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Krishna Janmashtami 2026: जन्माष्टमी कब है? तारीख नोट कर लें, इन मंदिरों में होगा भव्य जन्मोत्सव

Tue, 18 Aug 2026 01:20 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Janmashtami Travel Tips: अगर आप इस बार घर पर पूजा करने के बजाय श्रीकृष्ण की जन्मभूमि और प्रमुख मंदिरों में जाकर जन्माष्टमी मनाने की योजना बना रहे हैं, तो अभी से यात्रा की योजना बनाना फायदे का सौदा हो सकता है।
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जन्माष्टमी उत्सव के लिए बेस्ट कृष्ण मंदिर - फोटो : AI

Janmashtami Kab Hai 2026: भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी का इंतजार भक्तों को पूरे साल रहता है। साल 2026 में जन्माष्टमी 4 सितंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। इस खास मौके पर मथुरा और वृंदावन समेत देश के कई कृष्ण मंदिरों में भव्य सजावट, झांकियां, भजन-कीर्तन, विशेष पूजा और आधी रात जन्मोत्सव का आयोजन किया जाता है।

अगर आप इस बार घर पर पूजा करने के बजाय श्रीकृष्ण की जन्मभूमि और प्रमुख मंदिरों में जाकर जन्माष्टमी मनाने की योजना बना रहे हैं, तो अभी से यात्रा की योजना बनाना फायदे का सौदा हो सकता है। खासकर मथुरा-वृंदावन में त्योहार के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। इसलिए होटल, ट्रेन या बस और स्थानीय यात्रा की तैयारी पहले कर लेना बेहतर रहेगा।

इस बार जन्माष्टमी पर किन मंदिरों में जाना खास रहेगा और यात्रा के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, जानिए पूरी जानकारी।


जन्माष्टमी पर यात्रा करने वाले रखें इन बातों का ध्यान
 

  • जन्माष्टमी से पहले होटल बुकिंग कर लें।

  • ट्रेन, बस या फ्लाइट के टिकट पहले चेक करें।

  • मंदिरों के दर्शन समय और प्रवेश नियम पहले देखें।

  • भारी भीड़ में बच्चों और बुजुर्गों के साथ अतिरिक्त सावधानी रखें।

  • मंदिर के आसपास पार्किंग और स्थानीय ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था पहले पता कर लें।

  • अलग-अलग परंपराओं के कारण जन्माष्टमी की तारीख में अंतर हो सकता है, इसलिए जिस मंदिर में जाना है उसका कार्यक्रम जरूर कन्फर्म करें।

 

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कृष्ण जन्मभूमि मंदिर, मथुरा - फोटो : istock

जन्माष्टमी पर घूमने के लिए प्रमुख मंदिर


श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर, मथुरा
 

  • उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले को श्रीकृष्ण की जन्मस्थली माना जाता है। 
  • मान्यता है कि भगवान कृष्ण का मथुरा स्थित राजा कंस के कारागार में जन्म हुआ था।
  • जन्माष्टमी पर मथुरा और वहां के कारागार मंदिर में भव्य उत्सव का आयोजन होता है।
  • मंदिर और आसपास के क्षेत्र में धार्मिक कार्यक्रम और विशेष सजावट देखने को मिलती है।
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बांके बिहारी मंदिर, वृंदावन - फोटो : Ai

बांके बिहारी मंदिर, वृंदावन

  • वृंदावन कान्हा की बाल और किशोर अवस्था की बाल लीलाओं का मुख्य केंद्र रहा।
  • उन्होंने यहां अपने जीवन के सबसे सुंदर पल बिताएं, ग्वाल बालों संग गाय चराने आते।
  • राधा और गोपियों संग वृंदावन की गलियों में कान्हा ने रास लीलाएं रचाईं।
  • जन्माष्टमी पर वृंदावन की गली-गली में उत्सव मनाया जाएगा।
  • हर साल इस दिन यहां के सबसे प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर का नजारा अद्भुत होता है।
  • जन्माष्टमी के दौरान वृंदावन का यह प्रसिद्ध मंदिर भक्तों के प्रमुख आकर्षणों में रहता है।
  • भीड़ को देखते हुए दर्शन से जुड़े मौजूदा नियम और व्यवस्थाएं यात्रा से पहले जरूर जांचें।

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इस्काॅन वृंदावन - फोटो : Ai

ISKCON कृष्ण-बलराम मंदिर, वृंदावन

  • वृंदावन में ही इस्काॅन का कृष्ण बलराम मंदिर है।
  • यहां जन्माष्टमी पर विशेष धार्मिक कार्यक्रम और भक्ति से जुड़े आयोजन होते हैं।
  • 4 सितंबर को वृंदावन इस्काॅन में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी। 
  • इस दौरान भजन, उत्सव और दिव्य आयोजन का अनुभव ले सकते हैं।
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द्वारकाधीश मंदिर , मथुरा - फोटो : Ai

द्वारकाधीश मंदिर, मथुरा

  • मथुरा का द्वारकाधीश मंदिर भी जन्माष्टमी यात्रा में शामिल किया जा सकता है।
  • यह मथुरा का दूसरा सबसे प्रमुख और विशाल मंदिर है।
  • यमुना नदी के पास विश्राम घाट के निकट स्थित इस मंदिर की स्थापना ग्वालियर रियासत के खचांजी सेठ गोकुलदास पारिक ने कराई थी।
  • ब्रज के ज्यादातर मंदिरों में जहां राधा-कृष्ण की पूजा होती है, वहीं द्वारिकाधीश मंदिर में कृष्ण जी के साथ रुक्मणी जी के दर्शन होते हैं।
     
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द्वारका - फोटो : Instagram

द्वारकाधीश मंदिर, द्वारका

  • अगर आप गुजरात जा सकते हैं जो वहां समुद्र किनारे स्थित द्वारकाधीश के मंदिर जाएं। 
  • जन्माष्टमी में द्वारका जाना भी शानदार विकल्प है।
  • 4 सितंबर 2026 को द्वारका में भी जन्माष्टमी का विशेष आयोजन निर्धारित है।
  • श्री कृष्ण द्वारका के राजा थे और यही उनकी कार्यस्थली बनी।
  • द्वारका को ही यदुवंशियों का सुरक्षित गढ़ माना जाता है।


अभी से बुकिंग क्यों कराएं?

  • जन्माष्टमी के आसपास मथुरा-वृंदावन में यात्रियों की संख्या काफी बढ़ जाती है।
  • इसलिए होटल, ट्रेन टिकट और स्थानीय ट्रांसपोर्ट की उपलब्धता पहले जांचना समझदारी होगी।
  • केंद्र सरकार भी मथुरा- वृंदावन को एक प्रमुख आध्यात्मिक पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित कर रही है।


जरूरी टिप: किसी भी मंदिर के VIP दर्शन, पास या विशेष सेवा की बुकिंग करने से पहले उसकी आधिकारिक वेबसाइट/पोर्टल पर जानकारी जरूर जांचें। बांके बिहारी मंदिर के लिए आधिकारिक दर्शन पोर्टल उपलब्ध है।

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