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Ganpati Utsav: गणपति उत्सव पर तस्वीरों में करें अष्टविनायक के दर्शन, यहां विराजते हैं 8 स्वरूपों में गणपति

Thu, 21 Sep 2023 12:32 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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Siddhivinayak Temple - फोटो : facebook
Ashtavinayak Yatra in Maharashtra: भारत के भगवान गणेश के कई प्रसिद्ध और सिद्ध मंदिर हैं। गणपति उत्सव के मौके पर इन मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ दर्शन के लिए पहुंचती है। 19 सितंबर को गणेश चतुर्थी है, इस दिन से गणपति उत्सव की शुरुआत हो जाती है। सबसे अधिक गणपति उत्सव की धूम महाराष्ट्र में होती है। महाराष्ट्र में ही सबसे प्रसिद्ध गणपति मंदिर सिद्धिविनायक स्थित है। इसके अलावा अष्टविनायक मंदिर भी काफी प्रसिद्ध है, जो महाराष्ट्र में ही है।

हालांकि अष्टविनायक मंदिर कोई एक मंदिर नहीं, बल्कि आठ गणेश मंदिरों की एक श्रृंखला है। अष्टविनायक मंदिरों में शामिल हर एक मंदिर का अपना महत्व और इतिहास है। इन मंदिरों का जिक्र पुराणों में भी मिलता है। इस गणेश उत्सव के मौके पर महाराष्ट्र के अष्टविनायक मंदिरों के दर्शन के लिए जा सकते हैं। यहां आपको बताया जा रहा है कि अष्टविनायक मंदिर कहां स्थित हैं, साथ ही अगर मंदिर नहीं जा सकते हैं तो तस्वीरों के जरिए अष्टविनायक मंदिर के दर्शन कर सकते हैं।
 
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Mayureshwar Temple - फोटो : facebook
मोरगांव में मयूरेश्वर

महाराष्ट्र के पुणे जिले में बारामती तालुका में मोरगांव नाम का स्थान है, जहां मयूरेश्वर विनायक मंदिर है। अष्टविनायक मंदिरों में से एक मयूरेश्वर विनायक का आकार मोर के जैसा है, इस कारण इसे मोरगांव कहते हैं। त्रेता युग में सिंधु नाम के राक्षस सिंधुरासुर का वध करने के लिए भगवान गणेश ने मयूरेश्वर के रूप में 6 भुजाओं में श्वेत रंग धारण किया था और मोर को वाहन बनाया था।

इस मंदिर का निर्माण काले पत्थर से हुआ है। दूर से देखने में मंदिर मस्जिद को चित्रित करता है, क्योंकि मुगल काल में मंदिरों को आक्रमणकारियों से बचाने के लिए यहां मीनारों का निर्माण कराया गया था। 
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Sidhhitek Temple Siddhivinayak - फोटो : facebook
सिद्धटेक में सिद्धिविनायक

अहमदनगर जिले के काराट तालुका के सिद्धटेक में स्थित सिद्धिविनायक मंदिर आठ अष्टविनायक यात्रा का हिस्सा हैं। मान्यता है कि मधु-कैटभ नाम के दो असुरों का वध जब भगवान विष्णु नहीं कर पा रहे थे, तो उन्होंने शिव जी से मदद मांगी। इस पर भगवान शिव ने उन्हें युद्ध से पहले गणेश जी का आह्वान करने को कहा। विष्णु जी ने इसी स्थान पर भगवान गणेश की मूर्ति को स्थापित करके पूजा की।

इंदौर की रानी अहिल्याबाई होल्कर ने वर्तमान सिद्धटेक मंदिर का निर्माण कराया। सिद्धिविनायक मंदिर एक पहाड़ी पर है, जिसका मुख उत्तर की ओर है। मंदिर के पश्चिम भाग में शंकर जी और देवी शिवी का छोटा सा मंदिर है। 

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ballaleshwar vinayak - फोटो : facebook
पाली में बल्लालेश्वर

महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में अम्बा नदी के पास पाली गांव में स्थित बल्लालेश्वर विनायक मंदिर है। मान्यता है कि भगवान गणेश ने यहां ब्राह्मण वेश में बल्लाल को दर्शन दिया और हमेशा के लिए यहां वास करने का वरदान दिया। इसलिए इस मंदिर का नाम बल्लालेश्वर विनायक के नाम से प्रसिद्ध हुआ। मंदिर का मूल निर्माण लकड़ी द्वारा किया गया था। मंदिर परिसर में यूरोपियन शैली की विशाल घंटी है, जो पुर्तगालियों के खिलाफ जीत के बाद स्थापित की गई थी। दक्षिणायन के समय सूर्य उदय होने पर सूर्य की किरणें भगवान गणेश पर पड़ती हैं। 
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girijatmaj vinayak - फोटो : facebook
लेण्याद्री में गिरिजात्मक

गिरिजात्मक विनायक मंदिर का नाम भगवान गणेश की माता पार्वती (गिरिजा) के नाम पर पड़ा है जो कि पुणे जिले के जुन्नार तालुका में स्थित है। इस गणेश मंदिर के दर्शन के लिए भक्तों को 307 सीढ़ियां चढ़कर पहाड़ी पर जाना होता है।यह वही स्थान है, जहां माता पार्वती ने गणेश जी की मूर्ति को आकार दिया और मिट्टी की मूर्ति जीवित हो गई। यहां गणपति जी की मूर्ति पहाड़ में स्वयं प्रकट हुई। दक्षिण की ओर मुख वाला यह गणपति मंदिर अठारह गुफाओं की श्रृंखला में आठवीं गुफा पर स्थित है। पुणे हवाई अड्डे से 97 किमी और मुंबई से 156 किमी दूरी पर है। गिरिजात्मक गणपति से सबसे निकटतम रेवले स्टेशन 96 किमी दूर पुणे रेलवे स्टेशन है।
 
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Chintamani Vinayak - फोटो : facebook
थेऊर  में चिंतामणि विनायक मंदिर

चिंतामणि विनायक मंदिर पुणे जिले के हवेली तालुका के थेऊर में स्थित है। इस मंदिर के पास तीन नदियां मूला नदी, मुथा नदी और भीमा नदी का संगम है।

गणासुर नाम का क्रूर राजा था, जिसे स्वर्ग, मृत्युलोग और पाताललोक पर राज करने का वरदान प्राप्त था। उसने कपिल मुनि से इच्छापूर्ति वाले चिंतामणि रत्न को छीन लिया था। कपिल मुमि के आह्वाहन पर भगवान गणेश ने गणासुर का वध कर चिंतामणि वापस प्राप्ति की और कपिल मुनि ने गणपति को वहीं वास करने की प्रार्थना की। इस पर विनायक ने स्वयंभू प्रतिमा में वहीं वास किया।

पुणे हवाई अड्डे से चिंतामणि विनायक मंदिर 18 किमी दूर है और रेलवे स्टेशन 22 किमी दूर है। आगे का सफर टैक्सी, बस के जरिए कर सकते हैं।
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Ozar Vigneshwara temple - फोटो : facebook
ओझर में विघ्नेशवर मंदिर

विघ्नेश्वर गणपति मंदिर अपने सोने के कलश के लिए और दीपमाला यानी पत्थर के खंभे के लिए प्रसिद्ध है। सभी अष्टविनायक मंदिरों में से विघ्नेश्वर मंदिर इकलौता है, जहां सोने का कलश है। यह मंदिर महाराष्ट्र के ओझर में स्थित है। ओझर पहुंचने के लिए पुणे से 85 किमी का सफर तय करना पड़ता है।

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Rangagaon mahaganpati - फोटो : Facebook
राजनांदगांव में महागणपति मंदिर

रंजनगांव का श्री महागणपति मंदिर पुणे के पास स्थित अष्टविनायक मंदिरों में से एक है। इस मंदिर का निर्माण नौंवी या दसवीं शताब्दी में कराया गया था। मंदिर पेशवा के शासन में बनाया हुआ लगता है। कहते हैं कि माधवराव पेशवा ने मंदिर के बेसमेंट में गणपति की मूर्ति रखने के लिए कमरे का निर्माण कराया। बाद में इंदौर के सरदार ने इसका पुनर्निर्माण कराया। 
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Varadvinayak Mandir - फोटो : facebook
महड में वरदविनायक

महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में स्थित महाड़ शहर है। मुंबई से 63 किमी और पुणे से 85 किमी दूर महाड गणपति मुंबई स्थित है। इस मंदिर का नाम वरद विनायक मंदिर है, जो कि 1725 में पेशवा सुभेदार रामजी महादेव बिवलकर द्वारा बनवाया गया था। पेशवा ने गणेश जी का यह मंदिर गांव को उपहार में दिया था। मंदिर झील के किनारे है, जहां से मूर्ति की खोज की गई और मूर्ति को स्थापित कर मंदिर का निर्माण हुआ। वहीं इस मंदिर को लेकर एक मान्यता है कि यहां दीपक 1892 से लगातार जल रहा है।
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