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Mathura Vs Varanasi Holi 2026: लठमार से लेकर घाटों की भस्म तक, मथुरा और काशी में होली कब है?

Sat, 28 Feb 2026 11:57 AM IST
Shivani Awasthi लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Mathura vs Varanasi Holi: रंगों की होली देखनी हो या भस्म की होली, दोनों ही रंग उत्तर प्रदेश में देखने को मिलते हैं। एक ओर कान्हा की भक्ति में लोग झूमते हैं तो दूसरी ओर शिव की भक्ति में लीन हो जाते हैं। आइए जानते हैं मथुरा और वाराणसी की होली की खासियत, परंपरा और यात्रा विवरण।
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मथुरा और वाराणसी की होली - फोटो : Amar ujala
Mathura- Varanasi Me Holi Kab Hai: एक ओर गलियों में उड़ता गुलाल, कहीं लट्ठ और फूलों की मार... तो वहीं दूसरी ओर गंगा के शांत घाटों पर अघोरीसाधु-संतों के बीच चिता-भस्म को होली का दृश्य, सोचिए दोनों का ही नजारा कितना अलौकिक होगा। कृष्ण की बाललीलाओं से लेकर शिव की भक्ति में लीन होने तक होली सच में कितने ही रंगों से रंगी होती है।

होली भारत का सबसे रंगीन और उल्लासपूर्ण त्योहार है। वैसे तो पूरे देश में होली मनाई जाती है लेकिन होली की असली धूम देखनी हो तो मथुरा-वृंदावन और काशी जरूर जाएं। इन दोनों शहरों की होली विश्व प्रसिद्ध है। बृज हो या वाराणसी दोनों स्थानों पर होली एक दिन का त्योहार नहीं, बल्कि कई दिनों तक चलने वाला सांस्कृतिक और धार्मिक उत्सव है। 

मथुरा की होली राधा-कृष्ण की प्रेम परंपरा से जुड़ी है, जबकि काशी की होली शिव की मस्ती और आध्यात्मिकता से संबंधित है। दोनों शहरों का अनुभव अलग लेकिन अविस्मरणीय है। अगर आप इस साल की होली को खास बनाना चाहते हैं, तो इन दो पवित्र नगरीयों में से किसी एक का चयन जरूर करें।

आइए जानते हैं 2026 में मथुरा और काशी में होली कब है, क्या हैं इनकी खास परंपराएं और कैसे करें होली पर मथुरा-काशी की यात्रा। 

 
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मथुरा और वाराणसी की होली - फोटो : Amar ujala
2026 में होली कब है?

इस साल होलिका दहन 3 मार्च 2026, मंगलवार को होना है। कुछ स्थानों पर चंद्र ग्रहण के कारण 2 मार्च को भी होलिका दहन किया जाएगा।
वहीं रंगों की होली यानी धुलेंडी 4 मार्च 2026, बुधवार को खेली जाएगी। 

मथुरा और काशी में मुख्य उत्सव इन्हीं तिथियों के आसपास मनाया जाएगा, लेकिन मथुरा-वृंदावन क्षेत्र में होली लगभग एक सप्ताह पहले से शुरू हो जाती है।


ब्रज होली 2026 के प्रमुख कार्यक्रमों का शेड्यूल
 
  •  25 फरवरी: बरसाना में लड्डू मार होली
  • 26 फरवरी: बरसाना में लट्ठमार होली
  •  27 फरवरी: नंदगांव में लट्ठमार होली
  •  28 फरवरी: वृंदावन में फूलों की होली उत्सव
  • 01 मार्च: गोकुल में छड़ी मार होली
  • 02 मार्च: गोकुल में होली उत्सव
  •  03 मार्च: होलिका दहन
  •  04 मार्च: होली का पर्व
  •  05 मार्च: दाऊजी मंदिर में हुरंगा होली उत्सव

वाराणसी होली 2026 के प्रमुख कार्यक्रमों का शेड्यूल
 
  • 27 फरवरी: रंगभरी एकादशी
  • 01 मार्च: मसान होली
  • 03 मार्च: होलिका दहन
  • 04 मार्च: रंगभरी/ धुलेंडी 


 
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braj ki holi - फोटो : instagram
मथुरा की होली

मथुरा भगवान कृष्ण की जन्मस्थली है और बृज क्षेत्र राधा कृष्ण की नगरी, जहां होली के मौके पर रंगों का महासागर देखने को मिलता है। यहां होली धार्मिक आस्था और परंपरा से जुड़ी है। यहां का मुख्य आकर्षण है,
 
  • बरसाने की लठमार होली
बरसाना में लठमार होली विश्व प्रसिद्ध है। यहां महिलाएं पुरुषों पर लाठी से प्रतीकात्मक प्रहार करती हैं, जिसे देखने देश-विदेश से पर्यटक आते हैं।
  • नंदगांव की होली
नंदगांव में भी पारंपरिक अंदाज में होली खेली जाती है। यहां गली गली में रंग उड़ता नजर आ जाता है। लोग गीले रंगों में भीगे दिखाई देते हैं।
  • बांके बिहारी मंदिर की फूलों की होली
बांके बिहारी मंदिर में फूलों से होली खेली जाती है। यहां रंगों की जगह पुष्प वर्षा होती है।
  • द्वारिकाधीश मंदिर उत्सव
द्वारिकाधीश मंदिर में भव्य झांकियां और रंगोत्सव होता है।

 

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कृष्ण जन्मभूमि मंदिर, मथुरा - फोटो : istock
मथुरा होली ट्रैवल पैकेज

होली पर मथुरा जाना चाहते हैं तो तीन दिन औऱ दो रातों के सफर की योजना बनाएं। 
  • पहला दिन- मथुरा पहुंचें। फिर श्रीकृष्ण जन्मभूमि में दर्शन करें। शाम को विश्राम घाट में होने वाली आरती में शामिल हों। 
  • दूसरा दिन- बरसाना और नंदगांव की लठमार होली में शामिल हो। यहां महिलाएं पुरुषों को प्रतिकात्मक रूप से लठ से मारती हैं और पुरुष ढाल से स्वयं की रक्षा करते हैं। यहां के मंदिरों में भी जा सकते हैं।
  • तीसरा दिन- अगले दिन वृंदावन, बांके बिहारी मंदिर, प्रेम मंदिर और स्थानीय बाजारों की सैर करें।

प्रति व्यक्ति अनुमानित खर्च

होली के मौके पर मथुरा की यात्रा करना चाहते हैं तो अनुमानत: लगभग 6000 से 10000 रुपये खर्च आ सकता है। इसमें परिवहन खर्च, होटल में ठहरने, स्थानीय परिवहन, खान-पान को मिलाकर होने वाला खर्च शामिल है। 
  • दिल्ली से ट्रेन या बस का किराया लगभग 800 से 1500 रुपये तक लग सकता है।
  • मथुरा-वृंदावन में इस दौरान होटल के दाम बढ़ जाते हैं तो लगभग 3000 से 6000 रुपये खर्च पर कमरा मिल जाएगा। 
  • स्थानीय परिवहन और खानपान में 1000-1500 रुपये तक व्यय हो सकता है। 
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मसान होली 2026 - फोटो : amar ujala
वाराणसी की होली

शिव की नगरी में भांग और रंग का जो संगम देखने को मिलता है, वो सच में बहुत भव्य होता है। काशी की होली आध्यात्मिक और मस्ती का अनोखा संगम है। यहां होली पर भांग, ढोल-नगाड़े और गंगा घाटों पर रंगों की धूम देखने को मिलती है। वाराणसी की होली का मुख्य आकर्षण होता है, 
  • गंगा घाटों की होली
दशाश्वमेध घाट और अस्सी घाट पर सुबह से रंगों का उत्सव शुरू हो जाता है।
  • भांग और संगीत
काशी में पारंपरिक भांग और लोक संगीत के साथ होली का अलग ही रंग होता है।
  • शिव मंदिरों में उत्सव
काशी विश्वनाथ मंदिर में विशेष पूजा और रंगारंग कार्यक्रम होते हैं।

 
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वाराणसी यात्रा - फोटो : Instagram
काशी होली ट्रैवल पैकेज

होली पर वाराणसी की सैर की योजना है तो दो दिन और एक रात की यात्रा योजना बनाएं। इसमें, 
  • पहले दिन गंगा आरती में शामिल हों और काशी विश्वनाथ के दर्शन करें। साथ ही कालभैरव मंदिर और हनुमान मंदिर के दर्शन करने भी जा सकते हैं। 
  • दूसरे दिन घाटों पर होली उत्सव का लुत्फ उठा सकते हैं। बनारस की गलियों में घूमें। यहां की मशहूर पान और ठंडाई का स्वाद लें। 

प्रति व्यक्ति अनुमानित खर्च 
  • बनारस की ट्रेन या फ्लाइट का कियारा 1000 रुपये से 4000 रुपये हो सकता है। इस दौरान फ्लाइट के दाम कुछ बढ़ भी सकते हैं। 
  • होटल में एक रात के लिए कमरा लगभग 2000 से 5000 रुपये के बीच मिल जाएगा।
  • भोजन औऱ स्थानीय परिवहन पर 1500 रुपये तक व्यय करना पड़ सकता है। 
  • कुल मिलाकर होली पर बनारस की यात्रा 5000 से 10000 रुपये में की जा सकती है। 

सावधानियां

ध्यान रखें कि होली के मौके पर देश विदेश से लोग मथुरा और बनारस की होली में शामिल होने के लिए पहुंचते हैं। इस कारण यहां काफी भीड़ होती है। ऐसे में परिवहन से लेकर होटल तक की बुकिंग पहले से कराना बेहतर रहता है। वहां पहुंचकर ठहरने के लिए जगह मिलना मुश्किल हो सकता है। साथ ही महंगा भी पड़ सकता है। अधिक भीड़ में अधिक सावधानी की जरूरत होती है। 
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