मेरा जहन, शरीर में आए इन बदलावों से ताल-मेल बिठाने में मुश्किल महसूस कर रहा था। बड़ी उम्र के मर्दों की घूरती निगाहें मुझे परेशान करती थीं। मैं परेशान हो जाती थी। असुरक्षित महसूस करती थी। मेरे पास से गुजरते अजनबी जब भी चुंबन लेने वाली आवाज़ निकालते, तो मेरा दिल तेज़ी से धड़कने लगता था और कलेजा मुंह को आता था। आज भी अगर मैं अपनी आंखें बंद कर लूं, तो करीब से गुजरती गाड़ियों से आती वो अश्लील और भद्दी आवाजें मुझे आज भी सुनाई देती हैं। मैं फिर से वही दस बरस की बच्ची बन जाती हूं, जो सब के सामने छोटे कपड़े पहनने से डरती हो। अनचाहे भद्दे कमेंट झेलना, खुद को घूरे जाने का तजुर्बा फिर भी दूसरे यौन अपराधों के मुकाबले छोटा मालूम होता है। फिर भी, तमाम स्टडी बताती हैं कि वो किसी बच्चे के लिए बेहद तकलीफदेह हो सकती हैं।