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शरद पूर्णिमा 2026: शरद पूर्णिमा की रात भूलकर भी न करें ये गलतियां, जानिए जरूरी नियम और परंपरा

Fri, 23 Oct 2026 05:04 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Sharad Purnima 2026: शरद पूर्णिमा आस्था, चंद्र पूजा और पारिवारिक परंपराओं से जुड़ा पर्व है। इस दिन मां लक्ष्मी की आराधना, चंद्रमा को अर्घ्य, खीर का भोग और जरूरतमंदों की सहायता जैसे कार्य श्रद्धा के साथ किए जा सकते हैं। 
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शरद पूर्णिमा पर क्या करें और क्या न करें - फोटो : AI
Sharad Purnima Do And Donts: शरद पूर्णिमा हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखने वाला पर्व है। इस दिन चंद्रमा की पूजा, मां लक्ष्मी की आराधना और चांदनी में खीर रखने की परंपरा निभाई जाती है। साल 2026 में शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर, रविवार को मनाई जाएगी। पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर को सुबह 11:55 बजे शुरू होकर 26 अक्टूबर को सुबह 9:41 बजे समाप्त होगी। इसलिए रात्रि की पूजा और खीर रखने की परंपरा 25 अक्टूबर की रात निभाई जाएगी।

शरद पूर्णिमा को कई जगह कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस रात मां लक्ष्मी की पूजा करने, चंद्रमा को अर्घ्य देने और श्रद्धापूर्वक धार्मिक अनुष्ठान करने से सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। लेकिन इस दिन कौन-से काम करना शुभ माना जाता है और किन बातों से बचना चाहिए? आइए जानते हैं।

शरद पूर्णिमा पर क्या करना माना जाता है शुभ?

शरद पूर्णिमा पर धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां लक्ष्मी और चंद्र देव की पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा-पाठ, मंत्र जाप और दान-पुण्य किया जा सकता है। कई परिवारों में रात के समय जागकर मां लक्ष्मी की आराधना करने की परंपरा है।

1. घर और पूजा स्थल की सफाई करें

शरद पूर्णिमा के दिन घर को साफ-सुथरा रखें और पूजा स्थल को व्यवस्थित करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, स्वच्छता और श्रद्धा के साथ की गई पूजा का विशेष महत्व है। पूजा के लिए फूल, दीपक, धूप, फल और मिठाई जैसी सामग्री पहले से तैयार रख सकती हैं।

2. मां लक्ष्मी और चंद्रमा की पूजा करें

शाम या रात में अपनी परंपरा के अनुसार मां लक्ष्मी की पूजा करें। चंद्रमा के दर्शन होने पर जल अर्पित कर सकते हैं और परिवार की सुख-शांति की कामना कर सकते हैं। पूजा का सटीक मुहूर्त जानने के लिए अपने शहर का पंचांग देखें।

3. चांदनी में खीर रखने की परंपरा निभाएं

शरद पूर्णिमा पर दूध और चावल से बनी खीर को चंद्रमा की रोशनी में रखने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता है कि इस रात चंद्रमा की किरणें अमृत के समान होती हैं। हालांकि, चांदनी में रखने से खीर में विशेष औषधीय गुण पैदा होने का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

4. जरूरतमंदों की सहायता करें

अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को भोजन, कपड़े या अन्य उपयोगी वस्तुएं दान कर सकती हैं। धार्मिक परंपराओं में दान-पुण्य को महत्व दिया जाता है।


शरद पूर्णिमा पर क्या न करें?
  • क्रोध और कटु वाणी से बचें: परिवार के सदस्यों के साथ प्रेम और सम्मान से व्यवहार करें। इसे धार्मिक आचरण का हिस्सा माना जाता है।
  • स्वास्थ्य की अनदेखी न करें: व्रत रखने पर अपनी शारीरिक क्षमता का ध्यान रखें। बीमारी या कमजोरी होने पर चिकित्सकीय सलाह को प्राथमिकता दें।
  • खीर को असुरक्षित तरीके से न रखें: दूध से बनी खीर को पूरी रात खुले में छोड़ने से वह खराब हो सकती है। उसे साफ, ढके हुए बर्तन में रखें और लंबे समय तक सामान्य तापमान पर न छोड़ें। सुरक्षित रखने के लिए फ्रिज का इस्तेमाल करें।
  • अंधविश्वास के कारण डरें नहीं: किसी परंपरा का पालन न कर पाने पर अनावश्यक भय या अपराधबोध महसूस न करें। धार्मिक रीति-रिवाज क्षेत्र और परिवार के अनुसार अलग हो सकते हैं।
  • बिना जानकारी के विशेष उपाय न करें: पूजा या व्रत की विधि को लेकर संदेह हो तो विश्वसनीय पंचांग या जानकार व्यक्ति से जानकारी लें।
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