Sapt Devalaya: बृज श्रीकृष्ण की नगरी है। यहां गोकुल-वृंदावन की गलियों से लेकर मथुरा और बरसाना तक हर जगह कृष्ण महिमा देखने को मिलती है। कृष्ण भक्त वृंदावन में कई प्राचीन मंदिरों के दर्शन कर कान्हा की अनुभूति करते हैं। वृंदावन का बांके बिहारी मंदिर और राधा रमण मंदिर लोकप्रिय है, जहां दूर दराज से भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि ठाकुर जी के सिर्फ ये दो रूप नहीं हैं, बल्कि कुल सात ठाकुर जी के स्वरूप विराजमान हैं।
इन्हें वृंदावन के श्री विग्रह कहा जाता है। कृष्ण के ये सभी स्वरूप प्रकट हुए या फिर गोस्वामियों द्वारा खोजे गए हैं यानी सभी स्वयंभू हैं। ठाकुर जी की ये सातों प्रतिमाएं प्राण प्रतिष्ठा के उपरांत जीवंत स्वरूप में विराजती हैं।
अगर आपने अभी तक वृंदावन के प्रमुख श्री विग्रहों के दर्शन नहीं किए हैं तो पहले ये जान लीजिए कि ठाकुर जी के इन सातों स्वरूपों के क्या नाम हैं और सभी ठाकुर जी कहां विराजमान हैं।
7 श्री विग्रह
1. गोविंद देव जी
2. मदन मोहन जी
3. गोपीनाथ जी
4. बांके बिहारी जी
5. राधा रमण जी
6. राधा वल्लभ जी
7. जुगल किशोर जी
16वीं शताब्दी में चैतन्य महाप्रभु के निर्देश पर उनके शिष्यों ने वृंदावन आकर साधना की और गोवंश या जमीन के भीतर से इन दिव्य विग्रहों को खोजा। उनके तीन शिष्यों के नाम हैं, रूप गोस्वामी, सनातन गोस्वामी और लोकनाथ गोस्वामी