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Ganesh Utsav Travel Guide: तीन दिन, 8 मंदिर और अपार भक्ति; ऐसे करें महाराष्ट्र की अष्टविनायक यात्रा पूरी

Wed, 27 Aug 2025 10:14 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Ganesh Chaturthi 2025: गणेश उत्सव के दौरान इन मंदिरों को फूलों, रोशनी और ढोल-ताशों से सजाया जाता है, जिससे यात्रा का आनंद और भी अद्भुत हो जाता है। आइए जानते हैं कि गणेश उत्सव के दौरान केवल 3 दिन में कैसे आप इस पावन यात्रा को पूरा कर सकते हैं।
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महाराष्ट्र के अष्टविनायक मंदिर - फोटो : Amar Ujala
Ganesh Chaturthi 2025: गणेश उत्सव का समय पूरे भारत में भक्ति और उत्साह से भर देता है, लेकिन महाराष्ट्र में इसकी रौनक सबसे अलग होती है। ढोल-ताशों की गूंज, सजावट से सजे पंडाल और हर गली-मोहल्ले में गणपति बप्पा की आराधना इस त्योहार को खास बना देती है। ऐसे समय में भक्तों के लिए अष्टविनायक मंदिर यात्रा का महत्व और भी बढ़ जाता है। यह यात्रा भगवान गणेश के आठ प्रमुख प्राचीन मंदिरों से जुड़ी हुई है, जिन्हें महाराष्ट्र के पुणे और रायगढ़ ज़िलों में स्थित बताया गया है।

अष्टविनायक मंदिरों की सूची में मयूरेश्वर (मोरगांव), सिद्धिविनायक (सिद्धटेक), बल्लालेश्वर (पाली), वरदविनायक (महाड), चिंतामणि (थेऊर), गिरिजात्मज (लेन्याद्री), विघ्नहर (ओझर) और महागणपति (रंजनगांव) शामिल हैं। यहां की यात्रा केवल धार्मिक महत्व ही नहीं रखती, बल्कि इसमें महाराष्ट्र की संस्कृति, भोजन, ग्रामीण जीवन और लोककला का भी अनुभव मिलता है। गणेश उत्सव के दौरान इन मंदिरों को फूलों, रोशनी और ढोल-ताशों से सजाया जाता है, जिससे यात्रा का आनंद और भी अद्भुत हो जाता है। आइए जानते हैं कि गणेश उत्सव के दौरान केवल 3 दिन में कैसे आप इस पावन यात्रा को पूरा कर सकते हैं।
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महाराष्ट्र के अष्टविनायक मंदिर - फोटो : Amar Ujala
अष्टविनायक मंदिर यात्रा का महत्व

अष्टविनायक मंदिर यात्रा भगवान गणेश के आठ अलग-अलग स्वरूपों की आराधना से जुड़ी हुई है। माना जाता है कि इन मंदिरों की परिक्रमा करने से सभी विघ्न दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। भक्त इसे जीवन की सबसे पवित्र यात्राओं में से एक मानते हैं, और गणेशोत्सव के समय इसका धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है।
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सिद्धिविनायक मंदिर - फोटो : instagram
पहला दिन

महाराष्ट्र के पहले दिन मोरेश्वर से सिद्धिविनायक तक की यात्रा कर सकते हैं। यात्रा की शुरुआत पुणे जिले के मोरेश्वर मंदिर से होती है। इसके बाद चिन्चोली के सिद्धिविनायक मंदिर की ओर बढ़ा जा सकता है। दिन भर की इस यात्रा में भक्तों को ग्रामीण महाराष्ट्र की खूबसूरती और धार्मिकता का अनोखा संगम देखने को मिलता है।

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महाराष्ट्र के अष्टविनायक मंदिर - फोटो : Amar Ujala
दूसरा दिन

अष्टविनायक मंदिर की यात्रा के दूसरे दिन बालाजी से महागणपति के दर्शन के लिए जा सकते हैं। अगले दिन का सफर रांजणगांव के महागणपति और थेऊर के चिंतामणि मंदिर तक होता है। यहाँ भक्तों का अनुभव बेहद भव्य होता है क्योंकि गणपति के इन स्वरूपों की पूजा विशेष रूप से विघ्ननाशक और ज्ञानदायक मानी जाती है।
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महाराष्ट्र के अष्टविनायक मंदिर - फोटो : Amar Ujala
तीसरा दिन

यात्रा के अंतिम दिन अंतिम दिन गिरजात्मक विनायक (लेन्याद्री) और वरदविनायक (महेड) के दर्शन किए जाते हैं। लेन्याद्री से महेड की दूरी लगभग 150 किलोमीटर है। पहाड़ों और प्राकृतिक दृश्यों के बीच स्थित ये मंदिर भक्तों को न केवल आध्यात्मिक शांति देते हैं, बल्कि यात्रा को यादगार बना देते हैं।
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