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करवा चौथ 2026: पंजाब की सरगी से राजस्थान की पूजा तक, जानें करवा चौथ की अनोखी परंपराएं

Thu, 22 Oct 2026 04:33 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Karwa Chauth Celebration Across India: भारत के अलग-अलग राज्यों में करवा चौथ कैसे मनाया जाता है? जानें पंजाब की सरगी, उत्तर प्रदेश की पूजा, राजस्थान की परंपराओं और बदलते समय के साथ इस त्योहार के नए रंग।
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देशभर में अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है करवा चौथ - फोटो : AI

Karwa Chauth Traditions in India: करवा चौथ का त्योहार भारतीय संस्कृति में प्रेम, विश्वास और वैवाहिक रिश्ते की खूबसूरती का प्रतीक माना जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हुए व्रत रखती हैं। सुबह सरगी खाने से लेकर शाम को पूजा करने और चांद को अर्घ्य देने तक, इस पर्व से कई खास परंपराएं जुड़ी हुई हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश के अलग-अलग हिस्सों में करवा चौथ मनाने के तरीके में काफी अंतर देखने को मिलता है?

पंजाब में सरगी और सामूहिक पूजा की खास अहमियत है, तो उत्तर प्रदेश में करवा माता की पूजा और व्रत कथा का विशेष महत्व माना जाता है। राजस्थान में स्थानीय रीति-रिवाज और पारंपरिक पकवान इस त्योहार को अलग पहचान देते हैं।

वहीं, दिल्ली जैसे महानगरों में पारंपरिक रस्मों के साथ आधुनिक उत्सव का रंग भी देखने को मिलता है। समय के साथ यह त्योहार उन परिवारों में भी लोकप्रिय हुआ है, जहां पहले इसे बड़े स्तर पर नहीं मनाया जाता था। हालांकि, भारत के हर क्षेत्र और समुदाय में करवा चौथ की परंपरा समान नहीं है। आइए जानते हैं देश के अलग-अलग हिस्सों में इस पर्व को किस तरह मनाया जाता है और बदलते समय के साथ इसमें क्या बदलाव आए हैं।

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देशभर में अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है करवा चौथ - फोटो : AI

पंजाब में सरगी और सामूहिक पूजा की परंपरा

 

 

पंजाब में करवा चौथ बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। यहां सुबह सूर्योदय से पहले सास अपनी बहू को सरगी देती हैं, जिसमें फल, मिठाइयां, फेनियां और सूखे मेवे शामिल हो सकते हैं। कई परिवारों में मायके से भी कपड़े, मिठाइयां और दूसरी सौगातें भेजने की परंपरा है। शाम को महिलाएं एक साथ बैठकर पूजा करती हैं, व्रत कथा सुनती हैं और पारंपरिक गीत गाती हैं। चांद निकलने पर अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है।

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देशभर में अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है करवा चौथ - फोटो : AI

उत्तर प्रदेश में करवा माता की पूजा

 

 

उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में करवा चौथ की पूजा पारंपरिक विधि से की जाती है। महिलाएं सोलह श्रृंगार करके पूजा की तैयारी करती हैं और परिवार की परंपरा के अनुसार करवा माता या गौरा माता की पूजा करती हैं। शाम को व्रत कथा सुनने, करवा बदलने और चंद्रमा को जल अर्पित करने की रस्म निभाई जाती है। कुछ क्षेत्रों में पूजा के लिए दीवार या जमीन पर पारंपरिक आकृतियां भी बनाई जाती हैं।

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देशभर में अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है करवा चौथ - फोटो : AI

राजस्थान में लोक परंपराओं का रंग

 

 

राजस्थान में करवा चौथ के दौरान पारंपरिक कपड़े, रंग-बिरंगी चूड़ियां, मेहंदी और सजावटी पूजा थालियों का खास आकर्षण रहता है। कई परिवारों में सास या अन्य बुजुर्ग महिलाओं को मिठाई, मठरी और दूसरी सौगातें देने की परंपरा है। स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा और कथा के तरीके में अंतर भी देखने को मिलता है।

 

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देशभर में अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है करवा चौथ - फोटो : AI

हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में पारिवारिक उत्सव

 

 

हरियाणा में सरगी, सामूहिक पूजा, व्रत कथा और चांद को अर्घ्य देने की परंपरा प्रचलित है। हिमाचल प्रदेश के कई परिवारों में भी महिलाएं पारंपरिक तरीके से व्रत रखती हैं और पूजा के दौरान एक-दूसरे के साथ समय बिताती हैं। हालांकि, रस्मों का स्वरूप परिवार और स्थानीय समुदाय के अनुसार अलग हो सकता है।

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देशभर में अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है करवा चौथ - फोटो : AI

दिल्ली और दूसरे महानगरों में बदलता अंदाज

 

 

दिल्ली, मुंबई और दूसरे महानगरों में करवा चौथ अब पारंपरिक पूजा के साथ सामाजिक उत्सव का रूप भी ले चुका है। महिलाएं मेहंदी लगवाती हैं, विशेष कपड़े पहनती हैं और सोसायटी या सामुदायिक स्थानों पर मिलकर पूजा करती हैं। कुछ परिवारों में पति भी पत्नी के साथ व्रत रखते हैं। फिल्मों, टेलीविजन और सोशल मीडिया ने भी इस त्योहार को देश के अलग-अलग हिस्सों में लोकप्रिय बनाने में भूमिका निभाई है।


बदलते समय के साथ कैसे बदल रही हैं परंपराएं?

 

 

आज करवा चौथ में परंपरा और आधुनिक जीवनशैली का मेल देखने को मिलता है। कहीं पारंपरिक पूजा और पारिवारिक रस्मों को प्राथमिकता दी जाती है, तो कहीं पति-पत्नी इसे एक-दूसरे के प्रति प्यार और देखभाल जताने के अवसर के रूप में मनाते हैं। इस त्योहार की सबसे खूबसूरत बात यही है कि अलग-अलग रीति-रिवाजों के बावजूद इसका केंद्र आपसी प्रेम, विश्वास और साथ की भावना बनी रहती है।

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