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मां के दूध से तेज होता है बच्चों का दिमाग, जानें क्या कहती है रिसर्च 

Thu, 20 Feb 2020 02:35 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सांकेतिक तस्वीर
ये तो सभी जानते हैं कि मां का दूध बच्चों के लिए अमृत से कम नहीं होता। यह शिशु को पोषण देता है और उनके सर्वांगीण विकास में सहायक होता है। हाल ही में हुए एक शोध में इसके चमत्कारी उपायों का खुलासा हुआ है। अमेरिका में हुई इस रिसर्च में पता चला है कि मां का दूध पीने से शिशु का दिमाग बहुत तेज होता है। आइए जानते हैं और क्या कहती है ये रिसर्च: 
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अमेरिका की कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में हुए हालिया शोध में यह खुलासा हुआ है कि मां का दूध न केवल  बच्चों के दिमाग के विकास में सहायक होता है, बल्कि इसमें मौजूद कार्बोहाइड्रेट ओलिगोसैकाराइड2 एफएल संज्ञानात्मक (ज्ञान संबंधी) विकास में भी मदद करता है।
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breastfeeding
कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी की रिसर्च टीम ने 50 माओं और उनके बच्चों पर शोध किया। शोधकर्ताओं ने मां के दूध में मौजूद तत्वों और एक से छह महीने के बच्चों को दूध पिलाने की आवृत्ति का विश्लेषण किया। जब इन बच्चों की उम्र 24 महीने हो गई तो बेले-3 स्केल की मदद से बच्चों के संज्ञानात्मक विकास को मापा गया। यह एक ऐसा परीक्षण है जिससे बच्चे के दिमागी विकास के बारे में पता लगाया जाता है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर
शोधकर्ता लार्स बोड के मुताबिक मां के दूध के कई नमूनों में उन्होंने ओलिगोसैकाराइड2 एफएल की मात्रा की पहचान की। यह तकनीक हमें दूध में मौजूद तत्वों में अंतर करने की क्षमता देती है। इससे बच्चे के संज्ञानात्मक विकास के बारे में कई जानकारियां मिलती हैं।
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breast feeding
रिसर्च मैगजीन प्लोस वन में प्रकाशित इस रिपोर्ट में बताया गया कि मां के दूध में पहले के एक महीने में मौजूद ओलिगोसैकाराइड2 एफएल की मात्रा का संबंध दो साल के उम्र के बच्चों के संज्ञानात्मक विकास से था। इससे पता चलता है कि जन्म के बाद शुरुआती महीने में मां के दूध का सेवन करने से बच्चों का संज्ञानात्मक विकास अच्छा होता है। 
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breast feeding
शुरुआती दो साल में बेहतर संज्ञानात्मक विकास होने से बच्चों के जीवन पर लंबा प्रभाव पड़ता है। वे स्कूल और विभिन्न कार्यों में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। यह रिसर्च शिशु के लिए मां के दूध की महत्ता पर बल देती है। कुछ महिलाएं अपना फिगर मेंटेन करने के लिए अपने शिशु को दूध पिलाना पसंद नहीं करती, लेकिन डॉक्टर इसे जरूरी बताते हैं। 
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