सामंजस्य जरूरी
- फोटो : Amar Ujala (File)
सामंजस्य जरूरी
कोई भी परिवार तब पूरा माना जाता है, जब उसमें माता-पिता के अलावा भाई-बहन भी हों। बचपन की मौज-मस्ती के लिए हमउम्र भाई-बहन का होना बहुत जरूरी है। बचपन में भाई-बहन के बीच प्यार बना रहता है। वहीं दोनों में जितना प्रेम होता है, उतने ही झगड़े भी होते हैं। बात-बात में मजाक उड़ाना और शिकायतें करना तो आम बात है। लेकिन ज्यादातर भाई-बहनों में आपसी स्नेह उनकी शादियों से पहले तक ही होता है। उसके बाद किसी न किसी बात पर बात बिगड़ ही जाती है। वहीं, मजाक में कही गई बात भी दिल पर लग जाती है। ऐसे में रिश्तों में प्यार और सही तालमेल बनाए रखने के लिए दोनों को कोशिशें करते रहना चाहिए।
भाभी का अहम रोल
सामान्यतः घरों में बहन की शादी के बाद जीजा जी से नया रिश्ता जुड़ता है, तो भाई की शादी के बाद भाभी से। भाई का सीधा संबंध जीजा जी से बहुत नजदीकी का नहीं होता। इसलिए इन दोनों के बीच शायद ही कभी तनाव के हालात बनते हों। लेकिन भाई की शादी के बाद भाभी के घर आने पर ननद से रिश्ता बहुत मायने रखता है। असल में, भाभी जब नए घर में आती है तो उसके सबसे ज्यादा नजदीक ननद ही होती है, फिर चाहे वह छोटी हो या बड़ी।
यह संबंध बेहद नाजुक होता है, इसलिए इसे प्यार और अपनेपन से संभालना जरूरी है। भाई और बहन के रिश्ते में तकरार होने से रोकने में भाभी अहम भूमिका निभाती है। वहीं, सास के बाद भाभी ही ननद की ससुराल में मां का फर्ज निभाती है। बहन की ससुराल में किसी संकट की स्थिति में भाई-भाभी की भूमिका कैसी रही, इस पर उसके पीहर का सम्मान भी निर्भर करता है।