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Karwa Chauth 2022: इस मंदिर में पति-पत्नी एक साथ नहीं कर सकते पूजा, दर्शन से पहले रखें इन बातों का ध्यान

Thu, 13 Oct 2022 06:43 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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दंपत्ति का इस मंदिर में साथ पूजा करना निषेध - फोटो : facebook
Karwa Chauth 2022: हिंदू धर्म में पति-पत्नी के एक साथ पूजा करने की परंपरा है। घर पर कोई पूजन कार्यक्रम हो या फिर मंदिर में दर्शन करने हो, हर जगह दंपत्ति के साथ पूजा करने को शुभ माना जाता है। भारत में कई ऐसे मंदिर है, जहां दंपत्ति अपने खुशहाल वैवाहिक जीवन की कामना से एक साथ दर्शन करने पहुंचते हैं। ऐसे में अगर करवा चौथ के मौके पर पति-पत्नी किसी मंदिर में दर्शन के लिए जा रहे तो एक साथ जाएं। लेकिन भारत में एक ऐसा मंदिर भी है, जहां पति-पत्नी का साथ पूजा करना वर्जित है। वैवाहिक जीवन की खुशहाली के लिए अगर दंपत्ति इस मंदिर में पूजा करने पहुंचते हैं तो उन्हें दर्शन से रोक दिया जाता है। भगवान के नाराज होने के डर से दंपत्ति यहां कभी साथ नहीं आते। करवा चौथ के मौके पर जानिए इस अनोखे मंदिर के बारे में, जहां पति-पत्नी का साथ पूजा करना वर्जित है।
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मंदिर में पति-पत्नी साथ नहीं करते पूजा - फोटो : Istock
दंपत्ति के लिए वर्जित अनोखा मंदिर

देवभूमि हिमाचल प्रदेश के शिमला में माता दुर्गा का एक प्राचीन और अनोखा मंदिर स्थित है। इस मंदिर शिमला के रामपुर में समुद्र तल से 11000 फुट की ऊंचाई पर है। इस मंदिर में मां दुर्गा श्राई कोटि माता के नाम से प्रसिद्ध हैं। इस मंदिर की देखरेख माता भीमा काली ट्रस्ट करता है।
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शिमला में श्राई कोटि मंदिर - फोटो : facebook
मंदिर में दर्शन के नियम

मान्यता है कि इस मंदिर में पति और पत्नी साथ पूजा नहीं कर सकते। अगर दंपत्ति मंदिर में जाकर माता की प्रतिमा के दर्शन करते हैं, तो उन्हें सजा भुगतनी पड़ती है। हालांकि अगर पति-पत्नी इस मंदिर में दर्शन के लिए जाना चाहते हैं तो उन्हें अलग अलग ही माता के दर्शन करने होंगे।

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कार्तिकेय भगवान से जुड़ी कथा - फोटो : facebook
श्राई कोटि माता मंदिर से जुड़ी कथा

इस अनोखे मंदिर को लेकर एक कहानी प्रचलित है। एक बार भगवान शिव के दोनों पुत्र गणेश जी और कार्तिकेय जी ब्रह्मांड के चक्कर लगाने के लिए निकले। गणेश जी ने माता पिता की परिक्रमा की और पूछने पर कहा कि माता पिता के चरणों में ही ब्रह्मांड है। लेकिन कार्तिकेय जी ने पूरे ब्रह्मांड का चक्कर लगाया और जब वह अपनी परिक्रमा करके वापस लौटे, तब तक गणेश जी का विवाह हो चुका था
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श्राई कोटि मंदिर - फोटो : facebook
मां पार्वती के श्राप के कारण दंपत्ति नहीं करते दर्शन 

कार्तिकेय जी इस बात पर नाराज हो गए और कभी विवाह न करने का संकल्प लिया। पुत्र कार्तिकेय के विवाह न करने के प्रण पर माता पार्वती बहुत रुष्ट हुईं। कार्तिकेय जी जिस स्थान पर वास कर रहे थे, वहां पहुंच माता पार्वती ने कहा कि जो भी पति-पत्नी कार्तिकेय जी के दर्शन करेंगे, वह एक दूसरे से अलग हो जाएंगे। इस कारण दंपत्ति यहां साथ पूजा करने से डरते हैं।
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