बाइपोलर डिसऑर्डर एक प्रकार का मानसिक विकार है। इससे ग्रस्त व्यक्ति का मूड पल-पल बदलता रहता है। कभी-कभी वह बहुत गंभीर हो जाता है और समझ नहीं पाता कि क्या करें, क्या न करें।
अगर आप हमेशा दुविधा में रहते हैं और किसी निर्णय पर नहीं पहुंच पाते हैं, तो सावधान हो जाएं। यह कोई सामान्य बात नहीं, बल्कि एक तरह का मानसिक विकार है, जिसे बाइपोलर डिसऑर्डर कहा जाता है। इस बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति का मूड बदलता रहता है। कभी वह बहुत गंभीर हो जाता है और समझ नहीं पाता क्या करे, क्या न करे। यानी वह हमेशा एक प्रकार की दुविधा में रहता है और अक्सर उसके द्वारा किए गए काम पूरे नहीं हो पाते। इस बीमारी से ग्रस्त होने पर मरीज को दवा के साथ-साथ अपने दोस्तों और रिश्तेदारों की बहुत जरूरत होती है।
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bipolar disorder
बाइपोलर डिसऑर्डर का असर कई सप्ताह, महीनों या कई सालों तक रहता है। बाइपोलर शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है, जिसमें आदमी के मूड के दो रूपों को दिखाया गया है। पहला मूड अत्यधिक उच्च स्तर और दूसरा, अत्यधिक निम्न स्तर। व्यक्ति इन्हीं दोनों में उलझा रहता है।
इस बीमारी के उच्च स्तर के होने पर दुखी रहना, ऊर्जा में कमी, इच्छा में कमी, आत्मविश्वास में कमी, आत्महत्या की इच्छा करना और चिड़चिड़ा होना आदि लक्षण दिखाई देते हैं। निम्न स्तर में होने पर बहुत अधिक खुशी, नींद की कमी, बहुत अधिक बोलना, जोखिम लेना, अति आत्मविश्वास होना, बहुत अधिक जोश में रहना, आदि लक्षण दिखते हैं।
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bipolar disorder
यह महिलाओं और पुरुषों दोनों को किसी भी उम्र में हो सकता है। अगर इस बीमारी के उपचार के दौरान दवा के साथ-साथ दोस्त और परिजनों का खुशनुमा साथ मिल जाए तो पीड़ित को सामान्य होने में ज्यादा वक्त नहीं लगता है। इस बीमारी से ग्रस्त दोस्त की मदद करने से पहले इस बीमारी के लक्षणों और प्रकृति के बारे में जानकारी इकट्ठा करना चाहिए, जिससे कि आपको उसका व्यवहार अजीब न लगे।
इस मानसिक विकार से निपटने के लिए पीड़ित व्यक्ति को हर कदम पर सांत्वना देना चाहिए। अगर उसके द्वारा किया गया काम सही न हो, तब भी उसकी तारीफ करना चाहिए। पीड़ित की भावनाओं, उसकी अजीबोगरीब हरकतों को समझकर मदद करना चाहिए।
विशेषज्ञ कहते हैं...
यह एक प्रकार का बॉयोलोजिकल डिसॉर्डर है। इसमें दवा के साथ-साथ परिवार और दोस्तों के मदद की भी जरूरत होती है। नींद की कमी, ऊर्जा के स्तर में अप्रत्याशित वृद्धि, अति आत्मविश्वास आदि इसके प्रमुख लक्षण हैं। यह एक गंभीर मानसिक बीमारी है, इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। इस बीमारी के ठीक होने के बाद भी दवा खानी पड़ती है, क्योंकि इसके वापस होने की संभावना बनी रहती है। दिमाग में रसायनिक असंतुलन भी इस बीमारी की प्रमुख वजहों में एक है, इसलिए इसका इलाज कराना जरूरी है। - डॉ. अजय निहलानी मनोचिकित्सक