Ganesh Chaturthi 2025: गणेश उत्सव का समय पूरे भारत में भक्ति और उत्साह से भर देता है, लेकिन महाराष्ट्र में इसकी रौनक सबसे अलग होती है। ढोल-ताशों की गूंज, सजावट से सजे पंडाल और हर गली-मोहल्ले में गणपति बप्पा की आराधना इस त्योहार को खास बना देती है। ऐसे समय में भक्तों के लिए अष्टविनायक मंदिर यात्रा का महत्व और भी बढ़ जाता है। यह यात्रा भगवान गणेश के आठ प्रमुख प्राचीन मंदिरों से जुड़ी हुई है, जिन्हें महाराष्ट्र के पुणे और रायगढ़ ज़िलों में स्थित बताया गया है।
अष्टविनायक मंदिरों की सूची में मयूरेश्वर (मोरगांव), सिद्धिविनायक (सिद्धटेक), बल्लालेश्वर (पाली), वरदविनायक (महाड), चिंतामणि (थेऊर), गिरिजात्मज (लेन्याद्री), विघ्नहर (ओझर) और महागणपति (रंजनगांव) शामिल हैं। यहां की यात्रा केवल धार्मिक महत्व ही नहीं रखती, बल्कि इसमें महाराष्ट्र की संस्कृति, भोजन, ग्रामीण जीवन और लोककला का भी अनुभव मिलता है। गणेश उत्सव के दौरान इन मंदिरों को फूलों, रोशनी और ढोल-ताशों से सजाया जाता है, जिससे यात्रा का आनंद और भी अद्भुत हो जाता है। आइए जानते हैं कि गणेश उत्सव के दौरान केवल 3 दिन में कैसे आप इस पावन यात्रा को पूरा कर सकते हैं।