बस्तर, छत्तीसगढ़
बस्तर जिले में दशहरे का त्योहार बड़े ही उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस आदिवासी क्षेत्र में ये त्योहार पूरे 75 दिन तक मनाया जाता है। दशहरे का मतलब यहां पर परंपरा, प्रकृति और मां दांतेश्वरी देवी की पूजा से है। आदिवासी लोगों का मानना है कि 13वीं शताब्दी में बस्तर के राजा ने पुरुषोत्तम देव ने इस त्योहार की परंपरा शुरु की थी।
इस त्योहार में लकड़ी की पूजा, कलश स्थापना, पत्थर की स्थापना और बहुत से परंपरागत तरीकों से दशहरे का उत्सव मनाया जाता है।