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वर्क लाइफ बैलेंस: दफ्तर की टेंशन घर तक पहुंच रही है? काम के बाद दिमाग शांत करने के ये तरीके अपनाएं

Tue, 06 Oct 2026 01:03 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Work Life Balance: कुछ छोटी और आसान आदतें अपनाकर दिमाग को संकेत दिया जा सकता है कि अब काम का समय खत्म हो चुका है। वॉक करना, कुछ देर स्क्रीन से दूरी बनाना, अगले दिन के जरूरी काम लिख देना या घर पहुंचने के बाद कुछ समय पसंदीदा गतिविधि के लिए निकालना इस बदलाव में मदद कर सकता है।
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वर्क लाइफ बैलेंस - फोटो : AI

Work Stress: दफ्तर से निकलते समय भले ही लैपटॉप बैग में बंद हो जाए, लेकिन क्या आपका दिमाग अब भी मीटिंग, ईमेल, डेडलाइन और अगले दिन के काम में उलझा रहता है? अगर ऐसा है तो आप अकेले नहीं हैं। काम का तनाव कई बार दफ्तर की चारदीवारी से निकलकर घर तक पहुंच जाता है। इसका असर शाम के आराम, परिवार के साथ समय और नींद पर भी पड़ सकता है।

दरअसल, काम खत्म होने और मानसिक रूप से काम से अलग होने में फर्क है। शरीर दफ्तर से घर आ जाता है, लेकिन दिमाग अगर लगातार काम से जुड़ी बातों को दोहराता रहे तो आराम का समय भी तनाव में गुजर सकता है। ऐसे में जरूरी है कि दफ्तर और निजी जिंदगी के बीच एक छोटा-सा मेंटल स्विच बनाया जाए।

इसके लिए हमेशा बड़े बदलाव करने की जरूरत नहीं होती। कुछ छोटी और आसान आदतें अपनाकर दिमाग को संकेत दिया जा सकता है कि अब काम का समय खत्म हो चुका है। वॉक करना, कुछ देर स्क्रीन से दूरी बनाना, अगले दिन के जरूरी काम लिख देना या घर पहुंचने के बाद कुछ समय पसंदीदा गतिविधि के लिए निकालना इस बदलाव में मदद कर सकता है।

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वर्क लाइफ बैलेंस - फोटो : AI

दफ्तर खत्म होते ही काम से थोड़ा डिस्कनेक्ट करें
 

अगर दफ्तर का काम खत्म होने के बाद भी लगातार ईमेल और मैसेज चेक करते रहेंगे, तो दिमाग को आराम का संकेत मिलना मुश्किल हो सकता है। इसलिए संभव हो तो काम से जुड़े नोटिफिकेशन को कुछ समय के लिए बंद करें और जरूरी कामों की सूची अगले दिन के लिए लिखकर छोड़ दें। इससे बार-बार यह सोचने की जरूरत कम हो सकती है कि 'अरे, वह काम करना तो भूल नहीं गया?'
 

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वर्क लाइफ बैलेंस - फोटो : AI

घर पहुंचने से पहले लें छोटा सा ब्रेक

ऑफिस से सीधे घर पहुंचते ही घरेलू जिम्मेदारियों में लग जाने के बजाय रास्ते में या घर पहुंचने के बाद कुछ मिनट अपने लिए निकालें। हल्की वॉक, शांत संगीत सुनना या कुछ देर गहरी सांसों पर ध्यान देना दिन के तनाव से अलग होने का एक छोटा ट्रांजिशन बन सकता है। जरूरी नहीं कि इसके लिए लंबा मेडिकेशन सेशन किया जाए, कुछ शांत मिनट भी आपके रूटीन तनाव इसलिए बना रहता है क्योंकि दिमाग बार-बार अधूरे काम याद करता रहता में फर्क ला सकते हैं।

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वर्क लाइफ बैलेंस - फोटो : AI

दिमाग में चल रही बातों को लिख दें

कई बार तनाव इसलिए बना रहता है क्योंकि दिमाग बार-बार अधूरे काम याद करता रहता है। ऐसे में एक छोटी नोटबुक या नोट्स एप में अगले दिन के जरूरी काम लिख दें। उदाहरण के लिए, 'सुबह 10 बजे रिपोर्ट देखनी है', 'क्लाइंट को मेल करना है' जैसी चीजें लिख देने से उन्हें लगातार याद रखने का मानसिक दबाव कम हो सकता है।
 

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वर्क लाइफ बैलेंस - फोटो : AI

घर पर एक रिलैक्शन रूटीन बनाएं

घर पहुंचने के बाद रोज एक छोटी रूटीन तय करें। जैसे कपड़े बदलना, नहाना, चाय पीना, बालकनी में बैठना, किताब पढ़ जरूरी नहीं है। अगर पूरा दिन मीटिंग और डेडलाइंस में गुजरता है, तो शाम का कुछ हिस्सा बिना किसी प्रोडक्टिविटी गोल ना या परिवार के साथ बातचीत करना। एक जैसी रूटीन दिमाग को यह संकेत देने में मदद कर सकती है कि अब वर्क मोड से पर्सनल मोड में आने का समय है।
 

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वर्क लाइफ बैलेंस - फोटो : AI

हर समय प्रोडक्टिविटी के पीछे न भागें

काम के बाद खाली समय को भी किसी काम से भर देना जरूरी नहीं है। अगर पूरा दिन मीटिंग्स और डेडलाइन में गुजरता है, तो शाम का कुछ हिस्सा बिना किसी प्रोडक्टिविटी गोल के भी बिताया जा सकता है। फिल्म देखना, संगीत सुनना, खाना बनाना, पौधों की देखभाल करना या बस आराम करना, जो गतिविधि आपको सहज महसूस कराए, उसे समय दें।

सोने से पहले काम का विचार काम याद आने लगते हैं, तो सोने से पहले एक छोटा ब्रेन डंप कर सकते हैं। अगले दिन के जरूरी टास्क लिखें और फिर खुद को रोकने की कोशिश करें

अगर रात को बिस्तर पर जाते ही अगले दिन की मीटिंग या पेंडिंग काम याद आने लगते हैं, तो सोने से पहले एक छोटा ब्रेन डम्प कर सकते हैं। अगले दिन के जरूरी टास्क लिखें और फिर खुद को याद दिलाएं कि अब उन पर कल काम किया जाएगा।

साथ ही, सोने से ठीक पहले काम से जुड़े ईमेल या ऑफिस चैट देखने की आदत कम करना भी उपयोगी हो सकता है।

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