Mukkabaaz
बहुत हुआ सम्मान
''अरे गले में घंटी बांध के हमको फांसी दिए हुजूर
सांचा लेके हमको ढाला, आवाज़ों के कुएं में डाला
चाकर बनाके तलवा चटाया, खंजर देके पानी कटाया
जो सिखाया वो न करेंगे अब न सुनेंगे कह के रहेंगे
जबरन बने महान तुम्हारी ऐसी तैसी...
अरे बहुत हुआ सम्मान तुम्हारी...
गरियाएंगे सीना तान तुम्हारी...
बहुत हुआ सम्मान तुम्हारी ऐसी तैसी''
फिल्म 'मुक्काबाज' के एक गाने की ये पंक्तियां हर कर्मचारी की टीस बयां करती है। पावर और पोजीशन का गलत इस्तेमाल करके बॉस अगर आपका भी शोषण करता है, ऊट-पटांग काम करवाता है तो अब बस 'बहुत हुआ सम्मान'। जिस तरह रेलवे में नौकरी करते वक्त श्रवण ने अपने रिपोर्टिंग मैनेजर को उसकी असली औकात याद दिलाई, (आप सेम-टू-सेम वैसा ही करने की सोचिएगा भी मत, वो फिल्म है) उसी तरह अगर आपको भी लगे कि आपका शोषण हो रहा है तो आवाज उठाइए, लेकिन तरीका थोड़ा संयमित होना चाहिए। अपनी बात को सही मंच पर रखिएगा। रिपोर्टिंग मैनेजर की अक्ल ठिकाने आएगी तो वो आपके साथ कायदे में रहेंगे और आप फायदे में रहेंगे।