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UP Board Results 2025: बच्चे के नंबर कम आने की ये हो सकती हैं वजहें, जानिए उनसे डील करने के तरीके

Fri, 25 Apr 2025 01:28 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

आइए जानते हैं कि छात्र को परीक्षा में कम अंक क्यों मिलते हैं और जिन बच्चों के परीक्षा परिणाम मन मुताबिक न आए हों, उनकी निराशा को माता पिता कैसे कम करें ताकि बच्चा बेहतर करने के लिए प्रोत्साहित हो।
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क्यों परीक्षा में कम अंक आते हैं? - फोटो : Adobe Stock
UP Board Results 2025: जब कोई बच्चा परीक्षा में अच्छे अंक नहीं लाता है, तो यह छात्र और उसके माता-पिता दोनों के लिए निराशाजनक हो सकता है। आज उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने कक्षा 10 और 12 की बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम जारी किए दिए। आज का दिन कई घरों में मिली-जुली भावनाओं का दिन रहा। जहां बहुत से छात्रों और उनके माता पिता ने जश्न मना रहे हैं, वहीं कुछ को लग रहा है कि वह और बेहतर कर सकते थे। परीक्षा परिणाम उनके मन मुताबिक न आने से बच्चे हताश हो जाते हैं और उनसे ज्यादा निराशा छात्र के माता पिता होते हैं। 

कम अंकों से निराश महसूस कर रहे माता पिता और बच्चों को समझना चाहिए कि यही जीवन है। आपको जीवन में अनगिनत मौके मिलेंगे, इसलिए अंक कम क्यों आए हैं, इसका कारण जानिए, ताकि भविष्य में और बेहतर करने की कोशिश कर सकें। आइए जानते हैं कि छात्र को परीक्षा में कम अंक क्यों मिलते हैं और जिन बच्चों के परीक्षा परिणाम मन मुताबिक न आए हों, उनकी निराशा को माता पिता कैसे कम करें ताकि बच्चा बेहतर करने के लिए प्रोत्साहित हो।


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पढ़ाई की आदत और तैयारी - फोटो : adobe
पढ़ाई की आदत और तैयारी

हो सकता है कि बच्चे की स्टडी मैथर्ड इतनी प्रभावी न हो। जैसे कुछ बच्चे मात्र पढ़कर या समझाने से पाठ याद कर लेते हैं तो कुछ छात्रों को चीजे याद रखने के लिए उन्हें लिखने या उन पर चर्चा करने की जरूरत होती है। बच्चा पढ़ने में अच्छा है लेकिन अगर वह परीक्षा के अंतिम दिनों में रिविजन करने के बजाए पाठ रटने का प्रयास करता है तो वह अधिक प्रभावी तरीके से परीक्षा में उत्तर नहीं दे पाते। कह सकते हैं कि परीक्षा में अंक कम आने का एक कारण है कि परीक्षा से पहले की तैयारी सही तरीके से न किया जाना। 
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समय प्रबंधन - फोटो : freepik.com
समय प्रबंधन

हर विषय के लिए पर्याप्त समय देकर तैयारी की जानी चाहिए। हालांकि हो सकता है कि आपके बच्चे ने कमजोर विषय को पढ़ने के लिए अधिक वक्त लिया हो लेकिन उसने अन्य विषयों पर अधिक फोकस ना किया हो। इसके अलावा एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज में शामिल होने पर भी बच्चे को पढ़ने के लिए पर्याप्त समय निकालने में भी संघर्ष करना पड़ सकता है।

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परीक्षा की चिंता और तनाव - फोटो : adobe
परीक्षा की चिंता और तनाव

माता-पिता की उम्मीदें और शिक्षकों के दबाव के कारण बच्चा परीक्षा को लेकर चिंतित हो जाता है, जिसका असर उसके परीक्षा प्रदर्शन पर पड़ सकता है। बच्चा दबाव और चिंता के कारण सिरदर्द, पेट दर्द या परीक्षा के दौरान ध्यान केंद्रित करने में असमर्थ  हो जाता है। कई बार तो उसे प्रश्न पत्र आते हुए भी वह बेहतर उत्तर नहीं दे पाते।
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स्वास्थ्य - फोटो : फ्रीपिक
स्वास्थ्य

परीक्षा के दौरान अच्छे अंक लाने के दबाव में बच्चे दिन-रात पढ़ता है। कई बार तो उनकी नींद पूरी नहीं हो पाती, जिससे तबीयत खराब हो सकती है। ध्यान केंद्रित करना और पाठ याद रखना मुश्किल हो सकता है। खराब पोषण या डिहाइड्रेशन भी एकाग्रता और ऊर्जा के स्तर को प्रभावित कर सकता है। नियमित शारीरिक गतिविधि मस्तिष्क के कार्य को बढ़ाती है, जबकि गतिहीन जीवनशैली इसमें बाधा डाल सकती है।
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ध्यान भटकाना - फोटो : freepik.com
ध्यान भटकाना

शोरगुल या ध्यान भटकाने वाले माहौल में पढ़ाई करने से पढ़ाई की प्रभावशीलता कम हो सकती है। जरूरी अध्ययन सामग्री या शांत स्थान तक पहुंच की कमी से तैयारी में बाधा आ सकती है। हो सकता है कि जब आपका बच्चा पढ़ाई कर रहा हो तो उसे शांत और ध्यान केंद्रित करने वाला माहौल न मिल पाया हो।
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कम अंक आने या फेल होने पर बच्चे को कैसे संभालें - फोटो : Adobe
कम अंक आने या फेल होने पर बच्चे को कैसे संभालें
 
  • अगर यूपी बोर्ड परीक्षा परिणाम में आपका बच्चा फेल हो गया है या मनमुताबिक अंक हासिल नहीं हो सके हैं तो यहां से माता पिता की अधिक जिम्मेदारी शुरू होती है। बच्चे को डांटने या तुलना करने के बजाए उसे प्रोत्साहित करें। उनका आत्मविश्वास बढ़ाएं।
  • कम अंक आने या फेल होने पर माता पिता ध्यान रखें कि बच्चे को नकारात्मक प्रतिक्रिया न दें। उनकी मेहनत और प्रयासों की सराहना करें।
  • बच्चे को विश्वास दिलाएं कि वह आगे सफल हो सकता है। उनका आत्मविश्वास बढ़ाने का प्रयास करते हुए बताएं कि आपको उनकी क्षमताओं पर भरोसा है।
  • अंक कम आए हों या बच्चा परीक्षा में फेल हो गया हो, तब भी बच्चे का मूड ठीक करने के लिए सेलिब्रेट करें। यह सेलिब्रेशन उसके प्रयासों के  लिए हो।
  • बच्चे के सामने खुद निराश न हों। आपके दुखी या निराश होने का सीधा असर बच्चे के मन मस्तिष्क पर पड़ेगा और वह अधिक नकारात्मकता की ओर जा सकता है।
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