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मां पार्वती ने भी रखा था हरतालिका तीज का व्रत, ये मनोकामना हो गई थी पूरी

Mon, 02 Sep 2019 07:13 AM IST
मोना नारंग लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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हरतालिका तीज का व्रत भारत के उत्तरी क्षेत्र में मनाया जाता है। महिलाओं का यह व्रत बहुत कठिन होता है। इस दिन शादीशुदा महिलाएं पूरे दिन निर्जल रह कर सौभाग्यवती रहने का वरदान प्राप्त करती हैं। पुराणों में हरतालिका तीज को लेकर कई कहानियां सुनाई जाती हैं। माना जाता है कि इस व्रत को सबसे पहले इस व्रत की शुरूआत मां पार्वती जी ने की थी। आज महिलाएं इस व्रत को अपने पति की लंबी उम्र और कुंवारी लड़कियां मनचाहे वर को पाने के लिए रखती हैं। आइए इस खास दिन जानते हैं आखिर कौन सी ऐसी वजह थी जिसने खुद मां पार्वती को इस कठिन व्रत को रखने के लिए मजबूर कर दिया था। 
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shiv temple - फोटो : shiv temple
धार्मिक मान्यताओं की मानें तो यही वह दिन था जब मां पार्वती वर्षों की तपस्या व साधना के बाद शिव शंकर से मिली थीं। उन्होंने भी पहली बार इस व्रत को शंकर जी को पाने के लिए रखा था। इस दिन उनकी यह कथा सुनने का भी काफी बड़ा महत्व बताया जाता है।
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lord shiva
बताया जाता है कि मां पार्वती अपने पिता द्वारा आयोजित यज्ञ में पति भगवान शिव का अपमान सह नहीं सकीं इसलिए उन्होंने खुद को उसी यज्ञ की अग्नि में भस्म कर दिया। इसके बाद माता ने अपने अगले जन्म में राजा हिमाचल की पुत्री के रूप में जन्म लेकर भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की। 

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पार्वती और शिव - फोटो : google
मां पार्वती हर समय भगवान शिव की तपस्या में रहती थीं। जिसे देखकर उनके पिता राजा हिमाचल को बहुत चिंता होने लगी। उन्होंने नारद जी को बुलाकर इस विषय पर उनसे चर्चा की। जिसके बाद उन्होंने अपनी पुत्री का विवाह भगवान विष्णु से करवाने का मन बना लिया। 
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shiv parvati marriage in triyugi narayan
माता पार्वती को जब इस बात का पता चला कि उनके पिता उनका विवाह विष्णु जी से करवाना चाहते हैं तो उनके दिल को बहुत ठेस पहुंची और उन्होंने अपनी सखियों से कहा कि वो भगवान शिव के अलावा किसी और से विवाह नहीं करेंगी। जिसके बाद उनकी सखियां उन्हें घने जंगल में लेकर रहने चली गईं। सखियों द्वारा माता पार्वती के इस हरण की वजह से इस व्रत का नाम हरतालिका तीज रखा गया।  
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शिव पार्वती - फोटो : Social media
माता पार्वती इस कठिन व्रत को तब तक रखती रहीं जब तक उन्हें पति के रूप में भगवान शिव का साथ नहीं मिल गया। माता पार्वती की कठिन तपस्या से प्रेरणा लेते हुए आज महिलाएं हरतालिका तीज का यह कठिन व्रत रखती हैं। जबकि कुंवारी कन्याएं अपने पंसद के लड़के से शादी करने के लिए इस व्रत को रखती हैं। 
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