Krishna Janmashtami 2024: भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, भद्र माह की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। उनका जन्म पाप के नाश और असत्य व अधर्म के विनाश के लिए हुआ था।
जन्माष्टमी के अवसर पर भक्त श्री कृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा करते हैं। इस दिन कृष्ण मंदिरों में विशेष उत्सव आयोजित होते हैं। बाल गोपाल का जन्मोत्सव मनाया जाता है और भजन कीर्तन किया जाता है। अधिकांश मंदिर रात के समय बंद हो जाते हैं, लेकिन चूंकि लड्डू गोपाल का जन्म मध्यरात्रि को हुआ था, इसलिए जन्माष्टमी पर मंदिरों में आधी रात को पूजा होती है।
श्रीकृष्ण का नाम सुनते ही मथुरा, गोकुल और वृंदावन की याद आती है, जहां उन्होंने अपना बचपन बिताया। बाद में वे गुजरात के द्वारका के राजा बने। इन स्थानों पर श्रीकृष्ण के प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर हैं। दक्षिण भारत में भी भगवान कृष्ण के कई विशाल और प्राचीन मंदिर हैं। अगर आप जन्माष्टमी के समय दक्षिण भारत की यात्रा पर हैं, तो आप इन मंदिरों के दर्शन कर सकते हैं।