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आपके भी पेरेंट्स मोबाइल पर करते हैं ये काम तो हो जाएं सावधान, वर्ना...

Tue, 16 Jan 2018 10:14 AM IST
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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स्मार्टफोन का उपयोग हम सिर्फ बातें करने के लिए ही नहीं करते, बल्कि मनोरंजन के साधन के तौर पर भी करने लगे हैं, जिसमें से एक है वीडियो गेम। ऑनलाइन और ऑफलाइन वीडियो गेम खेलना हमारी आदतों में शुमार हो रहा है। बच्चे और युवा मनोरंजन के लिए स्मार्टफोन का सहारा लेने लगे हैं। वे नए-नए रोमांचक गेम खोजते हैं और गेम खेलकर समय व्यतीत करते हैं। लेकिन जिन पेरेंट्स पर बच्चों की जिम्मेदारी होती है, अगर उन्हें ही इसकी लच लग जाए तो उसके दुष्परिणाम से घर में कलह पक्की है। 
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'गेमिंग डिसऑर्डर'
गेम खेलने की यह आदत जब लत बन जाती है, तो गेम खेलने में आनंद तो आता ही है, साथ ही दिमाग को सुकून भी मिलता है। धीरे-धीरे यह लत इतनी बढ़ जाती है कि बिना गेम खेले मन को चैन ही नहीं मिलता। गेम न खेल पाएं, तो बेचैनी होती है, गुस्सा आता है। गेम खेल लेते हैं, तो सब कुछ सामान्य हो जाता है। क्या आपको पता है कि ये लक्षण 'गेमिंग डिसऑर्डर' के होते हैं। अगर समय पर उपचार न लिया जाए, तो इससे अन्य बीमारियों के होने का खतरा भी बढ़ जाता है। 
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डब्‍ल्यूएचओ भी गंभीर 

गेमिंग की लत की गंभीरता को देखते हुए डब्ल्यूएचओ 'गेमिंग डिसऑर्डर' को रोगों के अंतरराष्ट्रीय वर्गीकरण में शामिल करने पर विचार कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोगों की एक नियमावली, जिसे आईसीडी कहते हैं, उसे डब्‍ल्यूएचओ द्वारा हर साल प्रकाशित किया जाता है। इसका 11वां संस्करण 2018 में प्रकाशित होना है। इसमें 'गेमिंग डिसऑर्डर' को एक ऐसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या के तौर पर रखा जाएगा, जिसकी निगरानी किए जाने की जरूरत है। इस मसौदे में कई तरह के व्यवहारों को सूचीबद्ध किया गया है, जिससे चिकित्सक यह तय कर सकते हैं कि किसी व्यक्ति का व्यवहार गंभीर स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में है या नहीं।

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जब ऐसा हो तो...
वीडियो गेम्स के अंदर कई ऐसी रोमांचक स्टेज होती हैं, जिन्हें पार करना एक चुनौती होती है। अगर वह स्टेज पार नहीं कर पाते, तो उसे पूरा करने की जिद हम पर हावी हो जाती है। जब हम उसे पार कर लेते हैं, तो दिमाग को एक सुकून मिलता है। यह हमारे दिमाग में एक प्रतिक्रिया पैदा करती है। गेम को पूरा करने के बाद ठीक वैसा ही अहसास होता है, जैसा नशा करने के बाद होता है। रोगी जब वीडियो गेम नहीं खेल पाता, तो उसमें चिड़चिड़ापन, चिंतित होना या अधिक दुखी होना, वजन का घटना, नींद में कमी, अकेले रहने का मन करना, थकान रहना, मानसिक कमजोरी, याद्दाश्त कमजोर होना, भूख न लगना जैसे लक्षण सामने आते हैं। अब सवाल यह है कि
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इस लत से छुटकारा कैसे पाएं?
गेमिंग डिसऑर्डर होने पर प्राथमिक उपचार यही है कि मनोवैज्ञानिक से मिलकर काउंसलिंग कराई जाए। वीडियो गेम्स से दूर रहने की कोशिश करें। अपना ध्यान अन्य चीजों में लगाएं। स्मार्टफोन एवं इंटरनेट से दूरी बनाएं। प्रकृति के साथ समय बिताएं। दोस्तों से मिलें, घूमने जाएं, किताबें पढ़े और आउटडोर गेम्स खेलें।
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डॉक्टर कहते हैं-

दिल्ली स्थित बत्रा हॉस्पिटल के लगातार डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि वीडियो गेम खेलने से दिमाग को एक आनंद मिलता है। इससे मिलने वाला रोमांच हमें इस ओर आकर्षित करता है कि हम धीरे-धीरे इसके लती हो जाते हैं। इस लत को गेमिंग डिसऑर्डर कहते हैं। इस बीमारी के होने पर हम काम पर फोकस नहीं कर पाते हैं और हमारा ध्यान गेम की ओर ही रहता है। इससे दिमाग पर दबाव पड़ना, आंखों पर गंभीर असर, ब्लडप्रेशर, डायबिटीज, स्ट्रोक, सोचने-समझने की शक्ति पर असर पड़ना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इससे बचने के लिए मेडिटेशन, योगा, व्यायाम आदि करें। आउटडोर गेम्स खेलें। समस्या बढ़ने पर मनोचिकित्सक से संपर्क करें।
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