मिलकर खुशियां मनाने का अवसर
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लोगों से जुड़ने का अवसर
भारतीय त्यौहारों का असली स्वरूप ही है आपसी मेलजोल। लेकिन हमारे जीवन में हुई वर्चुअल वर्ल्ड की एंट्री ने इसपर भी बुरा असर डाला है। ऊपर से कोरोना महामारी के आने के बाद तो घरों में बंद रहना मजबूरी ही हो गई थी। कोरोना के दौरान जिस चीज को लोगों ने सबसे ज्यादा मिस किया वह यही है। एक-दूसरे से मिलना-जुलना, खुशियां बांटना और गप्पें मारना, गरबे इसके लिए सबसे अच्छा विकल्प हैं। इस अवसर पर मित्र, रिश्तेदार, परिवार सभी एकजुट हो उत्सव मनाते हैं। खासतौर पर वर्तमान स्थितियों में जब हमारा ज्यादातर समय मोबाइल, ;लैपटॉप और टैबलेट या कम्प्यूटर की स्क्रीन पर गुजरता है, गरबे के बहाने हमें अपनी जड़ों से जुड़ने का मौका भी मिलता है और साथ मिलकर त्यौहार का आनंद उठाने का भी। नौ दिनों का यह उत्सव नए दोस्त बनाने से लेकर लोगों को जानने-समझने का मौका भी देता है।