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Alappuzha: हरियाली के बीच, पानी पर तैरते आनंद के पल

Mon, 06 Feb 2023 11:04 AM IST
स्वाति शैवाल लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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हरियाली से भरपूर है केरल - फोटो : social media
दक्षिण भारत के हर हिस्से में प्रकृति, इतिहास और संस्कृति के अलग अलग रंग देखने को मिलेंगे। यहां हर राज्य की अपनी खूबसूरती है और अपना अलग अंदाज। केवल भाषाई तौर पर ही नहीं, खान पान के मामले में भी यहाँ भिन्नता है। उदाहरण के लिए केरल। आँखों के साथ दिल को भी सुकून देती है केरल की खूबसूरती। यही कारण है कि इसे 'गॉड्स ओन कंट्री' के नाम से भी सम्बोधित किया जाता है। चारों तरफ हरे रंग की चादर ओढ़े प्रकृति और पानी पर लय-ताल में तैरती नावें और क्रूज़, यहाँ पर्यटन को और भी आनंददायक बना डालते हैं। इसलिए इसे वेनिस ऑफ़ ईस्ट भी कहा जाता है। यूं तो पूरे केरल में खूबसूरत नजारों की भरमार है और यही कारण है कि पूरी दुनिया से लोग यहां पर्यटन के लिए आते हैं। केरला में और उसके आस पास ऐसे कई टूरिस्ट डेस्टिनेशंस हैं और उनमें से ही एक नाम है 'अलाप्पुझा ' का। जानिए इस खूबसूरत पर्यटन स्थल के बारे में। 
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बोट रेस का ऊर्जा से भरपूर माहौल - फोटो : social media
प्रसिद्ध बोट रेस 

अलाप्पुझा को भरपूर हरियाली और बैकवाटर्स के लिए तो जाना जाता ही है, यह अपनी नौका दौड़ प्रतियोगिता यानी बोट रेस के लिए भी प्रसिद्ध है। यह दौड़ स्नेक बोट यानी संकरी वाली नावों पर की जाती है। हर नाव करीब 100 फ़ीट लम्बी होती है और ऐसी कई नावें एक साथ पुन्नमडा लेक में रेस लगाती हैं और साथ में नाविक गाते हैं पीढ़ी दर पीढ़ी साथ चले आ रहे, नाविकों और नौका के लोकगीत। यह सबकुछ मिलकर एक अलग ही समा बाँध देता है। नौका रेस का समय और दिनांक स्थानीय प्रशासन और मलयालम कैलेंडर के अनुसार तय किया जाता है लेकिन केरला टूरिज्म की साइट पर इसे लेकर लेटेस्ट अपडेट्स आसानी से मिल सकते हैं। वर्तमान में केरल के अन्य कई हिस्सों में भी ऐसी और रेस संचालित की जा रही हैं। 
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प्रकृति की गोद में बसे हैं गाँव यहाँ - फोटो : social media
छोटे और मनमोहक गाँव 

अलाप्पुझा का बैक वॉटर अपनी झीलों के लिए तो पहचाना जाता ही है, इसके आस पास बसे छोटे छोटे गाँव भी घूमने के लिए बहुत अच्छा विकल्प हैं। यहाँ आपको स्थानीय खान-पान, पहनावे और दूर दूर तक फैले खेतों के मनोहारी नजारे मिलेंगे। पानी पर घूमने की एकरसता को भी ये खत्म करेंगे और पैदल चलने का अवसर भी देंगे। ढेर सारे नारियल से लदे पेड़, मसालों की सुगंध और लोककला के मनमोहक दृश्य भी इन गाँवों में दिखाई देंगे। शहर की भागदौड़ भरी ज़िंदगी से दूर ये गाँव आपको स्फूर्ति और ताजगी से भर देंगे। 

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पानी पर तैरता लक्ज़री होटल - फोटो : social media
क्रूज की सवारी 

अगर कश्मीर में शिकारों पर बसे खूबसूरत आशियाने आपको पसंद हैं तो केरल में भी आप इनके जैसे स्वरूप वाले क्रूज या हाउसबोट का विकल्प चुन सकते हैं। साफ़, चमकीले पानी पर तैरते ये बेमिसाल कारीगरी के नमूने बहुत आरामदायक भी हैं और प्रकृति के करीब भी क्योंकि इन्हें लकड़ी, नारियल के जूट, बांस और अन्य प्राकृतिक साधनों की कारीगरी से बनाया और सजाया जाता है। एक बोट को बनाने में लगभग 2 करोड़ रूपये तक का खर्च आता है और करीब हर 6 महीने में इसके मेंटेनेंस पर लगभग 3 लाख रूपये तक का खर्च आता है। इनमें आपको सामान्य सुविधाओं से लेकर लक्ज़री 5 स्टार सुविधाओं तक सभी कुछ मिलेगा। आप एक दिन के लिए भी बुकिंग कर सकते हैं और पैकेज के हिसाब से कुछ दिन या महीने के लिए भी। 
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केरल के अलाप्पुझा का खूबसूरत नजारा - फोटो : Facebook/Kerala Tourism
ऐसे कीजिये बुकिंग 

हाउसबोट बुक करने के लिए अगर आप किसी ट्रैवल एजेंसी या ऑनलाइन साइट से बुकिंग कर रहे हैं तो भी ठीक है। इसके अलावा आप डिस्ट्रिक्ट टूरिज्म प्रमोशन काउन्सिल (डीटीपीसी) के अलप्पुझा स्थित प्री पेड काउंटर से भी बुकिंग करवा सकते हैं। इनमें आपको डीलक्स, प्रीमियम और लक्ज़री श्रेणी में हाउसबोट्स मिल सकती हैं, जिनमें एक बेडरूम से लेकर 10-11 बेडरूम तक हो सकते हैं और इनका किराया 8,000 से 50,000 रूपये या इससे अधिक हो सकता है। अगर तुलनात्मक रूप से देखें तो होटल में एक दिन रुकने से यह 4-5 गुना तक अधिक महंगा हो सकता है। इसके अलावा दिसंबर- जनवरी के महीने में इस टेरिफ में 20-30 प्रतिशत और बढ़ोत्तरी हो सकती है। जबकि जून-जुलाई के ऑफ़ सीजन में टेरिफ कम भी हो सकता है। 
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झील में तैरता पंछियों का झुण्ड - फोटो : अमर उजाला
ये भी हैं विकल्प 

अगर आप हाउसबोट में नहीं रुकना चाहते तो सामान्यतः 3-5 हजार रूपये प्रतिदिन के हिसाब से होटल में रूम लेकर भी अलाप्पुझा घूम सकते हैं। कई ऐतिहासिक स्थलों के अलावा मंदिर, चर्च आदि की वास्तुकला भी यहाँ आकर्षित करती है। साथ ही यहाँ कई खूबसूरत बीच हैं जहाँ बेहतरीन गार्डन भी डेवलप किये गए हैं। इन गार्डन में 25 रूपये के लगभग राशि चुकाकर घूमा जा सकता है। याद रखें कि अधिकांश जगह कैमरे साथ ले जाने के लिए टिकिट या परमिशन लगती है। अलाप्पुझा से आप नारियल के जूट और खोल के बने आर्ट पीसेस भी खरीद सकते हैं।
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कोचीन एयरपोर्ट
ऐसे पहुंचें 

अलाप्पुझा में रेलवे स्टेशन है। इसलिए यहाँ पहुंचना और भी आसान है। यहाँ से कोचीन इंटरनेशनल एयरपोर्ट करीब 90 किलोमीटर की दूरी पर है और त्रिवेंद्रम इंटरनेशनल एयरपोर्ट करीब 150 किलोमीटर। इसके अलावा दिल्ली व अन्य मेट्रो से भी ट्रेन मिल सकती है। इसके अलावा सड़क मार्ग से भी आसानी से पहुंचा जा सकता है। यदि आप सड़क मार्ग का विकल्प चुनते हैं तो रास्ते में कई टूरिस्ट डेस्टिनेशंस को कवर कर सकते हैं। चाहें तो एयरपोर्ट या रेलवे  स्टेशन से भी प्राइवेट टैक्सी चुन सकते हैं।  
 
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