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Dussehra 2020: साल में केवल विजयदशमी के दिन खुलता है ये मंदिर, रावण की होती है पूजा

Thu, 22 Oct 2020 04:09 PM IST
योगेश जोशी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Dussehra 2020 - फोटो : social media
पूरा देश जहां दशहरा के दिन रावण दहन कर खुशियां मनाता है, वहीं कुछ लाेग ऐसे भी हैं जाे रावण के सौ साल पुराने मंदिर में विशेष अराधना करते हैं। यह पूजा केवल दशहरे के दिन ही हाेती है। कानपुर के शिवाला में स्थित देश के एकलौते दशानन मंदिर में दशहरा के दिन सुबह से भक्त रावण की पूजा अर्चना करने के लिए आते हैं। रावण के इस मंदिर में दशहरा के दिन रावण की विशेष पूजा- अर्चना की जाती है। अगली स्लाइड्स में जानिए रावण के इस मंदिर में  किस तरह होती है रावण की पूजा अर्चना।
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Dussehra 2020 - फोटो : social media
यह मंदिर साल में एक बार विजयादशमी के दिन ही खुलता है और लोग सुबह-सुबह यहां रावण की पूजा करते हैं। दशानन मंदिर में शक्ति के प्रतीक के रूप में रावण की पूजा होती है और श्रद्धालु तेल के दिए जलाकर मन्नतें मांगते हैं। परंपरा के अनुसार सुबह आठ बजे मंदिर के कपाट खोले दिए जाते हैं और रावण की प्रतिमा का साज श्रृंगार किया जाता है। इसके बाद आरती की जाती है। शाम को मंदिर के दरवाजे एक साल के लिए फिर बंद कर दिए जाते हैं।
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Dussehra 2020 - फोटो : social media
इस मंदिर का निर्माण सौ साल पहले महाराज गुरू प्रसाद शुक्ल ने कराया था। रावण प्रकांड पंडित होने के साथ-साथ भगवान शिव का परम भक्त था। इसलिए शक्ति के प्रहरी के रूप में यहां कैलाश मंदिर परिसर में रावण का मंदिर बनाया गया। रावण देवी आराधना भी करता था। मां की आशीष भी उसपर थी। बताया जाता है कि उसकी पूजा से प्रसन्न हाेकर मां छिन्नमस्तिका ने उसे वरदान दिया था कि उनकी की गई पूजा तभी सफल हाेगी जब भक्त रावण की भी पूजा करेंगे।

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Dussehra 2020 - फोटो : ANI
बताया जाता है कि करीब 206 साल पहले संवत 1868 में तत्कालीन राजा ने मां छिन्नमस्तिका का मंदिर बनवाया था और रावण की करीब पांच फुट की मूर्ति उनके प्रहरी के रूप में बनवाई थी। विजयदशमी के दिन मां छिन्नमस्तिका की पूजा के बाद रावण की आरती हाेती है और मंदिर में सरसों के दीपक जलाए जाते हैं और पीले फूल चढ़ाए जाते हैं।
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Dussehra 2020 - फोटो : social media
मान्यता है कि यहां रावण काे तेल और पीले फूल चढ़ाने से ग्रह दोषों से मुक्ति मिलती है और घर में खुशियां आ जाती हैं। रावण के इस मंदिर में विजयदशमी के दिन भक्तों का तांता लगा रहता है। 
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