फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Mahashivratri 2023 : यहां स्थित है एशिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर, पत्थरों से आती है डमरू जैसी आवाज

Sat, 18 Feb 2023 12:50 AM IST
श्रुति गौड़ लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आज हम आपको एक ऐसे शिव मंदिर की जानकारी देने जा रहे हैं, जिसे एशिया का सबसे ऊंचा मंदिर कहा जाता है। इस मंदिर में महाकाल के दर्शन के लिए काफी दूर-दूर से लोग आते हैं।
विज्ञापन
1 of 5
एशिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर - फोटो : facebook/हिमाचल-कला-संस्कृति
Mahashivratri 2023 : महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर लोग शिव मंदिरों और शिवालयों में दर्शन के लिए जाते हैं। भारत में कई ऐसे शिव मंदिर हैं, जिनका इतिहास काफी गहरा है। इन मंदिरों से पौराणिक कथाएं जुड़ी हुई हैं। माना जाता है कि इन मंदिरों में जाने से हर मनोकामना पूरी होती है। आज हम आपको एक ऐसे शिव मंदिर की जानकारी देने जा रहे हैं, जिसे एशिया का सबसे ऊंचा मंदिर कहा जाता है। इस मंदिर में महाकाल के दर्शन के लिए काफी दूर-दूर से लोग आते हैं। मंदिर का नाम है जटोली शिव मंदिर और ये हिमाचल में स्थित है।

भगवान शिव का ये मंदिर अपने चमत्कारों के साथ-साथ अपनी शक्तियों के लिए भी काफी फेमस है। ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर में लगे पत्थरों को थपथपाने पर डमरू जैसी आवाज आती है। आइए अब देर ना करते हुए आपको हिमाचल में स्थित इस शिव मंदिर के बारे में बताते हैं। 
विज्ञापन

2 of 5
महाशिवरात्रि पर लगता है श्रद्धालुओं का जमावड़ा  - फोटो : Social media
महाशिवरात्रि पर लगता है श्रद्धालुओं का जमावड़ा 

इस मंदिर को एशिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर माना जाता है। ये हिमाचल प्रदेश के सोलन शहर से तकरीबन सात किमी दूर है। महाशिवरात्रि के दिन यहां दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। जटोली शिव मंदिर दक्षिण-द्रविड़ शैली से बनाया गया है। मंदिर का भवन निर्माण कला का एक खूबसूरत नमूना है। 
विज्ञापन

3 of 5
एशिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर - फोटो : facebook/हिमाचल-कला-संस्कृति
क्या है मंदिर की मान्यता ?

ऐसा कहा जाता है कि भगवान भोलेनाथ ने इस मंदिर में कुछ समय के लिए निवास किया था। जिसके बाद यहां स्वामी कृष्णा परमहंस ने यहां तपस्या की। उनके ही मार्गदर्शन पर मंदिर का निर्माण कराया गया। इस मंदिर के निर्माण मेंं पूरे 39 साल लगे थे। 

4 of 5
जटोली शिव मंदिर - फोटो : Social media
भगवान शिव ने किया था जटोली पर प्रहार

मान्यता ये भी है कि, इस स्थान पर पहले पानी की काफी परेशानी होती थी। इस समस्या को दूर करने के लिए स्वामी कृष्णानंद परमहंस ने भगवान शिव की घोर तपस्या की। जिससे प्रसन्न होकर शिवजी ने अपने त्रिशूल से उस स्थान पर जमीन पर प्रहार किया और वहां से पानी निकलने लगा। उस दिन के बाद से इस जगह पर कभी पानी की कमी सामने नहीं आई। 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
एशिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर - फोटो : facebook/हिमाचल-कला-संस्कृति
कैसी है मंदिर की संरचना ?

अगर बात करें जटोली मंदिर की संरचना की तो इस मंदिर का गुंबद 111 फीट ऊंचा है। भगवान शिव के मंदिर में प्रवेश करने के लिए भक्तों को 100 सीढ़ियां चढ़कर जाना पड़ता है। मंदिर के बाहरी ओर चारों तरफ कई देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित की गई हैं। वहीं मंदिर के अंदर स्फटिक मणि शिवलिंग है। साथ ही भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती जी की मूर्ति भी स्थापित है। इसके साथ ही मंदिर के ऊपरी छोर पर 11 फुट ऊंचा विशाल सोने का कलश रखा हुआ है। मंदिर का भवन देखने लायक है। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें