जब बेटी युवावस्था की दहलीज पर कदम रखती है तो उसके स्वभाव में तरह-तरह के परिवर्तन होते हैं। कई बार ऐसी स्थिति में बेटी को लगता है कि उसे कोई समझता नहीं है। हालांकि इस उम्र में बेटियों को सबसे ज्यादा उम्मीद अपनी मम्मी से ही होती है। हर मां का परवरिश का तरीका भी अलग होता है। कोई मां सख्त होती है, कोई बहुत नर्म, अति दोनों की ही बुरी है इसलिए बहुत जरूरी है कि इस उम्र में सामंजस्य बैठाकर चलें। इस उम्र में सबसे बेहतर यही है कि आप अपनी बेटी की सबसे अच्छी दोस्त बन जाएं। अगली स्लाइड्स से जानिए किन तरीकों से आप अपनी बेटी की सबसे अच्छी दोस्त बन सकती हैं।