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Parenting Tips: बच्चा फेल हो जाए तो माता पिता की होनी चाहिए कैसी प्रतिक्रिया

Wed, 08 Apr 2026 11:44 AM IST
Shivani Awasthi लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

child exam failure tips: अक्सर बच्चों के फेल होने पर परिवार और रिश्तेदारों में तरह-तरह के सवाल उठने लगते हैं। लेकिन उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण होती है आपकी प्रतिक्रिया।
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Parenting Tips - फोटो : Adobe stock
मेखला गुप्ता

Exam Stress Solution: जब बच्चे के फेल होने की खबर घर तक पहुंचती है तो अक्सर पूरे परिवार में तनाव, चिंता और निराशा का माहौल बन जाता है, “अब आगे क्या होगा?”, “लोग क्या कहेंगे?”, “हमारा बच्चा इतना कमजोर कैसे हो गया?” लेकिन इन सवालों के बीच सबसे महत्वपूर्ण है आपका बच्चा, क्योंकि आपकी पहली प्रतिक्रिया उसके मन पर गहरा प्रभाव डाल सकती है।

सकारात्मक सोच, सहयोगी वातावरण

माता-पिता बच्चे के भविष्य को संवारने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में सही मार्गदर्शन, समझ और सहयोग से आप बच्चे को असफलता से सीखकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें। साथ ही घर का वातावरण जितना शांत और प्रेरणादायक होगा, बच्चा उतना ही आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ेगा। उसे यह एहसास दिलाएं कि आप हमेशा उसके साथ हैं, चाहे परिस्थिति कैसी भी हो। इससे उसका मानसिक संतुलन मजबूत रहेगा।
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उस को समय दें - फोटो : Adobe stock
उस को समय दें

हर बच्चा अलग होता है, इसलिए उसकी तुलना दूसरों से करना गलत है। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चे की रुचियों, ताकतों और कमजोरियों को समझें। यदि बच्चा किसी विषय या क्षेत्र में रुचि रखता है, तो उसे उसी दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें। जब बच्चा अपनी पसंद के अनुसार काम करता है, तो वह अधिक मेहनत और लगन से सीखता है, जिससे उसके सफल होने की संभावना बढ़ जाती है।
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असफलता नहीं, सीख है - फोटो : Adobe stock
असफलता नहीं, सीख है

बच्चे को यह समझाना जरूरी है कि असफलता कोई अंत नहीं है, बल्कि एक नई शुरुआत है। जब वह किसी परीक्षा व काम में असफल होता है या उसके अंक कम आते हैं, तो उसे यह बताएं कि यह अनुभव उसे और बेहतर बनने का मौका दे रहा है। आप उसके साथ उनकी गलतियों पर चर्चा करें और सुधार के उपाय खोजें। इस तरह बच्चा निराश होने के बजाय सीखने पर जोर देगा।

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अपेक्षाओं का बोझ न डालें - फोटो : Adobe stock
अपेक्षाओं का बोझ न डालें

अक्सर माता-पिता बच्चों से कहते हैं, “अगली बार और अच्छा करना।” यह कहना उसके आत्मविश्वास के लिए जरूरी है, लेकिन ध्यान दें कि इससे बच्चे पर अनावश्यक दबाव न बढ़े। केवल उम्मीदें रखने के बजाय उन्हें सही दिशा में मार्गदर्शन दें, जैसे पढ़ाई का तरीका, समय प्रबंधन और अनुशासन। साथ ही उनकी प्रगति पर नजर रखें और जरूरत पड़ने पर सहयोग देकर उनका आत्मविश्वास बढ़ाएं।
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अंकों पर नहीं, विकास पर हो जोर - फोटो : freepik.com
अंकों पर नहीं, विकास पर हो जोर

बाल मनोवैज्ञानिक गार्गी मालगुड़ी कहती हैं, यदि आप बच्चों में वास्तविक सुधार चाहती हैं तो उन्हें शांति और स्पष्टता के साथ समझाएं। कठोर व्यवहार उनके मनोबल और प्रदर्शन दोनों को नुकसान पहुंचाता है तथा संबंधों में दूरी बढ़ाता है। जरूरी है कि आप उनकी भावनाओं को समझें और भावनात्मक रूप से उनके साथ रहें। डांट या तुलना से समस्या सामने नहीं आती। बेहतर है कि माता-पिता शिक्षक और काउंसलर के साथ मिलकर समाधान खोजें, लक्ष्य तय करें और बच्चे के समग्र विकास पर ध्यान दें, न कि केवल अंकों पर।
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