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खैर, मैंने भी ख़ुद को ये कहकर बहलाया कि मैं कोई आयुष्मान खुराना तो हूं नहीं। शायद इतने कम पैसे के कारण ही हम जैसे लोगों को डोनर कहा जाता है न कि सेलर। भले पैसे कम हों, लेकिन मेरे जीवन पर इसका एक सकारात्मक असर पड़ा है। अब लगता है कि स्पर्म्स को यूं ही बर्बाद नहीं करना चाहिए। दूसरा यह कि घर पर पहले की तरह हर दिन हस्तमैथुन करने की आदत छूट गई है।
मुझे ये भी पता है कि मैं कोई गलत काम नहीं कर रहा, लेकिन मैं इस बारे में सबको नहीं बता सकता। इसका मतलब ये कतई नहीं है कि मैं किसी से डरता हूं लेकिन मुझे नहीं लगता कि समाज इतना परिपक्व है कि वो इसे संवेदनशीलता से समझे। मेरे मन में कोई अपराध बोध नहीं है पर लोगों के बीच इसे बताना भी खतरे से खाली नहीं है।
गर्लफ्रेंड को बताने में दिक्कत नहीं
मैं इस बारे में अपने घर में भी किसी को नहीं बता सकता, क्योंकि मेरे माता-पिता को इस बात से झटका लगेगा। हालांकि दोस्तों के बीच ये विषय टैबू नहीं है और मेरे दोस्तों के बीच अब ये आम बात है। दिक्कत परिवार और रिश्तेदारों के बीच है।मुझे अपनी गर्लफ्रेंड को भी बताने में कोई दिक्कत नहीं है। वैसे अभी मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है। पहले थी, लेकिन मेरी जो भी गर्लफ्रेंड होगी वो पढ़ी-लिखी होगी और मुझे लगता है कि वो इसे सही ढंग से ही लेगी।
मुझे लगता है कि पत्नियां ज़्यादा पजेसिव होती हैं और वो नहीं चाहेंगी कि उनका पति शौक से जाकर किसी को स्पर्म दे। मैं अपनी पत्नी को ये बात नहीं बताना चाहूंगा।वैसे भी स्पर्म खरीदने वाले अविवाहित लड़कों को प्राथमिकता देते हैं और 25 तक की उम्र को ही ये इस लायक मानते हैं।