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Chaitra Navratri 2019: नवरात्रि में इन मंदिरों में दर्शन करने से पूरी होती है हर मुराद

Sat, 06 Apr 2019 12:06 PM IST
प्रशांत राय लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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देश भर में 6 अप्रैल से नवरात्रि की शुरुआत हो गई है। नवरात्रि के पहले दिन भारी संख्या में लोग माता का दर्शन करने मंदिरों में जाते हैं। नवरात्रि के मौके पर हम आपको मां दुर्गा के उन मंदिरों के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां सबसे अधिक संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसा माना जाता है कि उन मंदिरों में दर्शन करने से मनचाहा फल मिलता है। 
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कालकाजी मंदिर, नई दिल्ली
प्रसिद्ध कालकाजी मंदिर भारत में सबसे ज्यादा भ्रमण किये जाने वाला प्राचीन मंदिर है। कालकाजी मंदिर मां दुर्गा की अवतार देवी काली को समर्पित है। यह मंदिर मनोकामना सिद्ध पीठ के नाम से भी जाना जाता है। नवरात्रि के दौरान यहां भक्त अधिक संख्या में एकत्रित होते हैं। ऐसा कहा जाता है कि देवी काली का जन्म देवी पार्वती से हुआ था जो राक्षसों की अधिक संख्या से दूसरे देवताओं की रक्षा करना चाहती थीं। इसलिए देवी ने यहां निवास के तौर पर जगह ली और इस तरह ये मंदिर के रूप में उभरा। 
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अंबाजी मंदिर, गुजरात
ऐसा माना जाता है कि गुजरात-राजस्थान की सीमा पर मौजूद अंबाजी मंदिर बारह सौ साल पुराना है। सफेद संगमरमर से बना यह मंदिर बेहद ही भव्य है। मंदिर का शिखर 103 फुट ऊंचा है। मंदिर के शिखर पर 358 स्वर्ण कलश सुसज्जित है। नवरात्र में यहां का पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है। मां अंबा-भवानी के शक्तिपीठों में से एक इस मंदिर के प्रति भक्तों में अपार श्रद्धा है। 

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छतरपुर मंदिर, नई दिल्ली
नवरात्रि के मौके पर दिल्ली के छत्तरपुर स्थित आद्या कात्यायनी शक्तिपीठ मंदिर में माता के दर्शन के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। मां कात्यायनी के श्रृंगार के लिए यहां रोजाना दक्षिण भारत से खास हरे रंगों के फूलों से बनी माला मंगवाई जाती है। इस मंदिर का क्षेत्रफल 70 एकड़ में फैला हुआ है। इस मंदिर में मां दुर्गा अपने छठे रूप माता कात्यायनी के रौद्र स्वरूप में दिखाई देती हैं।  
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दुर्गा मंदिर वाराणसी
ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण एक बंगाली महारानी ने 18वीं सदी में करवाया था। यह मंदिर भारतीय वास्तुकला की उत्तर भारतीय शैली की नागारा शैली में बनी हुई है। इस मंदिर में वर्गाकार आकृति का तालाब बना हुआ है जो दुर्गा कुंड के नाम से जाना जाता है। स्थानीय लोगों की मान्यता के अनुसार इस मंदिर में लोगों ने मूर्ति नहीं स्थापित किया था बल्कि प्रकट हुई थी। 
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