अरबों का नुकसान
इन मामूली चोरियों से नुकसान बहुत बड़ा होता है। मोटे अंदाजे के मुताबिक ऐसी छोटी-मोटी चोरियों से अरबों डॉलर का सालाना नुकसान होता है। इन चोरियों से कंपनियों के दफ्तर का सामान 35 फीसद तक कम हो जाता है। ये कई कंपनियों के सालाना कारोबार का 1.4 फीसद तक होता है। तो, अगर हमारा ऐसा बर्ताव अर्थव्यवस्था और कंपनी के लिए इतना घाटे का सौदा है, फिर भी हम ऐसी चोरियां क्यों करते हैं?
इस सवाल का जवाब मनोविज्ञान में छिपा है। हम जब नौकरी की शुरुआत करते हैं, तो कंपनी या आप को रोजगार देने वाले लोग आपसे कुछ वादे करते हैं। अक्सर ये ऐसी बातें होती हैं, जो नौकरी के कॉन्ट्रैक्ट का हिस्सा नहीं होती हैं।
जैसे काम के घंटे तय नहीं होंगे, काम का माहौल अच्छा होगा, दोस्ताना रहेगा, आप सुविधा के हिसाब से काम पर आ सकते हैं। ऐसे अनकहे वादे आप के अंदर उम्मीद जगाते हैं। जानकार इन्हें मनोवैज्ञानिक कॉन्ट्रैक्ट कहते हैं।
जब तक कंपनी अपने इन अनकहे वादों को पूरा करती रहती है तब तक नौकरी करने वाले के लिए भी सब कुछ ठीक रहता है। नौकरी करने वाले भी कंपनी के प्रति वफादार बने रहते हैं। पर, मुश्किल ये है कि शायद ही ऐसा होता हो। वक्त बीतते ही कंपनी और कर्मचारी एक-दूसरे से बेजार होने लगते हैं।