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ज्योतिरादित्य सिंधिया के महल 'जय विलास पैलेस' जाएं तो देखना न भूलें 3500 किलो का झूमर

Sat, 14 Mar 2020 09:11 AM IST
योगेश जोशी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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- फोटो : social media
भारत के खूबसूरत राज्य मध्यप्रदेश का नाम सुनते ही वहां की प्राचीन धरोहर, मंदिर और झील- झरने जेहन में आने लगते हैं। यह राज्य अपनी संस्कृति और प्रकृति के लिए जाना जाता है। दूर-दूर से सैलानी मध्यप्रदेश की खूबसूरती का आनंद लेने आते हैं। पांच नदियों नर्मदा, चंबल, सोन, ताप्ती और शिप्रा नदी के किनारे में बसे इस राज्य में एक से बढ़कर एक शानदार स्थल हैं, जिनमें से एक है ग्वालियर स्थित 'जय विलास महल'। इसे सिंधिया महल के नाम से भी जाना जाता है। आइए जानते हैं क्यों खास है ज्योतिरादित्य सिंधिया का ये महल:
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महल का निर्माण
  • फ्रांसीसी आर्किटेक्ट मिशेल फिलोस ने इस पैलेस का निर्माण करवाया था। सिंधिया महल का निर्माण वर्ष 1874 में ग्वालियर के महाराज जयाजीराव सिंधिया द्वारा ब्रिटिश अधिकारी किंग एडवर्ड के आगमन के दौरान करवाया गया था। इस महल को देखने के लिए प्रतिदिन लाखों की तादाद में सैलानी आते हैं। 
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महल का इतिहास
  • वर्ष 1964 में सिंधिया महल को पर्यटकों के लिए खोल दिया गया। यहां पर मौजूद जीवाजीराव सिंधिया संग्रहालय को देखने के लिए लोगों में उत्साह रहता है। इस संग्रहालय का निर्माण राजमाता विजयाराजे सिंधिया के कहने पर हुआ था।

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संरचना महल की
  • यूरोपीय वास्तुकला के अनुसार विदेशी कारीगरों की मदद से सिंधिया महल को बनवाया गया है। अलग-अलग शैलियों में इस भवन की मंजिलों का निर्माण हुआ है। पहली मंजिल टस्कन, दूसरी इतालवी-डोरिक और तीसरी कोरिंथियन शैली में बनवाई गई हैं। महल के फर्श में इतवाली संगमरमर का प्रयोग किया गया है। सोने और गिल्ट का प्रयोग भी भवन के निर्माण में हुआ है। 
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महल की खास बातें
  • 3500 किलो का झूमर
सिंधिया महल में एक विशाल झूमर है जिसका वजन 3500 किलो है। 
  • 400 कमरे वाला महल
इस महल की सबसे खास बात यह है कि इस महल में 400 कमरे हैं। इस समय 400 में से 40 कमरों को म्यजियम बना दिया गया है। 
  • चांदी की ट्रेन
सिंधिया महल के डाइनिंग हाॅल में डाइनिग टेबल पर चांदी की ट्रेन लगी हुई है। इस ट्रेन की मदद से ही खाना परोसा जाता है। 
  • औरंगजेब और शाहजहां की तलवार भी इस महल के म्यूजियम में आपको मिल जाएगी। 
  • सिंधिया महल की दीवारों पर इटली और फ्रांस की कलाकृतियां भी देखी जा सकती हैं।
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महल के ट्रस्टी
  • ज्योतिरादित्य सिंधिया की पत्नी प्रियदर्शनी राजे सिंधिया इस महल की ट्रस्टी हैं। सिंधिया परिवार इसी महल के आधे हिस्से में रहता है।
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'सिधिंया महल' जानें से पहले कुछ बातों को जानना बहुत जरुरी है......
  • भारतीय नागरिकों को यहां घूमने के लिए 150 प्रति व्यक्ति के हिसाब से टिकट लेना होता है।
  • विदेशी नागरिकों के लिए टिकट की कीमत 800 रुपए प्रति व्यक्ति है।
  • पांच साल तक के बच्चों का कोई टिकट नहीं लगता है। 
  • अगर आप कैमरा और मोबाइल ले जाना चाहते हैं तो आपको उसके लिए अलग से शुल्क देना होगा।
  • महल सुबह 10 बजे खुल जाता है और शाम 4 बजकर 30 मिनट तक खुला रहता है। 
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