्थ, ललिता देवी शक्तिपीठ और कई पवित्र आश्रम श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र हैं।
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यूपी के सीतापुर में हैं पवित्र धाम नैमिषारयण
- फोटो : instagram
Naimisharanya Dham: उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में स्थित नैमिषारण्य धाम भारत के सबसे प्राचीन और पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह वही पावन भूमि है, जहां हजारों ऋषि-मुनियों ने तपस्या की थी और महर्षि वेदव्यास ने पुराणों का ज्ञान दिया था।
हिंदू धर्म में नैमिषारण्य को मोक्षदायिनी भूमि माना जाता है, जहां दर्शन, पूजा और स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। यहां स्थित चक्रतीर्थ, मां ललिता देवी शक्तिपीठ, व्यास गद्दी और दधीचि आश्रम श्रद्धालुओं के प्रमुख आस्था केंद्र हैं। मान्यता है कि भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से इस तीर्थ की स्थापना हुई थी। हर साल देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु नैमिषारण्य पहुंचकर धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ और तीर्थ दर्शन करते हैं।
यूपी के सीतापुर में हैं पवित्र धाम नैमिषारयण
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नैमिषारण्य का धार्मिक महत्व
नैमिषारण्य का उल्लेख कई प्राचीन हिंदू ग्रंथों में मिलता है। मान्यता है कि इसी स्थान पर महर्षि शौनक की अध्यक्षता में 88 हजार ऋषियों ने यज्ञ किया था। इसी दौरान सूत जी महाराज ने ऋषियों को पुराणों की कथाएं सुनाईं। इसलिए इस स्थान को ज्ञान और तपस्या की भूमि भी कहा जाता है।
चक्रतीर्थ है सबसे प्रमुख स्थल
नैमिषारण्य का चक्रतीर्थ यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए सबसे बड़ा आकर्षण है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र इसी स्थान पर आकर रुका था। इसी कारण इसे पवित्र तीर्थ माना जाता है। श्रद्धालु यहां स्नान कर पूजा-अर्चना करते हैं और इसे पुण्यदायी मानते हैं।
मां ललिता देवी शक्तिपीठ की मान्यता
नैमिषारण्य में स्थित मां ललिता देवी मंदिर को 51 शक्तिपीठों में शामिल माना जाता है। धार्मिक कथाओं के अनुसार माता सती के अंग गिरने से इन शक्तिपीठों की स्थापना हुई थी। नवरात्रि के दौरान यहां विशेष पूजा और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में भक्त शामिल होते हैं।
व्यास गद्दी का महत्व
नैमिषारण्य में स्थित व्यास गद्दी को महर्षि वेदव्यास से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। मान्यता है कि यहीं बैठकर उन्होंने वेदों और पुराणों का संकलन किया था। यह स्थान धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है।
महर्षि दधीचि आश्रम
नैमिषारण्य में महर्षि दधीचि आश्रम भी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। पौराणिक कथाओं के अनुसार महर्षि दधीचि ने देवताओं की रक्षा के लिए अपनी अस्थियों का दान किया था, जिससे इंद्र का वज्र बनाया गया।
कैसे पहुंचे नैमिषारण्य
नैमिषारण्य उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से करीब 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है। नजदीकी रेलवे स्टेशन नैमिषारण्य और सीतापुर हैं, जबकि हवाई यात्रा के लिए लखनऊ एयरपोर्ट सबसे नजदीक है।
निकटतम रेलवे स्टेशन: नैमिषारण्य रेलवे स्टेशन और सीतापुर जंक्शन। निकटतम एयरपोर्ट: लखनऊ का चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा। सड़क मार्ग: लखनऊ, सीतापुर और हरदोई से सड़क मार्ग द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है।