प्यार का अर्थ अक्सर गलत समझ लिया जाता है। हम मान लेते हैं कि जितना ज़्यादा हम साथ रहते हैं, उतना ही गहरा रिश्ता होता है। हर पल साथ रहना, हर बात शेयर करना और हर सांस में साथी की मौजूदगी, इसे ही लोग सच्चा प्यार समझ बैठते हैं। लेकिन सच्चाई थोड़ी अलग होती है। प्यार का मतलब हर वक्त साथ रहना नहीं होता। रिश्ते भी सांस लेते हैं और सांस लेने के लिए स्पेस चाहिए। जहां स्पेस खत्म होता है, वहीं घुटन शुरू होती है।
आज के रिश्तों में सबसे बड़ी गलती यही हो रही है कि लोग अपने पार्टनर संग इतनी ज्यादा करीबी चाहते हैं कि खुद को खो बैठते हैं। मोबाइल, चैट, कॉल और हर पल की अपडेट, इनसब के कारण प्यार अब साथ रहने से ज्यादा नजर रखने का नाम बनता जा रहा है। इसका नतीजा है, रिश्ते में घुटन, शक और चिड़चिड़ापन बढ़ना।
थोड़ी दूरी प्यार को कमजोर नहीं करती, बल्कि उसे मजबूत बनाती है। जीवन में संतुलन के लिए कुछ समय खुद के लिए, कुछ समय दोस्तों के लिए और कुछ समय रिश्ते के लिए देना चाहिए। रिश्ते में दूरी के कई फायदे हैं। दूरी से भावनाओं को समझने का मौका मिलता है, संवाद बेहतर होता है और साथ बिताया गया समय बोझ नहीं लगता है। आइए जानते हैं कि मजबूत रिश्ते के लिए दूरी क्यों जरूरी है और बहुत ज्यादा करीबी का रिश्ते पर क्या असर पड़ता है?