अरुणिमा सिन्हा
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अरुणिमा सिन्हा
अरुणिमा सिन्हा को कौन नहीं जानता। उनके जज्बे और जाबांज इरादों को पूरा देश सलाम करता है। अरुणिमा पहली दिव्यांग महिला हैं जिन्होंने माउंट एवेरस्ट फतह किया। यह साल 2013 की बात है। साल 2011 में अरुणिमा सिन्हा को बदमाशों ने चलती हुई ट्रेन से बाहर फेंक दिया था और वो बाएं पैर से अपंग हो गईं थीं। अरुणिमा सिन्हा ने हार नहीं मानी और इस दर्दनाक घटना के दो साल बाद एवरेस्ट फतह किया। इस घटना में उनके कमर पर भी दर्दनाक चोटें लगी थी। इतना ही नहीं, उन्होंने अंटार्कटिका की सबसे ऊंची चोटी माउंट विंसन को भी फतह किया और दुनिया की पहली दिव्यांग महिला बनीं जिन्होंने अंटार्टिका की सबसे ऊंची चोटी पर भारतीय झंडा फहराया।
30 साल की अरुणिमा सिन्हा पर्वतारोही और खिलाड़ी हैं। उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। लखनऊ के अंबेडकर नगर में पैदा हुई अरुणिमा के पिता भारतीय सेना में इंजीनियर थे। अरुणिमा को बचपन से ही साइकिलिंग और फुटबॉल खेलना पसंद था और वो वॉलीबॉल की राष्ट्रीय खिलाड़ी रह चुकी हैं।