ऐसी बहुत सी बातें होती हैं, जिन्हें हम किसी से साझा नहीं कर पाते। मन की बात मन में ही रहती है, तो हम तनाव में आ जाते हैं। मन की बात को शब्दों का आकार दें, उसे डायरी में लिखें। फिर देखें, गम और तनाव कैसे दूर हो जाएगा।
शोध कहता है
मिशिगन यूनिवर्सिटी का शोध कहता है कि मन की बात को डायरी में लिखने या कुशलता से व्यक्त करने वाला व्यक्ति, चुनौतियों का सामना आसानी से कर पाता है। मन की बात लिखने की आदत जहां तनाव दूर करती है, वहीं इससे आपका व्यक्तित्व भी सुधरता है। शोधकर्ताओं ने डायरी लेखन को सेहत के लिए अच्छा माना है। शोध के दौरान कॉलेज के छात्रों को कंप्यूटर आधारित कुछ काम दिए गए, जिसे उन्हें कुछ सीमित समय में पूरा करना था। इनमें से आधे छात्रों को कुछ देर पहले अपने मन की बात को लिखने का मौका दिया गया। शोधार्थियों ने पाया कि जिन लोगों ने अपने मन के भाव नहीं लिखे थे, उनका काम उतना सटीक नहीं था जितना कि मन की बात लिखने वाले छात्रों का था।
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तनाव
बदल जाएगा जीवन
किसी समस्या का समाधान नहीं मिल रहा है या रिश्तों के बीच बढ़ती दूरियों को नहीं सुलझा पा रहे हैं, तो उसे डायरी में लिख दीजिए। लिखने के बाद जब आपका मन हल्का हो जाएगा, तो समाधान खुद खोज लेंगे। डायरी लेखन का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि इससे आप खुद को तरोताजा महसूस करते हैं, तनाव से बाहर आते हैं, फिर नई ऊर्जा से अपने काम में जुट जाते हैं। हममें से ज्यादातर लोगों के साथ होता है कि हम जीवन में करना कुछ चाहते हैं, लेकिन उसे पा नहीं पाते। यह बात हमारे मन में चलती रहती है। शोधकर्ताओं ने शोध में पाया है कि जिन लोगों ने अपने जीवन के लक्ष्य डायरी में उतारे, वह उस लक्षय को पाने में सफल भी रहे। डायरी लिखने से इंसान का खुद का विकास होता है। अपनी गलतियों में सुधार की संभावना बनी रहती है। खुद को समझने और अपना विकास करने की संभावना बढ़ जाती है।
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स्ट्रेस
रोजमर्रा के जीवन में अापने क्या किया, क्या समस्याएं आपके सामने आई, काम में गलती कहां रह गई, परिवार के साथ दूरियां किन कारणों से बढ़ रही हैं आदि लिखने से आप समस्या का समाधान बेहतर तरीके से और जल्दी खोज सकते हैं। जब आप लिखते हैं और लिखी गई बातों को पढ़ते हैं, तो इससे आपके दिमाग में नये विचार और नये आइडिया आते हैं। इससे आपकी याददाश्त भी तेज होती है और नींद भी अच्छी आती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भागदौड़ भरी जिंदगी, वर्क लोड और आगे निकलने की होड़ के कारण हमारे पास अपनों के लिए वक्त कम ही होता है। ऐसे में हम अपने मन की बात किसी से कह नहीं पाते। अगर हमें डायरी लिखने की आदत है, तो अवसाद और अकेलापन हावी नहीं होता। खुद का आकलन करना चाहते हैं, तो डायरी जरूर लिखिए। इससे आपको पता चलेगा कि आपकी क्षमता कितनी है और कमी कहां है। ऐसा करने से आप खुद में तेजी से सुधार कर सकते हैं। डायरी लिखने से आपके लेखन में भी सुधार होता है। भाषा में आपकी पकड़ मजबूत होती है। अच्छे शब्द भी जहन में आते हैं। अपनी सोच और विचार को आकार दे पाते हैं।