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बड़ी रोचक है दुनिया की इस सबसे डरावनी सुरंग की कहानी, खोपड़ियों से बनी हैं दीवारें

Wed, 16 Jan 2019 11:03 AM IST
ललित फुलारा लाइफस्टाइल, अमर उजाला
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दुनिया रहस्यों से भरी हुई है। इंसान को रहस्यमय चीजें सबसे ज्यादा लुभाती हैं। लाखों-करोड़ों की संख्या में हर साल लोग पहाड़, नदी, बर्फ और झरनों को छोड़ डरावनी जगहें देखने जाते हैं। यहां हम आपको दुनिया की सबसे डरावनी लंबी सुरंग के बारे में बता रहे हैं जो उस शहर में बनी है जो प्यार का शहर कहलाता है। जिसकी संस्कृति में रोमांस बसा है। जो शहर अपने फैशन के लिए जाना जाता है और दुनियाभर के सेलिब्रिटी जिस शहर की गोद में हर साल अपनी छुट्टियां बिताते हैं। इंसानी कंकालों से बनी है 18वीं सदी की सुरंग
 

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Catacombs - फोटो : Social Media

यह डरावनी सुरंग ब्यूटी और लव के शहर पेरिस में है। पूरी सुरंग 60 लाख लोगों के कंकालों से बनी है। 320 किलोमीटर लंबी यह सुरंग पेरिस कैटाकॉम्ब के नाम से मशहूर है। सुरंग में कंकाल से ही दीवारें बनी हुई हैं। ये सुरंग रोशनी से जगमगाते शहर पेरिस की सबसे रहस्यमयी जगह है। पूरी सुरंग को पब्लिक के लिए नहीं खोला गया है लेकिन सुरंग के कुछ हिस्सों को पर्यटक देख सकते हैं। सुरंग ही नहीं पूरा कब्रिस्तान है ये जगह
 

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Catacombs image - फोटो : Social Media

इस डरावनी सुरंग में आपको जगह-जगह इंसानी कंकाल दिखेंगे। कपाल की हड्डियों से बनी दीवारें दिखेंगी। सुरंग की कहानी बड़ी ही रोचक है। 18वीं सदी में पेरिस में कब्रिस्तान के लिए जगह कम पड़ गई और कई शवों को पूरी तरह से जलाया नहीं जा सका। ऐसे में अधिकारियों ने इन शवों को भूमिगत खदानों में डलवा दिया। ऐसे ही 1780 से लेकर 1814 तक करीब 60 लाख से ज्यादा शवों को इस सुरंग में डाला गया। सुरंग में मिला था सिनेमा रूम

 

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Catacombs - फोटो : Social Media

साल 2014 में पेरिस पुलिस इस कैटाकॉम्ब में ट्रेनिंग कर रही थी। उसने यहां एक सिनेमा रूम खोज निकाला। यह सिनेमा रूम स्क्रीन से लैस था। यहां रेस्टोरेंट और बार भी बनाया गया था। फोन और पावर लाइन की सुविधा भी थी। आज तक इस बात का पता नहीं चल पाया कि यहां सिनेमा रूम और बार किसने बनाया था। सुरंग में छोड़ा गया था नोट
 

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Catacombs image - फोटो : Social Media

सुरंग में एक नोट छोड़ा गया था जिसमें लिखा था कि हमें खोजने की कोशिश न करें। यानी इस डरावनी सुरंग को सिनेमा रूम और रेस्टोरेंट व बार में तब्दील करने वाले शरारती तत्व नहीं चाहते थे कि पुलिस उनका पता लगाए। पादरी के कहने पर बनाई कंकाल की दीवार

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effil tower - फोटो : Social Media
1780 में जब कंकालों की लंबी कतार लग गई तो एक पादरी के कहने पर कंकालों से दीवारनुमा आकृति बना दी गई ताकि मृत लोगों के आत्मा को शांति मिल सके। 19वीं सदी में इस सुरंग में मशरूम भी उगाई गई थी। कई लोगों ने इस सुरंग के अंदर तक जाकर यहां की तस्वीरें भी सार्वजनिक की हैं। पेरिस जाने वाले पर्यटक इस सुरंग की तरफ भी जाते हैं। पेरिस में डरावनी सुरंग ही नहीं बल्कि एफिल टावर भी है जिसे देखने करोड़ों पर्यटक जाते हैं। हिटलर नहीं चढ़ पाया था एफिल टावर की आखिरी सुरंग
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effil tower image - फोटो : Social Media
एफिल टावर बेहद खूबसूरत है। इसका निर्माण 1889 में हुआ था। इस लोहे के टावर की ऊंचाई 300 मीटर है।इस टावर के सबसे ऊपरी माले पर पहुंचने के लिए आपको करीब 1,665 सीढ़ियां चढ़नी होंगी। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान हिटलर जब पेरिस पहुंचा तो एफिल टावर के लिफ्ट की केबल काट दी गई थी, ताकि वो इस टावर के सबसे ऊपर न पहुंच सके। कैसे पड़ना इसका नाम एफिल टावर?

 
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effil tower image new - फोटो : Social Media
एफिल टावर का नाम एक इंजीनियर गुस्तव एफिल के नाम पर रखा गया है। रात के वक्त यहां की तस्वीर खींचना गैरकानूनी है। दरअसल, इस टावर पर लगी लाइट्स के डिजाइन पर उसके कलाकारों का कॉपीराइट है। एफिल टावर का निर्माण 300 कारीगरों ने काम किया था। इसे बनाने में 18,038 लोहे के टुकड़े और 2.5 मिलियन कील का इस्तेमाल हुआ था। 18,038 लोहे के टुकड़े से बना है यह टावर
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