फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Goa Taxi Rate: गोवा के पर्यटन उद्योग की छवि बिगाड़ रहे हैं टैक्सियों के आसमान छूते किराए

सार

गोवा में स्थानीय टैक्सी चालकों और उनकी यूनियनों की पकड़ इतनी मजबूत है कि सरकार ने भी इस ओर आंखें मूंद रखी हैं। ऐप-आधारित ओला व उबर जैसी सेवाओं को स्थानीय यूनियनों ने कभी यहां पांव ही नहीं जमाने दिया।
विज्ञापन
1 of 7
गोवा टैक्सी सर्विस - फोटो : Istock

Goa Taxi Rate: अगर आप गोवा के सफर पर आना चाहते हैं तो यह खबर आपके लिए है। लंबे अरसे तक पुर्तगालियों के शासन में रहे अपने समुद्र तटों के लिए मशहूर इस राज्य में सिर्फ शराब सस्ती है। अगर आप इसके शौकीन नहीं हैं तो यहां टैक्सी चालकों की मनमानी और आसमान चूमते किराए आपका पूरा बजट और मूड बिगाड़ सकते हैं। जी हां, आपको भले यकीन न हो, लेकिन गोवा में प्रति किलोमीटर टैक्सी का किराया भारत में तो सबसे ज्यादा है ही, यह विदेशों को भी कड़ी टक्कर दे रहा है। फिलहाल उत्तर गोवा के मोपा में हाल में शुरू हुए मनोहर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से दक्षिण गोवा के बेनॉलिम स्थित एक होटल तक 4148.50 रुपये के किराए की एक रसीद सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। यह किराया महज 65.86 किमी के लिए था।

विज्ञापन

2 of 7
गोवा टैक्सी रेट - फोटो : Goa
एयरपोर्ट से आवाजाही के लिए टैक्सी महंगी

टैक्सी चालकों के मनमाने रवैए के कारण बीती पांच जनवरी को उत्तर गोवा के मोपा में शुरू हुए नए इंटरनेशनल एयरपोर्ट से आवाजाही करने वाले यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालत यह है कि उनको एयरपोर्ट आने-जाने के लिए कुछ मामलों में विमान के टिकट से ज्यादा रकम खर्च करनी पड़ रही है। मिसाल के तौर पर, इस संवाददाता ने गोवा से बेंगलुरु तक का हवाई टिकट तो तीन हजार में खरीदा था, लेकिन दक्षिण गोवा के कोलवा से नए एयरपोर्ट तक की 62 किमी की दूरी तय करने के लिए टैक्सी के किराए के तौर पर साढ़े तीन हजार रुपए खर्च करने पड़े।

गोवा में स्थानीय टैक्सी चालकों और उनकी यूनियनों की पकड़ इतनी मजबूत है कि सरकार ने भी इस ओर आंखें मूंद रखी हैं। ऐप-आधारित ओला व उबर जैसी सेवाओं को स्थानीय यूनियनों ने कभी यहां पांव ही नहीं जमाने दिया।
विज्ञापन

3 of 7
मनमुताबिक किराया वसूलते हैं टैक्सी चालक - फोटो : istock
हवाई टिकट से ज्यादा महंगा टैक्सी का किराया

दिल्ली से नए साल की छुट्टियां बिताने कलंगुट पहुंचे शरद कुमार कहते हैं, "मुझे 40 किमी की दूरी तय करने के लिए 2500 रुपये देने पड़े। मोपा एयरपोर्ट तक पहुंचने का जितना खर्च है, उससे कम में गोवा से मुंबई तक का हवाई टिकट खरीदा जा सकता है।" सिर्फ पर्यटकों ही नहीं बल्कि दक्षिण गोवा में रहने वाले लोगों के लिए भी नए एयरपोर्ट तक पहुंचना भारी सिरदर्द साबित हो रहा है। बेनॉलिम में रहने वाले एग्नेल फर्नांडीज कहते हैं, "सरकार को पहले टैक्सी की दरें तय करनी चाहिए। आसमान छूते किराए के कारण पर्यटकों के साथ ही स्थानीय लोगों को भी भारी परेशानी हो रही है।"

4 of 7
टैक्सी एप - फोटो : सोशल मीडिया
गोवा टैक्सी ऐप की कवायद

सरकार की दलील है कि पर्यटकों की सहूलियत के गोवा टैक्सी एप बनाया गया है। लेकिन कोई भी टैक्सी मालिक या चालक इसमें शामिल होने के लिए तैयार नहीं है। स्थानीय इतिहासकार संजीव सरदेसाई बताते हैं, "हाल के वर्षों में एक पर्यटन स्थल के तौर पर गवा की लोकप्रियता काफी बढ़ी है और खासकर क्रिसमस से नए साल तक यहां कहीं तिल धरने तक की जगह नहीं होती। टैक्सी चालक इस हालत का फायदा उठा रहे हैं। अगर सरकार ने इस पर अंकुश नहीं लगाया तो सोने के अंडे देने वाले पर्यटन उद्योग की असमय ही मौत हो जाएगी। टैक्सी चालकों की मनमानी के कारण पर्यटक बेहद बुरे अनुभव के साथ यहां से लौटते हैं।"
 
विज्ञापन

5 of 7
टैक्सी का महंगा किराया - फोटो : istock
टैक्सी चालक वसूलते हैं मनमुताबिक किराया

पर्यटन उद्योग से जुड़े ओरलांडो नन्स कहते हैं, "यहां टैक्सियों की तादाद तो हजारों में है। आपको हर जगह टूरिस्ट टैक्सी मिल जाएगी लेकिन उनके पास कोई छपा हुआ रेट कार्ड नहीं है। उनकी जुबान ही रेट कार्ड है। सरकार इस मामले में कई ठोस नीति बनाने में नाकाम रही है।" वह बताते हैं कि यहां टैक्सी की दरें नब्बे के दशक से ही ज्यादा हैं, लेकिन हाल के वर्षों में तो यह आम लोगों की पहुंच से बाहर हो गई हैं।
 
विज्ञापन

6 of 7
गोवा में टैक्सी का किराया - फोटो : Goa
टैक्सी यूनियन में ही विवाद

येलो ब्लैक टैक्सी एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष सुनील नाइक दावा करते हैं कि हमारी दरें तय हैं, लेकिन सफेद टैक्सियों के बारे में कुछ नहीं कहा सकता है। मुख्यमंत्री कई बार इस मुद्दे पर तमाम पक्षों की बैठक बुलाने की बात कह चुके हैं। लेकिन कुछ यूनियन इतनी ताकतवर हैं कि सरकार ने भी चुप्पी साध ली है।

यही हाल मीटर वाली टैक्सियों का भी है। मीटर लगे होने के बावजूद कोई भी उसे नहीं चलाता। ट्रैफिक पुलिस के अधिकारी भी इस बात की जांच की जहमत नहीं उठाते। पर्यटन उद्योग से जुड़े लिंडन ऑल्वेज कहते हैं, "टैक्सी चालकों की मनमानी से गोवा की छवि पर दाग लग रहा है। अदालत ने तमाम टैक्सियों में मीटर लगाने का निर्देश दिया है, लेकिन उस आदेश की सरेआम धज्जियां उड़ाई जाती हैं और सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है। आखिर में हाईकोर्ट ने अदालत की अवमानना का मामला शुरू करने की धमकी दी तो टैक्सियों में डिजिटल मीटर तो लग गए। लेकिन उसका इस्तेमाल नहीं होता।"
 
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
गोवा में लागू कड़े नियम - फोटो : pixabay
संजीव सरदेसाई बताते हैं कि गोवा में प्रति किलोमीटर किराया सबसे ज्यादा है। मुंबई में आठ घंटे के लिए टैक्सी का किराया जहां 3500 रुपये है वहीं मुंबई से यहां आने वाले मेरे एक मित्र को हवाई टिकट तो साढ़े तीन हजार में मिला था। हालांकि एयरपोर्ट से 50 किमी दूर कलंगुट बीच स्थित होटल तक जाने के लिए उनको टैक्सी के किराए के तौर पर पांच हार रुपए का भुगतान करना पड़ा।

एसोसिएशन ऑफ टूरिस्ट टैक्सी ओनर्स के सचिव तुलसीदास फाड़ते कहते हैं, "ज्यादा किराए के आरोप सही नहीं है। गोवा की हालत अलग है। कुछ लोग भले ज्यादा किराया वसूलते हों, एसोसिएशन की टैक्सियों के किराए तर्कसंगत है।"
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें