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History Of Bihar: बिहार का नाम "बिहार" क्यों पड़ा? पीछे छिपी है हजारों साल पुरानी कहानी

Sat, 05 Jul 2025 04:54 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Mera Bharat-Mera Rajya History Of Bihar: जनसंख्या के लिहाज से देश की तीसरा सबसे बड़ा राज्य बिहार कई कारणों से प्रसिद्ध है। यह महात्मा बुद्ध, महावीर, चाणक्य और आर्यभट्ट जैसे महान लोगों से संबंधित है। लेकिन क्या आपको पता है कि बिहार का नाम बिहार कैसे पड़ा और पहले इस स्थान को क्या कहा जाता था?

मेरा भारत-मेरा राज्य सीरीज में जानिए बिहार के इतिहास के बारे में और कैसे और कब पड़ा बिहार का नाम, इस राज्य की क्या है खास बात।
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बिहार - फोटो : Adobe
History Of Bihar :  भारत का हर एक राज्य पर्यटन की दृष्टि से खास है। हर राज्य, हर शहर एक अलग संस्कृति,  इतिहास और कहानी कहता है। सब में कुछ न कुछ खास है, लेकिन इस खास को आप कितना जानते हैं? पूरे देश की बात नहीं, लेकिन आप अपने राज्य को कितना जानते हैं, ये सवाल जरूर करेंगे।

हम अपने शहर और राज्य की तारीफ दूसरों के सामने करते हैं लेकिन आपके राज्य में क्या-क्या खास है और इसका इतिहास कितना समृद्ध है, ये जरूर जान लीजिए, ताकि गर्व हो कि हम भारतीय होने के साथ ही अपने राज्य के निवासी है। इसी कड़ी में शुरुआत करते हैं बिहार से। बिहार भारत का पूर्वी राज्य है जो अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के लिए जाना जाता है। जनसंख्या के लिहाज से देश की तीसरा सबसे बड़ा राज्य बिहार कई कारणों से प्रसिद्ध है। यह महात्मा बुद्ध, महावीर, चाणक्य और आर्यभट्ट जैसे महान लोगों से संबंधित है। लेकिन क्या आपको पता है कि बिहार का नाम बिहार कैसे पड़ा और पहले इस स्थान को क्या कहा जाता था?

मेरा भारत-मेरा राज्य सीरीज में जानिए बिहार के इतिहास के बारे में और कैसे और कब पड़ा बिहार का नाम, इस राज्य की क्या है खास बात।
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बिहार - फोटो : Adobe
बिहार का इतिहास 

भारत का हर एक राज्य अपनी अलग सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान के लिए जाना जाता है। लेकिन जब बात आती है "गौरव और ज्ञान की भूमि" की, तो बिहार का नाम सबसे ऊपर आता है। बिहार सिर्फ बाढ़, राजनीति और पलायन से जुड़ा हुआ राज्य नहीं है बल्कि यह उस सभ्यता की नींव है जहां से भारत ने सोचने, समझने और सवाल करने की शुरुआत की। बिहार भारत का तीसरा सबसे बड़ा राज्य है, लेकिन इतिहास और ज्ञान की दृष्टि से यह शायद सबसे पहला है।
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बिहार - फोटो : Adobe
कैसे पड़ा बिहार नाम?

बिहार नाम कोई संयोग नहीं है बल्कि इस राज्य की विरासत की पहचान है। बिहार वह स्थान है जहां बुद्ध ने ज्ञान दिया, जहां भिक्षुओं ने ध्यान लगाया और जहां से पूरी दुनिया को शांति का मार्ग मिला। ईसा पूर्व छठी सदी में, बौद्ध धर्म का विस्तार हुआ। उसके बाद यह भूमि हजारों भिक्षुओं का घर बन गई। वे जंगलों में शांति से तप करते, ध्यान लगाते और ज्ञान बांटते। भिक्षुओं के रहने और साधना करने के स्थान को 'विहार' कहा जाता था। संस्कृत में विहार का अर्थ है, मठ या आश्रम। 

समय बदला और बदलते वक्त के साथ शब्दों का उच्चारण बदला। 'विहार' शब्द धीरे-धीरे 'बिहार' में बदल गया। मुगल काल और बाद में अंग्रेजों ने भी इसी नाम को अपना लिया।

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नालंदा विश्वविद्यालय - फोटो : अमर उजाला
ज्ञान का स्थल

भिक्षुओं के 'विहार' में नालंदा, विक्रमशिला, ओदंतपुरी, जैसे सैकड़ों विहार इस भूमि पर बस गए। नालंदा, विक्रमशिला और ओदंतपुरी जैसे महान विश्वविद्यालयों की स्थापना यहीं हुई थी, जो दुनियाभर के विद्यार्थियों को आकर्षित करते थे। आज का बिहार, उस बौद्ध विरासत की पहचान है, जिसने पूरी दुनिया में शांत, ज्ञान और विवेक का संदेश दिया। आधुनिक बिहार तेजी से बदल रहा है, विकसित हो रहा है लेकिन इसकी आत्मा वही है, जो कभी 'विहारों' में बसती थी। जहां ज्ञान, जागरूकता,  साधना और संघर्ष था।
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बिहार - फोटो : Adobe
बिहार के प्रबुद्ध लोग

बिहार के इतिहास पर नजर डालें तो यह वहीं धरती है जहां,
  • महात्मा बुद्ध ने बोधगया का ज्ञान प्राप्त किया था।
  • महावीर स्वामी ने जैन धर्म को दिशा दी।
  • चाणक्य की नीतियों ने मौर्य साम्राज्य को खड़ा किया।
  • आर्यभट्ट ने गणित और खगोलशास्त्र में अद्वितीय योगदान दिया।
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मिथिला शक्तिपीठ बिहार - फोटो : instagram
बिहार की यात्रा

बिहार की यात्रा केवल स्थलों की यात्रा नहीं होती, यह आत्मा की यात्रा है। जब आप बोधगया में पीपल के पेड़ के नीचे खड़े होते हैं, तो शांति खुद आपसे मिलने आती है। नालंदा के खंडहरों में आज भी ज्ञान की गूंज सुनाई देती है। राजगीर की वादियां आज भी बुद्ध की पदचिन्हों को संजोए हुए हैं और पटना में गंगा के किनारे बैठकर आप इतिहास को बहते हुए महसूस कर सकते हैं। बिहार की यात्रा बौद्धिक, आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक सौंदर्य के संगम का अनोखा अनुभव कराती है। अगर आप पर्यटन प्रेमी हैं तो बिहार आपके लिए एक अनदेखा खजाना साबित हो सकता है।
  • बोधगया को बौद्ध धर्म का केंद्र माना जाता है। जहां भगवान बुद्ध को बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त हुआ। यहां का महाबोधि मंदिर यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है।
  • नालंदा विश्वविद्यालय ज्ञान की नगरी है। यह प्राचीन विश्व का सबसे बड़ा और प्रसिद्ध विश्वविद्यालय है जहाँ हजारों छात्र देश-विदेश से अध्ययन करने आते थे। आज इसके खंडहर भी इतिहास की महक से भरे हैं।
  • राजगीर प्राकृतिक सौंदर्य और धर्मस्थल है। हरियाली से घिरा यह शहर कभी मगध साम्राज्य की राजधानी था। यहां गर्म पानी के झरने, शांति स्तूप, वेणुवन, और विश्व शांति पैगोडा दर्शनीय हैं।
  • पटना में इतिहास और आधुनिकता का संगम दिखता है। बिहार की राजधानी पटना में पटना म्यूज़ियम, गांधी मैदान, हरमंदिर साहिब (पटना साहिब) और गोलघर जैसे दर्शनीय स्थल हैं।
  • वैशाली पहला गणराज्य और महावीर की जन्मभूमि है। यह जैन धर्म का महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। यहाँ महावीर जन्म स्थान, अशोक स्तंभ, और बौद्ध स्तूप प्रमुख हैं।
  • कैमूर पहाड़ियां और झरने आपका मन मोह लेंगे। प्राकृतिक प्रेमियों के लिए कैमूर की वादियां, कुंड, तेलहर कुंड, और पलमो झरना जैसे स्थान मन को शांति देते हैं।
  • सोनपुर मेला एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला है। हर साल कार्तिक पूर्णिमा पर सोनपुर में लगने वाला यह मेला सांस्कृतिक और व्यापारिक दृष्टि से बहुत प्रसिद्ध है।
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