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Republic Day 2025: भारत के संविधान में महिलाओं को मिले हैं कई अधिकार, जानिए इनके बारे में

Sun, 19 Jan 2025 11:53 AM IST
शिखर बरनवाल लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

महिलाओं को भी संविधान में पुरुषों के समान अधिकार दिए गए हैं, ताकि वे सम्मानजनक और समानतापूर्ण जीवन जी सकें। कई बार जानकारी के अभाव में महिलाओं को अपने अधिकारों के बारे में पता नहीं होता, जिससे उनके साथ अन्याय होता है। इसलिए आइए कुछ महत्वपूर्ण कानूनों के बारे में जानते हैं।
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महिलाओं के अधिकार - फोटो : Amar Ujala
Importants Rights For Womens: 26 जनवरी 1950 वह स्वर्णिम दिन है जब भारत का संविधान देश में लागू हुआ था। इसीलिए इस विशेष दिन को हर वर्ष गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है। भारत का संविधान न सिर्फ देश का सर्वोच्च कानून है, बल्कि यह हर नागरिक के अधिकारों की रक्षा भी करता है। महिलाओं को भी संविधान में पुरुषों के समान अधिकार दिए गए हैं, ताकि वे सम्मानजनक और समानतापूर्ण जीवन जी सकें। कई बार जानकारी के अभाव में महिलाओं को अपने अधिकारों के बारे में पता नहीं होता, जिससे उनके साथ अन्याय होता है। इस लेख में हम भारत के संविधान में महिलाओं को मिले कुछ महत्वपूर्ण अधिकारों के बारे में जानेंगे-
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संविधान - फोटो : Adobe Stock
समान वेतन का अधिकार
समान पारिश्रमिक अधिनियम, 1976 के तहत, महिलाओं को पुरुषों के समान काम के लिए समान वेतन पाने का अधिकार है। आय या मेहनताना देने में लिंग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जा सकता।

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संविधान - फोटो : Adobe Stock
मातृत्व लाभ कानून (मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961)
कामकाजी महिलाओं को मां बनने की स्थिति में 6 महीने तक के मातृत्व अवकाश का अधिकार है। इस दौरान कंपनी उनके वेतन में कोई कटौती नहीं कर सकती और उन्हें नौकरी से भी नहीं निकाल सकती।

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गणतंत्र दिवस 2025 - फोटो : Adobe Stock
संपत्ति का अधिकार (हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम)
हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के अनुसार, पिता की संपत्ति या पुस्तैनी संपत्ति पर बेटे और बेटी दोनों का समान अधिकार है।

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गणतंत्र दिवस 2025 - फोटो : Adobe Stock
रात में गिरफ्तारी से सुरक्षा
महिलाओं को सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले गिरफ्तार नहीं किया जा सकता, सिवाय फर्स्ट क्लास मजिस्ट्रेट के आदेश के। पूछताछ के दौरान महिला कांस्टेबल का होना अनिवार्य है।

पहचान जाहिर न करने का अधिकार
यौन उत्पीड़न की शिकार महिला अपनी पहचान गोपनीय रख सकती है और केवल जिला मजिस्ट्रेट या महिला पुलिस अधिकारी की उपस्थिति में बयान दर्ज करा सकती है। यह उनकी निजता की रक्षा करता है।
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